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Bihar Assembly Election 2025 begins: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का आगाज, चुनावी प्रचार में महागठबंधन ने भरी हुंकार, चुनावी मैदान में एकसाथ उतरे राहुल-तेजस्वी, बिहार में दिख रही महागठबंधन की मजबूती

Bihar Assembly Election 2025 begins: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का आगाज

बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक दलों की हलचलें तेज हो गई हैं। एक वक्त ऐसा था जब महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए थे, जिससे विपक्षी दल एनडीए को हमला करने का भरपूर मौका मिल गया था। लेकिन अब महागठबंधन ने अपने भीतर की गांठें सुलझाने और एकजुटता का संदेश देने की पूरी कोशिश शुरू कर दी है। और वो कोशिश शुरू होती है

संवादहीनता को खत्म करने की कोशिश

महागठबंधन के भीतर सबसे बड़ी चुनौती सीट बंटवारे को लेकर आई थी। आरजेडी, कांग्रेस और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने अपने-अपने स्तर पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। कई जगहों पर एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारे जाने से भ्रम की स्थिति बन गई थी। इसे राजनीतिक गलियारों में संवाद की कमी कहा गया। इसी खाई को पाटने के लिए कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाया और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पटना भेजा गया। गहलोत ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव से मुलाकात की। इस मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद यह संदेश गया कि महागठबंधन अंदरूनी मतभेदों को सुलझाने में जुट गया है। दूसरी कोशिश थी

पटना में साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस से एकता के संदेश की

गहलोत और लालू प्रसाद यादव की मुलाकात के अगले ही दिन, 23 अक्टूबर को पटना में महागठबंधन की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें तेजस्वी यादव के साथ आरजेडी और कांग्रेस के नेता मंच पर मौजूद थे। इसी दौरान तेजस्वी यादव को महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया गया। इस ऐलान के साथ गठबंधन ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह अब एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने को तैयार है। हालांकि, इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी की गैरमौजूदगी ने बीजेपी को हमला करने का एक और मौका दे दिया। बीजेपी ने इसे कांग्रेस की नाराजगी से जोड़ते हुए तंज कसा कि महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। तीसरी कोशिश ये दिखी

घोषणापत्र में सुधारी गई ‘तस्वीर की गलती’

महागठबंधन ने इस बार अपनी पिछली गलती से सबक लिया। 28 अक्टूबर को जब गठबंधन ने अपना घोषणापत्र जारी किया, तो उसमें तेजस्वी यादव के साथ राहुल गांधी की तस्वीर को भी प्रमुखता से शामिल किया गया। पिछली बार जब राहुल की तस्वीर नदारद थी, तब बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाकर कहा था कि आरजेडी ने कांग्रेस को हाशिए पर धकेल दिया है। इस बार घोषणापत्र के कवर से लेकर उसके अंदरूनी पन्नों तक राहुल की मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि गठबंधन अब सामूहिक नेतृत्व की तस्वीर पेश करना चाहता है। अगली कोशिश या कह लें नीति

एनडीए से पहले पेश किया घोषणापत्र

सीट बंटवारे में भले ही महागठबंधन एनडीए से पीछे रह गया, लेकिन घोषणापत्र जारी करने में उसने बाजी मार ली। 28 अक्टूबर को तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन ने अपना घोषणापत्र ‘बिहार का तेजस्वी प्रण’ नाम से जारी किया। इसमें अगले पांच वर्षों के विकास एजेंडे का खाका पेश किया गया है। घोषणापत्र में युवाओं के लिए रोजगार, किसानों के लिए राहत और शिक्षा-स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार की बातें शामिल की गई हैं। महागठबंधन का दावा है कि यह घोषणापत्र बिहार के भविष्य की दिशा तय करेगा।

राहुल-तेजस्वी की साझा रैली से एकता का प्रदर्शन

महागठबंधन की एकजुटता को और मजबूत संदेश देने के लिए राहुल गांधी ने बुधवार को बिहार में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की। उनकी पहली जनसभा समस्तीपुर जिले के सकरा विधानसभा क्षेत्र में हुई, जहां उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के लिए वोट मांगा। इसके बाद राहुल दरभंगा पहुंचे, जहां उन्होंने आरजेडी उम्मीदवार के समर्थन में रैली की। इन रैलियों में तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं की संयुक्त मौजूदगी को गठबंधन की एकता का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की योजना

कांग्रेस ने इस चुनाव में अपने शीर्ष नेताओं के प्रचार कार्यक्रम को भी व्यवस्थित ढंग से तैयार किया है। राहुल गांधी कुल 10 रैलियां करेंगे, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तीन रैलियों को संबोधित करेंगे। प्रियंका गांधी वाड्रा सात जनसभाएं करेंगी। इस तरह कांग्रेस के बड़े नेता कुल 22 जनसभाओं के माध्यम से बिहार के मतदाताओं से संवाद करेंगे। खास बात यह है कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे किसी भी ‘फ्रेंडली फाइट’ वाली सीट पर प्रचार नहीं करेंगे।

संयुक्त रैली से होगा शक्ति प्रदर्शन

10 नवंबर को महागठबंधन की एक बड़ी संयुक्त रैली प्रस्तावित है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव और अन्य घटक दलों के शीर्ष नेता एक साथ मंच साझा करेंगे। यह रैली न केवल चुनावी एकजुटता का प्रदर्शन होगी, बल्कि विपक्षी एकता का भी प्रतीक बनने जा रही है।

महागठबंधन अब पूरी कोशिश में है कि जनता के बीच यह संदेश जाए कि मतभेद पीछे छूट गए हैं और गठबंधन अब एकजुट होकर बिहार की सत्ता की लड़ाई लड़ने को तैयार है। सीट बंटवारे की उलझनों से लेकर घोषणापत्र और साझा रैलियों तक, विपक्ष यह दिखाने की कोशिश में है कि वह अब बिखरा हुआ नहीं, बल्कि संगठित है।

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