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BENGALURU: IFFCO, NCUI के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने किया देवनहल्ली स्थित नैनो उर्वरक संयंत्र का उद्घाटन

BENGALURU: IFFCO, NCUI के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने किया देवनहल्ली स्थित नैनो उर्वरक संयंत्र का उद्घाटन

भारत के उर्वरक क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है। देश की अग्रणी सहकारी संस्था इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइज़र कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) ने कर्नाटक के देवनहल्ली (बेंगलुरु) में अपने अत्याधुनिक नैनो उर्वरक संयंत्र का उद्घाटन किया। इस संयंत्र का उद्घाटन IFFCO और नेशनल कोऑपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया (NCUI) के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने किया। यह संयंत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की “सहकार से समृद्धि” पहल को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

उद्घाटन समारोह के दौरान दिलीप संघाणी ने संयंत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने नैनो उर्वरक के उत्पादन तंत्र, गुणवत्ता जांच मानकों और तकनीकी क्षमताओं का जायजा लिया। IFFCO के अधिकारियों और वैज्ञानिकों के साथ विशेष संवाद में उन्होंने नैनो उर्वरकों की क्षमता और भारत की कृषि प्रणाली में उनके बढ़ते महत्व पर गहन चर्चा की।

‘सहकार से समृद्धि’ की दिशा में बड़ा कदम

संघाणी ने कहा कि, ये संयंत्र न केवल IFFCO की तकनीकी उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” और “सहकार से समृद्धि” के विजन को साकार करने वाला ठोस उदाहरण भी है। उन्होंने कहा कि, सहकारी क्षेत्र अब पारंपरिक सीमाओं से निकलकर नवाचार और तकनीकी विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।

IFFCO द्वारा स्थापित ये नैनो उर्वरक संयंत्र दक्षिण भारत में पहली बार इस पैमाने पर तैयार किया गया है। ये संयंत्र 12 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और प्रतिदिन 2 लाख बोतलें नैनो यूरिया प्लस का उत्पादन करने में सक्षम है। ये उत्पादन क्षमता देश की बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता को कम करने में भी मदद करेगी।

नैनो उर्वरक : कृषि क्रांति की नई दिशा

IFFCO का नैनो उर्वरक प्रोजेक्ट भारत में ‘सटीक खेती’ (Precision Farming) की अवधारणा को गति देने वाला साबित हो रहा है। नैनो यूरिया पारंपरिक यूरिया की तुलना में न केवल अधिक प्रभावी है, बल्कि ये मिट्टी और पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव को भी कम करता है। एक छोटी बोतल नैनो यूरिया, लगभग 45 किलो पारंपरिक यूरिया के बराबर काम करती है।

ये नवाचार न केवल किसानों के उत्पादन लागत को घटाता है, बल्कि भूमि की उर्वरता को बनाए रखने में भी योगदान देता है। नैनो टेक्नोलॉजी आधारित यह उत्पाद पौधों को बेहतर नाइट्रोजन उपलब्ध कराकर उत्पादन क्षमता को बढ़ाता है और फसल की गुणवत्ता में सुधार लाता है।

तकनीकी उत्कृष्टता और पर्यावरणीय संतुलन

देवनहल्ली संयंत्र पूरी तरह स्वचालित और आधुनिक तकनीकों से लैस है। यहां उत्पादन, फिलिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता जांच की प्रत्येक प्रक्रिया डिजिटल रूप से नियंत्रित होती है। इसके साथ ही, संयंत्र में प्रदूषण नियंत्रण और ऊर्जा दक्षता के लिए नवीनतम मानक अपनाए गए हैं।

IFFCO के प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल ने बताया कि संस्था का लक्ष्य है 2026 तक देशभर में नैनो फर्टिलाइज़र के 10 संयंत्र स्थापित करना। उनका कहना था कि, IFFCO की ये पहल कृषि क्षेत्र में “हरित तकनीकी क्रांति” का आधार बनेगी।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व

इस संयंत्र का उद्घाटन केवल कर्नाटक के किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण भारत के कृषि क्षेत्र के लिए बड़े बदलाव की शुरुआत है। नैनो यूरिया उत्पादन से परंपरागत यूरिया की मांग में कमी आएगी, जिससे भारत की आयात निर्भरता घटेगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। साथ ही, भारत नैनो तकनीक आधारित उर्वरकों के निर्यातक देशों की सूची में शामिल होने की दिशा में अग्रसर होगा।

IFFCO की ये पहल भारत को वैश्विक स्तर पर टिकाऊ कृषि और स्मार्ट फर्टिलाइज़र उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की क्षमता रखती है। संघाणी ने कहा कि आने वाले वर्षों में इसी मॉडल के और संयंत्र स्थापित किए जाएंगे ताकि देश का हर किसान इस तकनीक का लाभ उठा सके।

IFFCO नेतृत्व का सामूहिक उपस्थित

उद्घाटन समारोह में संस्था के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें IFFCO के उपाध्यक्ष बलवीरसिंह, पूर्व अध्यक्ष के. श्रीनिवासन गौड़ा, प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल, प्रलादसिंह, विजयशंकर राय, विवेक कोहले, सुब्रजीत पाधी, मारा गंगा रेड्डी, वाल्मीकि त्रिपाठी, जयेश रादड़िया, उमेश त्रिपाठी, भावेश रादड़िया, प्रेमचंद मुनशी, मुकुल कुमार और नैनो इकाई प्रमुख संजय कुलश्रेष्ठ समेत निदेशक मंडल के सदस्य उपस्थित रहे।

सभी ने संयंत्र की तकनीकी क्षमताओं की सराहना की और कहा कि ये परियोजना किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाएगी।

नवाचार और सहकार का संगम

IFFCO की पहचान एक ऐसी संस्था के रूप में है जिसने सहकारी आंदोलन को तकनीकी नवाचार के साथ जोड़ा। देवनहल्ली संयंत्र इसी सोच का मूर्त रूप है, जहां विज्ञान, तकनीक और सहकारिता हाथ में हाथ डालकर “हरित भारत, सशक्त किसान” के मिशन को साकार कर रहे हैं।

दिलीप संघाणी ने कहा कि “नैनो उर्वरक केवल एक उत्पाद नहीं बल्कि भारत की आत्मनिर्भर कृषि क्रांति का प्रतीक है।” उन्होंने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम को बधाई दी और भविष्य में किसानों के लिए और भी नवाचार आधारित परियोजनाएं लाने का संकल्प जताया।

निष्कर्ष रूप में, देवनहल्ली नैनो उर्वरक संयंत्र का उद्घाटन भारत की कृषि तकनीक को नए युग में प्रवेश कराने वाला कदम है। ये केवल IFFCO का औद्योगिक विस्तार नहीं बल्कि विज्ञान, सहकारिता और आत्मनिर्भरता का एक सफल संगम है, जो आने वाले समय में भारतीय किसान को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और समृद्ध बनाएगा।

Abhishek Saini

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