D2M Latest Update 2026: बिना इंटरनेट मोबाइल पर देख सकेंगे Live TV? सरकार ने दिया बड़ा अपडेट
नई दिल्ली: मोबाइल फोन पर बिना इंटरनेट और मोबाइल डेटा के Live TV देखने की सुविधा को लेकर D2M (Direct-to-Mobile) तकनीक एक बार फिर चर्चा में है। इस तकनीक के जरिए टीवी चैनलों और दूसरे वीडियो कंटेंट को सीधे मोबाइल फोन तक पहुंचाने की योजना है।
MeitY की सिफारिश के बाद स्मार्टफोन कंपनियों के लिए D2M को अनिवार्य करने की योजना फिलहाल स्पष्ट नहीं है। प्रसार भारती के CEO गौरव द्विवेदी के मुताबिक, मोबाइल कंपनियों पर D2M चिप लगाने का दबाव नहीं होगा। कुछ कंपनियों ने इसके प्रोटोटाइप तैयार किए हैं, जबकि अन्य कंपनियां बाजार की मांग के आधार पर फैसला लेंगी।
क्या है D2M [D2M Latest Update 2026:] Technology?
D2M यानी Direct-to-Mobile एक ऐसी तकनीक है जिसमें मोबाइल फोन तक वीडियो और ऑडियो कंटेंट सीधे ब्रॉडकास्ट नेटवर्क के जरिए पहुंचाया जा सकता है।
इसमें सामान्य मोबाइल इंटरनेट की जरूरत नहीं पड़ती। यानी जहां D2M सेवा और सही हार्डवेयर उपलब्ध होगा, वहां यूजर मोबाइल डेटा खर्च किए बिना कुछ Live TV और दूसरे ब्रॉडकास्ट कंटेंट देख सकता है।
सरकार के अनुसार इस तकनीक का इस्तेमाल केवल मनोरंजन के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षा और जरूरी सरकारी सूचनाएं पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है।
क्या हर मोबाइल में चलेगा Free Live TV?
नहीं। यही D2M को लेकर सबसे जरूरी बात है।
D2M का इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल में जरूरी तकनीकी सपोर्ट होना चाहिए। अगर किसी फोन में D2M रिसीवर या उससे जुड़ी तकनीक नहीं है, तो उसमें यह सेवा सीधे नहीं चलेगी।
सरकार ने अभी सभी मोबाइल कंपनियों के लिए D2M हार्डवेयर लगाना अनिवार्य नहीं किया है। इसलिए भविष्य में भी हर स्मार्टफोन पर D2M उपलब्ध होगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।
D2M को लेकर सरकार आगे क्या कर रही है?
भारत में D2M को लंबे समय से विकसित और टेस्ट किया जा रहा है। अब यह तकनीक टेस्टिंग से आगे बढ़कर इसके व्यावसायिक इस्तेमाल की दिशा में जा रही है।
Prasar Bharati की ओर से इसके लिए आगे की योजना तैयार की जा रही है। इसके तहत D2M सेवा को बड़े स्तर पर शुरू करने के लिए DPR (Detailed Project Report) और आगे की प्रक्रिया पर काम हो रहा है।
D2M को लागू करने में निजी कंपनियों की भागीदारी भी हो सकती है। इसके लिए PPP यानी Public-Private Partnership मॉडल का इस्तेमाल किए जाने की योजना है।
मोबाइल यूजर्स को क्या फायदा होगा?
अगर D2M तकनीक बड़े स्तर पर लागू होती है और ज्यादा मोबाइल फोन इसे सपोर्ट करने लगते हैं, तो यूजर्स को कई फायदे मिल सकते हैं।
सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कुछ Live TV और ब्रॉडकास्ट कंटेंट देखने के लिए मोबाइल डेटा की जरूरत कम हो सकती है।
इसके अलावा D2M का इस्तेमाल शिक्षा, सरकारी जानकारी और आपदा के समय जरूरी संदेश लोगों तक पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए बाढ़, भूकंप या किसी अन्य आपात स्थिति में जरूरी सूचना बड़ी संख्या में मोबाइल डिवाइस तक पहुंचाई जा सकती है।
क्या D2M इंटरनेट को खत्म कर देगा?
ऐसा नहीं है। D2M और इंटरनेट दोनों की भूमिका अलग-अलग है।
इंटरनेट के जरिए यूजर अपनी पसंद का कंटेंट कभी भी देख सकता है, जबकि D2M मुख्य रूप से ब्रॉडकास्ट कंटेंट को एक साथ बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाने के लिए उपयोगी हो सकता है।
इसलिए D2M को इंटरनेट का विकल्प नहीं, बल्कि मोबाइल ब्रॉडकास्टिंग की एक अलग तकनीक के रूप में समझना बेहतर होगा।
D2M की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
D2M की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने मोबाइल फोन इसे सपोर्ट करते हैं।
अगर मोबाइल कंपनियां अपने नए डिवाइस में D2M की सुविधा देना शुरू करती हैं और लोगों के पास बड़ी संख्या में compatible फोन आते हैं, तो इस तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है।
फिलहाल सरकार का D2M को अनिवार्य नहीं करना इस तकनीक के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि मोबाइल कंपनियां और यूजर्स इसे कितनी तेजी से अपनाते हैं।
D2M भारत में मोबाइल और टीवी देखने के तरीके को बदलने की क्षमता रखने वाली तकनीक है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि compatible मोबाइल पर कुछ ब्रॉडकास्ट कंटेंट देखने के लिए सामान्य मोबाइल डेटा की जरूरत न पड़े। हालांकि, अभी यह सुविधा हर मोबाइल में उपलब्ध नहीं है। D2M का असली असर तब दिखाई देगा, जब इसके लिए जरूरी नेटवर्क और compatible smartphones बड़े स्तर पर उपलब्ध होंगे।

