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हरियाणा कांग्रेस में जिलाध्यक्षों के चयन को लेकर जारी खींचतान अभी  खत्म नहीं हुई है। पिछले दो महीने से जिलाध्यक्षों को चुनने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अभी तक नामों पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई है। बता दें कि प्रदेश में कई गुट सक्रिय हैं, जो अपने-अपने समर्थकों को जिलाध्यक्ष बनवाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वरिष्ठ नेता कुमारी सैलजा और राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला भी अपने गुटों के नेताओं को आगे लाने के प्रयास में लगे हैं। सियासी जानकारों की मानें तो जिलाध्यक्षों की फाइनल लिस्ट यह साफ कर देगी कि हरियाणा कांग्रेस में किस गुट का प्रभाव सबसे ज़्यादा है। इससे पहले जब यूथ कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन हुआ था, तो उसमें भूपेंद्र सिंह हुड्डा के तीन समर्थकों को जगह दी गई थी, जिससे यह संकेत मिला था कि संगठन में उनकी पकड़ अब भी मज़बूत है।

जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में हुड्डा खेमा भारी पड़ सकता है

ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में भी हुड्डा खेमा भारी पड़ सकता है।कांग्रेस आलाकमान (AICC) ने हर जिले में संगठन के हालात और कार्यकर्ताओं की राय जानने के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए थे। इन पर्यवेक्षकों ने हर जिले से 6-6 नामों की सूची बनाकर एआईसीसी को भेजी थी। लेकिन उन नामों में से किसे चुना जाए, इस पर अभी तक पार्टी का कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। पार्टी की शीर्ष नेतृत्व टीम अब इन नामों पर विचार कर रही है, लेकिन हर गुट अपने समर्थकों के नाम को फाइनल करवाने के लिए पूरा ज़ोर लगा रहा है।जिलाध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया जून 2025 में शुरू की गई थी और पहले कहा गया था कि जून के अंत तक नामों की घोषणा कर दी जाएगी। लेकिन फिर तारीखें खिसकती गईं और जुलाई के अंत तक का समय दिया गया।

जिलाध्यक्षों की नियुक्ति नहीं होने से कार्यकर्ता निराश

अब अगस्त शुरू हो चुका है, लेकिन अभी भी जिलाध्यक्षों की सूची का इंतजार किया जा रहा है। इससे कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है और संगठनात्मक कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।अगर इस बार भी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पसंद को प्राथमिकता दी जाती है, तो यह मुमकिन है कि प्रदेश के आधे से ज्यादा जिलों में उन्हीं के समर्थकों को जिलाध्यक्ष बनाया जाए। हालांकि, यह स्थिति तभी स्पष्ट होगी जब पार्टी की ओर से आधिकारिक लिस्ट जारी की जाएगी। फिलहाल कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं की निगाहें सिर्फ एक ही चीज़ पर टिकी हैं  जिलाध्यक्षों की फाइनल सूची।