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तेल संकट के बीच मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला, जारी किया…..

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के एविएशन सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण एयरलाइंस कंपनियों की लागत तेजी से बढ़ रही है। इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के विशेष ATF फंड को मंजूरी दी गई है। सरकार का उद्देश्य विमानन क्षेत्र को ईंधन की बढ़ती कीमतों के झटके से बचाना और एयरलाइंस के संचालन को सुचारु बनाए रखना है।

सरकार के अनुसार, यह राशि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को ब्याज-मुक्त अग्रिम सहायता के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण एयरलाइंस पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव का असर सीधे OMC पर भी पड़ता है। ऐसे में यह फंड कंपनियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगा और ATF की कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करने में मदद करेगा।

कैबिनेट के फैसले के तहत ATF प्राइस स्टेबलाइजेशन सपोर्ट योजना को 36 महीने यानी तीन साल तक लागू रखा जाएगा। हालांकि सरकार हर साल इसकी समीक्षा करेगी। यदि सहायता राशि की पूरी वसूली और समायोजन तय समय से पहले हो जाता है, तो योजना को उससे पहले भी समाप्त किया जा सकता है।

इस योजना की एक अहम शर्त भी रखी गई है। जो एयरलाइंस इस व्यवस्था का लाभ उठाएंगी, उन्हें अधिकतम तीन वर्षों तक केवल ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से ही ATF खरीदना होगा। सरकार का मानना है कि इससे ईंधन आपूर्ति व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी और एयरलाइंस अपने खर्चों की बेहतर योजना बना सकेंगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि विमानन उद्योग में ईंधन लागत कुल परिचालन खर्च का बड़ा हिस्सा होती है। ऐसे में ATF की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी एयरलाइंस के मुनाफे को सीधे प्रभावित करती है। सरकार का यह कदम कंपनियों को आर्थिक स्थिरता देने और हवाई सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ATF की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। मार्च 2026 में ATF की कीमत करीब 60.50 रुपये प्रति लीटर थी, लेकिन मई 2026 तक यह बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई। यानी सिर्फ दो महीनों के भीतर कीमतों में करीब ढाई गुना वृद्धि दर्ज की गई।

ईंधन की इस तेजी ने एयरलाइंस कंपनियों के लिए परिचालन लागत को काफी बढ़ा दिया है। कई कंपनियां टिकट कीमतों और अन्य खर्चों को लेकर नई रणनीति बनाने पर मजबूर हुई हैं। ऐसे में सरकार का यह 10 हजार करोड़ रुपये का फंड विमानन उद्योग के लिए राहत पैकेज की तरह देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर तेल कीमतों में अस्थिरता बनी रहती है, तो यह योजना भारतीय एयरलाइंस को आर्थिक झटकों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही यात्रियों पर किराया बढ़ोतरी का दबाव भी कुछ हद तक कम किया जा सकेगा।

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