अमेरिकी हमले के बाद से ईरान का 400 किलो यूरेनियम गायब, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की पुष्टि
ईरान-इजरायल युद्ध के दौरान दोनों देशों का काफी नुकसान हुआ है। क्योंकि, इस युद्ध में अमेरिका ने भी ईरान पर एयर स्ट्राइक की, जिसके बाद से, ईरान का 400 किलो यूरेनियम गायब हो गया है। ये खुद अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्वीकार किया है। आपको बता दें कि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माना है कि पिछले हफ्ते ईरान की तीन परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के हवाई हमले किये थ। जिसके बाद यूरेनियम का 400 किलोग्राम भंडार गायब हो गया है। उन्होंने ये भी माना है कि, 400 किलो यूरेनियम से कम से कम 10 परमाणु बमों का निर्माण हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक ये 400 किलो यूरेनियम करीब 60 प्रतिशत तक इनहैंसड है, और परमाणु बम बनाने के लिए 90 प्रतिशत इनहैंसड होना जरूरी है। दावा किया गया था कि, ईरान 3-4 हफ्तों में 60 प्रतिशत से 90 प्रतिशत यूरेनियम इनहैंसड कर लेता, इसीलिए इजरायल ने ईरान पर हमला किया था। रिपोर्ट के मुताबिक 60 प्रतिशत तक इनहैंसड किया गया यूरेनियम ईरान के प्रमुख स्थलों पर रखा गया था और अब माना जाता है कि, अमेरिका के हमले से पहले इसे हटा दिया गया था।
हालांकि अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने ये भी दावा किया है कि, अमेरिका को यकीन है कि फोर्डो, नतांज और इस्फहान में मौजूद ईरानी परमाणु ठिकानों को या तो “गंभीर क्षति” पहुंची है या वे “पूरी तरह से नष्ट” हो चुके हैं। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि, वो सटीक जानकारी नहीं दे सकते हैं, और इसको लेकर वो पूरी तरह से निश्चित नहीं हैं। जेडी वेंस ने कहा है कि, ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद गायब हुए, लगभग 400 किलोग्राम यूरेनियम के मामले में ईरान के साथ बातचीत की जाएगी।
जेडी वेंस का ये भी कहना है कि, “हम आने वाले हफ्तों में ये सुनिश्चित करने के लिए काम करने जा रहे हैं कि हम उस ईंधन के साथ कुछ करें, और ये उन चीजों में से एक है, जिसके बारे में हम ईरानियों के साथ बातचीत करने जा रहे हैं।” उन्होंने पुष्टि करते हुए कहा कि, ऑपरेशन का मुख्य मकसद फोर्डो परमाणु सुविधा को निशाना बनाना था। उन्होंने कहा कि “ये मिशन का उद्देश्य था, फोर्डो परमाणु स्थल को नष्ट करना और निश्चित रूप से दूसरे परमाणु स्थलों को नुकसान पहुंचाना। लेकिन हमें पूरा विश्वास है कि, फोर्डो परमाणु स्थल को काफी नुकसान पहुंचाया गया था और ये ही हमारा लक्ष्य था।” एक्सपर्ट्स का मानना है कि, शायद अब ईरान के पास वो क्षमता नहीं बची है कि, वो 60 प्रतिशत इनहैंसड यूरेनियम को पहले की तरह कुछ हफ्तों में 90 प्रतिशत तक इनहैंसड कर दे, लेकिन उनका मानना है कि, ईरान इसका इस्तेमाल सौदेबाजी चिप के लिए कर सकता है।
दूसरी तरफ इजरायली अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया है कि ईरान ने हमले से पहले यूरेनियम भंडार और उपकरणों को एक गुप्त स्थान पर ले गया होगा। अमेरिकी हमलों से पहले ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में फोर्डो परमाणु सुविधा के बाहर 16 ट्रकों का काफिला दिखाई दिया था, उन तस्वीरों को देखकर ही इजरायल ने अमेरिका के ऊपर तत्काल हमला करने का दबाव बनाया था। जिसके बाद ही अमेरिका ने ईरान पर एयर स्ट्राइक की थी। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि, ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान में मौजूद इन परमाणु ठिकानों को काफी नुकसान पहुंचा है, लेकिन ये नुकसान कितना है, इसकी पुष्टि होनी बाकी है। लेकिन ये 16 ट्रक कहां गये, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। जबकि अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों का मानना है, कि यूरेनियम और प्रमुख रिसर्च सामग्री और कंपोनेंट को ईरान की प्राचीन राजधानी इस्फहान के पास एक अंडरग्राउंड बंकर में ट्रांसफर कर दिया गया है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने बताया है कि उन्होंने फोर्डो साइट की आखिरी बार जांच हमले से एक हफ्ते पहले की थी। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने ईरान की सुरक्षा परिषद से अनुरोध किया है कि, उन्हें फिर से फोर्डो साइट पर जांच की इजाजत दी जाए। लेकिन कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान IAEA से बाहर आ सकता है और शायद ही अधिकारियों को जांच की इजाजत दी जाए। ग्रोसी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि, “जारी सैन्य कार्रवाई परमाणु वार्ता की संभावनाओं को खत्म कर सकती है और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है। ये बेहद जरूरी है कि IAEA को तत्काल साइट का निरीक्षण करने की अनुमति दी जाए। ईरान ने बार-बार दावा किया है, कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, लेकिन इज़राइल लंबे समय से ईरानी परमाणु हथियारों को अपने अस्तित्व के लिए खतरा बताता है। इजरायल ने बार बार चेतावनी दी थी कि ईरान, किसी भी वक्त परमाणु हथियार बना सकता है।
हमलों के तुरंत बाद ईरान ने Non-Proliferation Treaty यानी की (NPT) से बाहर निकलने की धमकी दी है। NPT, परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए वैश्विक संधि है। ईरान के उप विदेश मंत्री तख्त रवांची ने कहा है कि, “कोई हमें नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए।” ये संकेत है कि, तेहरान अब पश्चिमी देशों के किसी भी गाइडलाइन को मानने के लिए तैयार नहीं है। ईरान अब खुले तौर पर कह रहा है कि, अगर उसकी संप्रभुता और सुरक्षा के साथ समझौता किया गया, तो वो अपने कार्यक्रम को और तेजी से आगे बढ़ाएगा। ये ही वजह है कि, संवर्धित यूरेनियम के गायब होने की खबर ने दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है।
अमेरिका, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जो कहानी बना रहा है, वो माथा चकराने वाला है। अमेरिकी अधिकारी खुद बार बार बयान बदल रहे हैं। इजरायल के पहले हमले के बाद एक रिपोर्ट में कहा गया था कि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने आकलन किया है कि ईरान सक्रिय रूप से परमाणु बम नहीं बना रहा है और उसे अभी भी एक बम बनाने में लगभग तीन साल लगेंगे। अब सूत्रों का कहना है कि, मौजूदा हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सिर्फ कुछ महीनों के लिए पीछे धकेला है। अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड भी डोनाल्ड ट्रंप की फटकार के बाद अपने बयान को बदल दिया है।
पहले उन्होंने अमेरिकी संसद से कहा था कि “ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा है।” लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि ईरान “कुछ हफ्तों के भीतर” परमाणु हथियार बना सकता है। बयान में ये बदलाव न सिर्फ अमेरिका की खुफिया प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है, बल्कि इस पूरे हमले की वैधता पर भी सवाल उठाता है?
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