दिल्ली

MCD उपचुनाव से पहले AAP को बड़ा झटका!, AAP के पूर्व MLA राजेश गुप्ता BJP में शामिल!

MCD उपचुनाव से पहले AAP को बड़ा झटका!

 

दिल्ली की सियासत में शनिवार का दिन बेहद हलचल भरा रहा। एमसीडी उपचुनाव से महज कुछ घंटे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को एक गंभीर झटका लगा है। वजीरपुर से पूर्व विधायक रह चुके राजेश गुप्ता ने भगवा दामन थामते हुए BJP में औपचारिक रूप से शामिल होने का ऐलान कर दिया। दिल्ली BJP अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई और स्वागत किया।

ये कदम ऐसे समय आया है जब राजधानी में एमसीडी की 12 सीटों पर उपचुनाव का रण पूरी तरह गरमा चुका है। शुक्रवार शाम को चुनाव प्रचार समाप्त हो गया था, लेकिन सियासी सरगर्मी अभी भी चरम पर है। राजेश गुप्ता का BJP में जाना सीधे तौर पर AAP के लिए राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है, क्योंकि गुप्ता उत्तरी दिल्ली के वजीरपुर इलाके में पहचान रखने वाले नेताओं में शुमार रहे हैं।

चुनाव से ठीक पहले इस तरह की बगावत AAP की रणनीति और जनसंपर्क अभियान पर असर डाल सकती है

इन 12 वार्डों पर उपचुनाव की वोटिंग रविवार को आयोजित होगी। चुनाव आयोग के मुताबिक कुल 6,99,537 मतदाता इन चुनावों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। खास बात ये है कि, पहली बार इन उपचुनावों में 4,884 वोटर EVM के माध्यम से मतदान करेंगे। वहीं 3,204 दिव्यांग वोटरों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि वे सहजता से मतदान कर सकें

इन 12 वार्डों में कुल 51 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। तीनों प्रमुख पार्टियां—BJPभाजपा, AAP और कांग्रेस—इन चुनावों को पूरे दमखम के साथ लड़ रही हैं। उपचुनाव भले ही छोटे पैमाने पर हों, लेकिन इनके नतीजों से दिल्ली की सियासी हवा का रुख समझने में बड़ी मदद मिलती है।

शुक्रवार शाम 5 बजे प्रचार खत्म होने से पहले सभी पार्टियों ने हर वार्ड में पूरी ताकत झोंक दी। BJP की ओर से सांसद, विधायक, पूर्व पार्षद और पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार सड़कों पर दिखाई दिए। दिल्ली BJP अध्यक्ष वीरेंद्र सच्चदेवा, मुख्यमंत्री चेहरा मानी जाने वाली रेखा गुप्ता से लेकर कई स्थानीय नेताओं ने घर-घर पहुंचकर मतदाताओं से BJP उम्मीदवारों को जिताने की अपील की।

दूसरी तरफ AAP भी पीछे नहीं रही। पार्टी के मंत्री, विधायक और पार्षदों ने अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए मोहल्ला स्तर तक जाकर जनसंपर्क किया। दिल्ली सरकार के कार्यों और एमसीडी में बदलाव के दावों को चुनावी मुद्दा बनाकर जनता तक पहुंचाया गया। वहीं कांग्रेस भी अपने पुराने समर्थकों को एकजुट करने में जुटी रही।

राजेश गुप्ता का कांग्रेस या किसी अन्य दल में नहीं बल्कि सीधे BJP में शामिल होना इस बात का संकेत है कि, BJP दिल्ली में अपनी संगठनात्मक पकड़ और मजबूत करना चाहती है। वहीं AAP के लिए ये सिर्फ एक “डैमेज” नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक झटका भी माना जा रहा है, क्योंकि उपचुनाव के ठीक 24 घंटे पहले किसी पूर्व MLA का पार्टी छोड़ना असंतोष की ओर भी इशारा करता है।

हालांकि AAP ने इस राजनीतिक उथल-पुथल पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अंदरूनी तौर पर इसे उपचुनाव की रणनीति में अचानक आया मोड़ माना जा रहा है।

अब सभी की नजरें रविवार को होने वाले मतदान और 3 दिसंबर की गिनती पर टिकी हैं। उपचुनाव भले ही सीमित हों, लेकिन इनके नतीजे आने वाले महीनों में दिल्ली की राजनीति की दिशा तय करने की क्षमता रखते हैं।

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