राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा रद्द होने के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस इसे प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक साजिश बता रही है, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला अब केवल एक कार्यक्रम के रद्द होने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक बयानबाजी, संवेदनशीलता और पीड़ित परिवारों के संदर्भ में एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है।
दरअसल, 4 जून को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अल्मोड़ा और पौड़ी गढ़वाल का दौरा करना था। पूरा कार्यक्रम पहले से तय था और स्थानीय स्तर पर तैयारियां भी चल रही थीं। लेकिन कुछ ही घंटों में यह दौरा अचानक रद्द कर दिया गया, जिसके बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी के हेलिकॉप्टर को उड़ान की अनुमति नहीं मिली, जिसके कारण उनका कार्यक्रम प्रभावित हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि मौसम खराब होने का कारण बताया गया, जबकि उस समय आसमान सामान्य था। कांग्रेस इसे केवल तकनीकी कारण नहीं, बल्कि राजनीतिक हस्तक्षेप मान रही है।
वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हेलिकॉप्टर राहुल गांधी का था, पायलट भी उनकी टीम का था और उड़ान से जुड़े फैसले भी उन्हीं के नियंत्रण में थे। धामी ने सवाल उठाया कि जब मौसम की वजह से अल्मोड़ा और पौड़ी नहीं जा सके, तो राहुल गांधी देहरादून क्यों नहीं पहुंचे, जहां मौसम पूरी तरह सामान्य था। उन्होंने साफ कहा कि सरकार पर इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है क्योंकि इसमें प्रशासनिक हस्तक्षेप की कोई भूमिका नहीं है।
इस विवाद ने तब नया मोड़ ले लिया जब मुख्यमंत्री धामी ने मोहम्मद दीपक और दिलबर नेगी का जिक्र किया। राहुल गांधी के कार्यक्रम में कोटद्वार के मोहम्मद दीपक से मुलाकात प्रस्तावित थी। इसी को लेकर भाजपा ने सवाल उठाया कि एक परिवार से मिलने की संवेदनशीलता दिखाई गई, लेकिन दूसरे पीड़ित परिवार यानी दिलबर नेगी के परिवार की अनदेखी की गई। दिलबर नेगी 22 वर्षीय युवक थे, जो 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान एक दर्दनाक घटना का शिकार बने थे। वह दिल्ली के शिव विहार इलाके में काम करते थे, जहां दंगों के दौरान आगजनी में उनकी जान चली गई थी और बाद में उनका जला हुआ शव बरामद हुआ था।
भाजपा का आरोप है कि यह चयनात्मक संवेदनशीलता का मामला है, जहां कुछ परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है और कुछ को नजरअंदाज किया जाता है। वहीं कांग्रेस इन सभी आरोपों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बता रही है। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी लगातार आम लोगों से मिलते रहे हैं और इस पूरे मामले को अनावश्यक रूप से विवाद बनाया जा रहा है।
फिलहाल राहुल गांधी की ओर से मुख्यमंत्री धामी के आरोपों पर कोई सीधी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह विवाद अब केवल एक दौरे के रद्द होने तक सीमित नहीं रहा। यह मामला प्रशासनिक प्रक्रिया बनाम राजनीतिक साजिश, और संवेदनशीलता बनाम चयनात्मक राजनीति की बहस में बदल चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी तूल पकड़ सकता है और राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन सकता है।
