41 साल का इंतजार हुआ खत्म, दंगों में मारे गए लोगों के परिवार को नौकरी

सिख दंगों में मारे गए लोगों के परिवार वालों की आखिरी मांग को 41 सालों बाद आखिरकर पूरा किया गया है और दिल्ली की बीजेपी सरकार ने उस वादे को पूरा किया है दरअसल दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने अपना वादा पूरा किया और दिल्ली के अंदर वो ऐतिहासिक फैसला लिया जो पिछले कई सालों में पूर्व की सरकार नहीं कर पाई लेकिन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सिक दंगों में जान गवाने वाले परिवारों का 41 साल बाद नौकरी दी और उन्हे ज्वाइंनिंगर लेटर दिया..
इस मौके पर उनके साथ कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी मौजूद रहे इस मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी परिवार वालों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस तरह से दंगों में कत्लेआम हुआ, सबने दुख झेलकर आज तक धीरज रखा, अब ऐसे 125 परिवारों को नौकरी देने का निर्णय हमारी सरकार ने लिया है और मुझे गर्व है हमारी सरकार ने ये काम किया है, लेकिन सच्चाई ये है ये कार्य सालों पहले होने था लेकिन पूर्व की सरकार ने सिर्फ और सिर्फ इस मुद्दे पर राजनीतिक की है लेकिन हमारी सरकार ने इस वादे को निभाया है और इन सभी परिवार वालों को ज्वाइनिंग लेटर दिया है..
साथ ही इस मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में कोरोना काल में भी कई परिवार के लोगों ने अपनी जान गवाई थी लेकिन हमारी सरकार ने एक कमेटी का गठन किया है कमेटी बनाकर उनके परिजनों को राहत देंगे, इमरजेंसी के दौरान जेलों में रहे लोगों और स्वतंत्रता सेनानियों को भी हम पेंशन देंगे। दंगा पीड़ितों को नौकरी मिलने में देरी हुई, इसके लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री होने के नाते रेखा गुप्ता ने सबसे माफी भी मांगी है..
कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने काह कि..1984 दंगों में मारे गए, उनके परिजनों को नौकरी देने के लिए कमेटी बैठी, नौकरी देने का निर्णय लिया गया था, लेकिन देश जनता है दिल्ली की जनता जनाती है किसने के इशारों पर ये हुआ था दिल्ली के अंदर सिखों का कत्ल किया गया लेकिन जिन्होंने भी इस काम को अंजाम दिया है आज वो जेल की सालकों के पीछे है और जो भी इस मामले में दोषी होगा उसे हमारी सरकार कड़ी सजा दिलाने का प्रयास करेगी..
हालांकि बोल सकते है दिल्ली सिख दंगों का मामला सालों से एक राजनीतिक मुद्दा रहा है चाहे कांग्रेस की सरकार के समय की बात हो या फिर आम आदमी पार्टी की सरकार के समय की बात हो दिल्ली में हमेशा से सिखों दंगों का मामला बीजेपी लगातार उठाती आई है और अब जब 27 सालों बाद दिल्ली में बीजेपी सत्ता में वापसी आई तो उन्होंने दंगों में मारे गए परिवार वालों को नौकारी देकर बोल सकते है बड़ा मास्टर स्ट्रॉक चल दिया है हालांकि विपक्ष इसे सिर्फ और सिर्फ राजनीति बता रहा है लेकिन कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पलटवार करते हुए कहा कि हम ना राजनीति इस मामलों में करते है ना आगे कभी करेंगे हमने जो वादा किया है बस उन्हे निभा रहे है, जो पूर्व की सरकार नहीं कर पाई वो हमने कर दिखाया है.. ।

41 साल का इंतजार हुआ खत्म, दंगों में मारे गए लोगों के परिवार को नौकरी

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