9 Millions of Muslims will be expelled from Britain?: क्या सच में ब्रिटेन से निकाले जाएंगे 90 लाख मुसलमान?
हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ खबरों में ये दावा किया गया कि, ब्रिटेन सरकार 90 लाख मुसलमानों को देश से बाहर निकालने वाली है। लेकिन क्या ये सच है या सिर्फ अफ़वाह? आज हम आपको पूरी सच्चाई के साथ घटना, नीतियाँ और बयान समझाते हैं। ब्रिटेन में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि देशों से आने वाले immigrant समुदाय बड़ी संख्या में रहते हैं। वर्तमान समय में illegal immigration, asylum seekers यानी के शरण मांगने वाले, और वीज़ा नियम ब्रिटेन की राजनीति में सबसे बड़ा मुद्दा बन चुके हैं।
सबसे पहले आपको बता दें कि, ब्रिटिश सरकार ने आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है, जिसमें 90 लाख मुसलमानों को बाहर निकाला जाए….
लेकिन, वायरल वीडियो/क्लिप में अक्सर देखा जाता है कि किसी राजनीतिक नेता या विश्लेषक के बयान को exaggerate कर मोबाइल number जनता को डराने वाला content बनाया जाता है… लेकिन सरकार की आधिकारिक policy statement में ऐसा कोई लक्ष्य घोषित नहीं हुआ है।
ब्रिटेन की गृह मंत्री Shabana Mahmood ने हाल ही में कहा है कि illegal migration ने ब्रिटेन में भेदभाव और सामाजिक विभाजन बढ़ा दिया है और ये “देश को अलग कर रहा है।” उन्होंने asylum प्रणाली और borders पर कड़ी नियंत्रण योजनाएं पेश की हैं ताकि illegal migrants को रोकने और देश के नियमों को लागू करने में मदद मिले।
गृह मंत्री ने विशेष रूप से कहा कि शरणार्थियों को बाहर भेजने के लिए नियम मजबूत होंगे, परिवार पुनर्मिलन (family reunions) पर रोक जैसी चीजों को रोकने के बारे में भी सोच विचार चल रहा है।
इन कदमों का लक्ष्य ऐसे लोगों को रोकना है जो ब्रिटेन के इमीग्रेशन सिस्टम का दुरुपयोग करते हुए illegal रूप से रहते हैं, न कि किसी एक समुदाय के खिलाफ “भेज देना” जैसा लक्षित बयान।
वैसे भी किसी भी लोकतांत्रिक देश में किसी समुदाय (धर्म के आधार पर) को चुन-चुनकर निकालने जैसा निर्णय लेना संभव नहीं है… ये मानवाधिकार और कानून के खिलाफ होता है। ब्रिटेन अभी भी यूरोपीय मानवीय अधिकार कानून यानी के ECHR के दायरे में है, जो किसी को भी बिना न्यायिक कारण के बाहर नहीं निकालता।
सबसे हालिया रिपोर्ट कहती है कि सरकार ने फेल हुए asylum seekers का सिर्फ 9% हिस्सा ही deport किया है, जबकि अधिकांश मामलों में प्रक्रिया अभी भी लंबित है।
इसी इमीग्रेशन मुद्दे को लेकर ब्रिटेन में बड़े प्रदर्शन भी हुए हैं। लंदन की सड़कों पर लगभग 1 लाख से ज़्यादा लोग anti-immigration रैली में उतरे, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। कुछ समूह “Send them home” जैसे नारे भी लगा रहे थे… ये भावना है कि “अवैध immigrants वापस जाएं।…. लेकिन ये प्रदर्शन सरकार की आधिकारिक नीति नहीं हैं, ये समुदायों और राजनीतिक समूहों की अभिव्यक्तियां हैं जिन्हें गृह मंत्री की नीतियों से जोड़कर पेश किया जा रहा है।
ब्रिटेन ने नया Immigration and Foreigners Act 2025 भी लागू किया है, जिसका मकसद illegal entry को रोकना, deportation criteria तय करना और नियम कड़ा करना है — लेकिन यह कानून किसी समुदाय विशेष को हटाने का कानून नहीं है।
तो अंत में ब्रिटेन सरकार ने 90 लाख मुसलमानों को निकालने का कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया। गृह मंत्री Shabana Mahmood नियम कड़े करना चाहती हैं, खासकर illegal migration के खिलाफ। लंबी deportation प्रक्रिया में वैध लोगों की सुरक्षा, मानवाधिकार कानून और न्यायिक प्रक्रियाएँ अभी भी लागू हैं।
इसलिए वायरल दावे सच नहीं, बल्कि इमीग्रेशन पॉलिसी और राजनीतिक बहस का खंडित/उत्साही रूप है, जिसका गलत ढंग से प्रचार किया जा रहा है…
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