ईरान और अमेरिका के बीच जंग हर दिन और अधिक गंभीर रूप ले रही है। तेहरान किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है, जबकि अमेरिका भी कोई ठोस समाधान नहीं दिखा रहा। इसी बीच मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 50 हजार से अधिक हो गई है, जो सामान्य दिनों की तुलना में करीब 10 हजार ज्यादा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2,500 मरीन और 2,500 नाविकों के नए जत्थों के आने से अमेरिकी घेराबंदी और मजबूत हो गई है। अमेरिकी सेना के 82वीं एयरबोर्न डिवीज़न के 2,000 पैराट्रूपर्स भी ईरान से हमला करने की दूरी में तैनात किए गए हैं।
वहीं,इस सैन्य जमावड़े का उद्देश्य होर्मुज़ स्ट्रेट को सुरक्षित रखना और ईरानी हमलों का जवाब देना बताया जा रहा है। हालांकि, मिलिट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान जैसे बड़े देश पर कब्जा करने के लिए 50 हजार सैनिक पर्याप्त नहीं हैं। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप समेत 90 से अधिक सैन्य ठिकानों पर बमबारी कर दी है।
पेंटागन ने 2,000 पैराट्रूपर्स को मिडिल ईस्ट भेजा है, जिनकी लोकेशन फिलहाल गोपनीय रखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सैनिकों का इस्तेमाल खार्ग द्वीप पर कब्जा करने और ईरान की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।
बता दें कि, दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का संकरे जलमार्ग ईरानी हमलों के कारण प्रभावित हो गया है, और ट्रंप प्रशासन इस रास्ते को सुरक्षित करने के लिए जमीन या किसी द्वीप पर कब्जे की योजना बना सकता है। 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के सैनिक भी ऐसे ऑपरेशन्स के लिए तैयार रखे गए हैं, ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति को बहाल किया जा सके।

