विदेश

नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर बड़ा समझौता, गृह मंत्री को 3 महीने में प्रक्रिया आगे बढ़ाने का समय

काठमांडू, 2 अगस्त 2026: नेपाल में एक बार फिर देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। हिंदू संगठनों और सरकार के बीच हुए एक कथित 13-सूत्रीय समझौते के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। समझौते में गृह मंत्री को नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग पर आगे की प्रक्रिया और बातचीत को तीन महीने के भीतर आगे बढ़ाने का समय दिए जाने की बात सामने आई है।

नेपाल वर्ष 2008 तक दुनिया का एकमात्र आधिकारिक हिंदू राष्ट्र था। राजशाही समाप्त होने और नए संविधान लागू होने के बाद नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया था। इसके बाद से कई हिंदू संगठन लगातार नेपाल की पुरानी धार्मिक पहचान को बहाल करने की मांग करते रहे हैं।

13 बिंदुओं वाले समझौते पर चर्चा
रिपोर्टों के अनुसार, हिंदू संगठनों और सरकार के बीच हुए समझौते में धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और हिंदू राष्ट्र की मांग से जुड़े कई मुद्दों को शामिल किया गया है। समझौते के तहत सरकार से इस विषय पर चर्चा और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया की दिशा में कदम बढ़ाने की मांग की गई है।

हालांकि, अभी तक नेपाल सरकार की ओर से नेपाल को आधिकारिक रूप से हिंदू राष्ट्र घोषित करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। इस मुद्दे पर आगे की प्रक्रिया संविधान और राजनीतिक सहमति के आधार पर ही तय होगी।

नेपाल में बढ़ रही धार्मिक पहचान की बहस
नेपाल में पिछले कुछ समय से धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर बहस तेज हुई है। कुछ संगठन मानते हैं कि नेपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ों को देखते हुए इसे फिर से हिंदू राष्ट्र बनाया जाना चाहिए, जबकि कई राजनीतिक दल और समूह धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था को बनाए रखने के पक्ष में हैं।

हाल के दिनों में नेपाल के कुछ इलाकों में धार्मिक तनाव की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिसके बाद सरकार ने शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया है।

संविधान संशोधन की राह आसान नहीं
नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए संवैधानिक बदलाव की आवश्यकता होगी। इसके लिए संसद में व्यापक राजनीतिक सहमति जरूरी होगी। नेपाल की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था धर्मनिरपेक्षता को देश के मूल सिद्धांतों में शामिल करती है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में नेपाल की राजनीति को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि धार्मिक पहचान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।

Deepak Arora

दीपक अरोड़ा एक मीडिया उद्यमी, डिजिटल रणनीतिकार और लेखक हैं। "दीपक की कलम से" के माध्यम से वे राजनीति, समाज, शिक्षा, मीडिया और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार और विश्लेषण पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनकी लेखनी का उद्देश्य जागरूकता, संवाद और सकारात्मक सामाजिक चिंतन को बढ़ावा देना है।

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