जयपुर अतिक्रमण कार्रवाई पर हनुमान बेनीवाल का सरकार पर हमला

राजस्थान की राजनीति में जयपुर में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) द्वारा सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कुछ धार्मिक स्थलों को हटाए जाने और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने के फैसले पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के प्रमुख एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।

सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रधानमंत्री कार्यालय और राजस्थान सीएमओ को टैग करते हुए लंबा बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि जयपुर में जिस तरह बिना व्यापक जनसंवाद के धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई की गई, उससे लोगों को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के शासनकाल की याद आ गई। बेनीवाल का कहना है कि इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि जब-जब सरकारों ने जनता की भावनाओं और आस्था से जुड़े मुद्दों की अनदेखी की है, तब-तब उन्हें राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है।

बेनीवाल ने कहा कि यह विवाद केवल किसी एक मंदिर या मस्जिद का नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं, सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। उनका आरोप है कि जनता की राय और सहमति के बिना लिए गए फैसले अक्सर विवाद और असंतोष को जन्म देते हैं।

इस मुद्दे पर उन्होंने केवल भाजपा सरकार को ही नहीं, बल्कि कांग्रेस को भी निशाने पर लिया। बेनीवाल ने कहा कि जयपुर की घटना पर कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं ने जरूर प्रतिक्रिया दी, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मुद्दों पर कांग्रेस पहले मुखर रहती थी, उन मामलों में अब उसकी सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है।

आरएलपी प्रमुख ने सवाल उठाया कि क्या भाजपा और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच कुछ मुद्दों पर मौन सहमति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रही है और राजनीतिक दलों से स्पष्ट जवाब चाहती है।

हनुमान बेनीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी विकास कार्यों के खिलाफ नहीं है। सड़क चौड़ीकरण और आधारभूत संरचना के विकास को उन्होंने जरूरी बताया, लेकिन साथ ही कहा कि विकास के नाम पर जनता की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सलाह देते हुए कहा कि यदि किसी परियोजना के लिए धार्मिक स्थल को हटाना अनिवार्य हो, तो सरकार को संबंधित समुदायों, धर्मगुरुओं और स्थानीय लोगों के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए। बातचीत और सहमति के जरिए समाधान निकालना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान है।

जयपुर में कार्रवाई के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने पर भी बेनीवाल ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इंटरनेट केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि लाखों लोगों की रोजी-रोटी का आधार बन चुका है। इंटरनेट बंद होने का सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी संचालकों, ऑनलाइन डिलीवरी से जुड़े युवाओं और डिजिटल भुगतान पर निर्भर लोगों पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि इंटरनेट बंद होने से यूपीआई भुगतान, मोबाइल बैंकिंग, ऑनलाइन टिकट बुकिंग और कई जरूरी सेवाएं प्रभावित हो जाती हैं। इससे आम लोगों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है, जबकि बड़े और प्रभावशाली लोगों पर इसका बहुत कम असर पड़ता है।

बेनीवाल ने दावा किया कि विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार राजस्थान उन राज्यों में शामिल रहा है जहां इंटरनेट सेवाएं सबसे अधिक बार बंद की गई हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया और आधुनिक प्रशासन के दावों के बीच बार-बार इंटरनेट बंद करना गंभीर चिंता का विषय है।

सांसद ने कहा कि यदि किसी सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई को लागू करने के लिए सरकार को इंटरनेट बंद करने और भारी पुलिस बल की जरूरत पड़ रही है, तो यह जनता और प्रशासन के बीच संवाद की कमी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकारों को समझना होगा कि स्थायी विकास केवल प्रशासनिक शक्ति से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और सहभागिता से संभव है।

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By admin

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