हर महीने 2 सेंटीमीटर धंस रही इस शहर की जमीन

NASA और ISRO का संयुक्त अंतरिक्ष मिशन NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) अब पृथ्वी पर हो रहे बड़े बदलावों को बहुत ही बारीकी से समझने में मदद कर रहा है। इस सैटेलाइट ने हाल ही में मैक्सिको सिटी के नीचे जमीन के धंसने (sinking land) का एक बेहद सटीक नक्शा तैयार किया है, जिससे वैज्ञानिकों को शहर की स्थिति को समझने में बड़ी मदद मिली है।

मैक्सिको सिटी दुनिया के सबसे तेजी से धंसते शहरों में से एक माना जाता है। यहां लगभग 2 करोड़ लोग रहते हैं। यह शहर एक प्राचीन झील की सूखी तलहटी पर बसा हुआ है। समय के साथ जैसे-जैसे शहर का विस्तार हुआ और जनसंख्या बढ़ी, वैसे-वैसे पानी की जरूरत भी बढ़ती गई। इसी कारण भूजल (groundwater) का बहुत ज्यादा दोहन किया गया। जब जमीन के अंदर से पानी लगातार निकाला जाता है, तो मिट्टी कमजोर हो जाती है और जमीन धीरे-धीरे नीचे धंसने लगती है।

नाबोर कैरिलो झील भी पाताल में जा रही है. (Photo: Getty)

यह समस्या नई नहीं है। 1925 में पहली बार एक इंजीनियर ने इस जमीन धंसने की बात दर्ज की थी। इसके बाद 1990 और 2000 के दशक में हालात और भी गंभीर हो गए थे। उस समय शहर के कुछ हिस्से हर साल लगभग 35 सेंटीमीटर तक धंस रहे थे। इसका असर सीधा शहर की बुनियादी संरचना पर पड़ा—मेट्रो सिस्टम, सड़कें और कई इमारतें तक क्षतिग्रस्त होने लगीं।

एंजेल ऑफ इंडिपेंडेंस मूर्ति की जमीन धंस रही है. (Photo: Getty

इसी गंभीर समस्या को समझने और लगातार निगरानी करने के लिए NISAR सैटेलाइट को जुलाई 2025 में लॉन्च किया गया था। यह सैटेलाइट L-बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार तकनीक का उपयोग करता है, जो इसे बेहद खास बनाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दिन हो या रात, बारिश हो या धूप, और यहां तक कि घने बादलों या पेड़-पौधों की मौजूदगी में भी पृथ्वी की सतह को साफ-साफ देख सकता है।

NISAR एक ही जगह से बार-बार गुजरकर बहुत छोटे-छोटे बदलावों को भी रिकॉर्ड करता है। इसमें जमीन का धीरे-धीरे धंसना, ग्लेशियरों का खिसकना और यहां तक कि फसलों की बढ़त तक को ट्रैक किया जा सकता है। अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच मिले शुरुआती आंकड़ों से पता चला कि मैक्सिको सिटी के कुछ हिस्से हर महीने करीब 2 सेंटीमीटर (लगभग आधा इंच) तक धंस रहे हैं। यह एक बहुत बड़ा संकेत है कि समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है।

सैटेलाइट की तस्वीरों में कुछ हिस्से गहरे नीले रंग में दिख रहे हैं, जो सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र हैं। वहीं पीले और लाल रंग वाले इलाके अभी शुरुआती या संभावित बदलाव वाले क्षेत्र हो सकते हैं, जिन पर आगे और डेटा आने के बाद और स्पष्टता मिलेगी। शहर के प्रमुख स्थान भी इस नक्शे में साफ दिखाई दे रहे हैं, जैसे बेनिटो जुआरेज इंटरनेशनल एयरपोर्ट और पास की नाबोर कैरिलो झील। इससे वैज्ञानिकों को शहर की भौगोलिक स्थिति और बदलावों को समझने में और आसानी हो रही है।

मैक्सिको सिटी का एक और मशहूर उदाहरण एंजेल ऑफ इंडिपेंडेंस (Angel of Independence) स्मारक है, जो इस समस्या का जीवंत प्रमाण माना जाता है। यह 1910 में बनाया गया था और इसकी ऊंचाई लगभग 36 मीटर है। लेकिन जमीन के लगातार धंसने के कारण इसके चारों ओर समय के साथ 14 अतिरिक्त सीढ़ियां जोड़नी पड़ीं, ताकि लोग वहां आसानी से पहुंच सकें।

NISAR प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक आने वाले समय में बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है। NASA के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर क्रेग फर्ग्यूसन के अनुसार, यह सैटेलाइट इतनी शक्तिशाली रडार तकनीक से लैस है कि यह जंगलों, पहाड़ों और समुद्र तटीय क्षेत्रों में भी जमीन के बदलावों को आसानी से पकड़ सकता है। वहीं प्रोजेक्ट साइंटिस्ट डेविड बेकेर्ट ने कहा है कि NISAR के जरिए दुनिया भर में कई नई खोजें संभव होंगी।

वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी समस्याएं सिर्फ मैक्सिको सिटी तक सीमित नहीं हैं। दुनिया के कई बड़े शहर इसी तरह की जमीन धंसने, पानी की कमी और पर्यावरणीय बदलावों का सामना कर रहे हैं। अगर समय रहते इन पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में इमारतों के गिरने, बुनियादी ढांचे के खराब होने और लाखों लोगों के प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।

इस तरह NISAR मिशन न सिर्फ भारत और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक सहयोग है, बल्कि यह पृथ्वी को बेहतर समझने और भविष्य की प्राकृतिक चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम भी है। यह सैटेलाइट लगातार डेटा भेज रहा है, जिसे वैज्ञानिक और गहराई से अध्ययन कर रहे हैं ताकि आने वाले समय में शहरों की सुरक्षा और बेहतर योजना बनाई जा सके।

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By admin