वॉशिंगटन/तेहरान: करीब दो सप्ताह से लगातार जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान पर अपने हवाई हमलों को फिलहाल रोक दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि इस समय युद्ध से अधिक प्राथमिकता कूटनीतिक समाधान को दी जाएगी। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि यदि बातचीत विफल होती है तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है और पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका, ईरान और इजरायल के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
13 दिनों की सैन्य कार्रवाई के बाद क्यों रुका अमेरिका?
पिछले लगभग 13 दिनों से अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ लगातार सैन्य अभियान चला रही थी। इस दौरान कई रणनीतिक ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। लेकिन अब व्हाइट हाउस ने लगातार दूसरे दिन भी नए हवाई हमले नहीं किए हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य अधिकारियों और अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ समीक्षा बैठक के बाद यह फैसला लिया। प्रशासन का मानना है कि यदि बातचीत के जरिए समाधान निकलने की संभावना है तो उसे पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।
ट्रंप ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है और उसकी सैन्य क्षमता पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। लेकिन यदि बिना युद्ध के लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं तो वही सबसे बेहतर विकल्प होगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन यदि ईरान ने समझौते की दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू की जा सकती है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका “पूरी तरह तैयार” (Locked and Loaded) है और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत जवाब देने में सक्षम है।
ओमान निभा रहा है अहम भूमिका
सूत्रों के अनुसार ओमान एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी है। चर्चा का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।
ईरान इस जलमार्ग पर अपने नियंत्रण और शर्तों को लेकर बातचीत कर रहा है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देश चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रहे।
आखिर क्यों बदली अमेरिका की रणनीति?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप प्रशासन के सामने कई चुनौतियां थीं।
लंबे सैन्य अभियान से हथियारों और एयर डिफेंस मिसाइलों के भंडार पर दबाव बढ़ रहा था।
क्षेत्रीय युद्ध और अधिक फैलने की आशंका जताई जा रही थी।
वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती थी।
अमेरिका के सहयोगी देशों पर भी जवाबी हमलों का खतरा बढ़ गया था।
इन्हीं कारणों से सैन्य अधिकारियों ने फिलहाल बड़े पैमाने पर हमलों को रोकने की सलाह दी, जिसके बाद ट्रंप ने अस्थायी विराम का फैसला लिया।
क्या ईरान ने भी कम किया हमला?
रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने भी फिलहाल अमेरिकी सहयोगी देशों पर अपने जवाबी हमलों की गति धीमी की है। हालांकि दोनों पक्षों की सेनाएं पूरी तरह अलर्ट पर हैं और किसी भी समय हालात बदल सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थायी युद्धविराम नहीं बल्कि बातचीत के लिए बनाया गया एक अवसर है।
इजरायल की चिंता बढ़ी
इस घटनाक्रम पर इजरायल भी करीबी नजर बनाए हुए है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जल्द ही वॉशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इजरायल ईरान के खिलाफ सख्त रुख बनाए रखने के पक्ष में है, जबकि अमेरिका फिलहाल कूटनीति को एक मौका देना चाहता है।
तेल बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की दिशा में प्रगति होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन यदि वार्ता विफल होती है और सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में फिर से उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
क्या यह युद्ध का अंत है?
विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल इसे युद्ध का अंत नहीं कहा जा सकता। अमेरिका ने केवल अपने हमलों पर अस्थायी रोक लगाई है, जबकि दोनों देशों की सैन्य तैयारियां पहले की तरह जारी हैं।
अब पूरी दुनिया की नजर ओमान की मध्यस्थता में चल रही वार्ता पर है। यदि बातचीत सफल होती है तो मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है, लेकिन यदि कोई ठोस समझौता नहीं हुआ तो हालात दोबारा तेजी से बिगड़ सकते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर हमलों को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि यह स्पष्ट है कि अमेरिका ने सैन्य विकल्प छोड़ा नहीं है, बल्कि फिलहाल कूटनीति को अवसर दिया है। आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि यह विराम स्थायी शांति की शुरुआत बनता है या फिर क्षेत्र एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ता है।
