नई दिल्ली: पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर संसद में जारी राजनीतिक घमासान के बीच नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) की सांसद सायोनी घोष ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा से बचना स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी नहीं है और संसद में रचनात्मक बहस होनी चाहिए।
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चले आंदोलन के समाप्त होने के बाद भी इस मुद्दे की गूंज संसद और राजनीतिक गलियारों में बनी हुई है। केंद्र सरकार जहां पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को जवाबदेही का उदाहरण बता रही है, वहीं विपक्ष इसे पर्याप्त कदम नहीं मान रहा है।
इसी बीच सांसद सायोनी घोष ने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष पहले धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा था। अब जब इस्तीफा हो चुका है, तब भी सदन में चर्चा से बचा जा रहा है। उनके मुताबिक संसद का हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और उस पर देश के करदाताओं का पैसा खर्च होता है। ऐसे में लगातार हंगामा और कार्यवाही बाधित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए उचित नहीं है।
सायोनी घोष ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा सुधार जैसे मुद्दे सीधे देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं से जुड़े हैं। इसलिए संसद में इस विषय पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए ताकि लोगों को यह जानकारी मिल सके कि प्रस्तावित सुधारों और नए विधेयक में क्या प्रावधान किए जा रहे हैं।
उन्होंने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी बिल या प्रस्ताव पर आपत्ति है तो उसे सदन में तथ्यों और सुझावों के साथ रखा जाना चाहिए। रचनात्मक बहस लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है और सरकार को भी सकारात्मक सुझावों पर विचार करना चाहिए।
शिक्षा सुधार पर जारी है सियासी संग्राम
पेपर लीक और परीक्षा सुधार का मुद्दा हाल के दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा विषय बना हुआ है। विपक्ष सरकार पर परीक्षा प्रणाली में विफलता का आरोप लगा रहा है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए व्यापक सुधारों की दिशा में काम किया जा रहा है।
संसद में इस मुद्दे को लेकर लगातार गतिरोध बना हुआ है। ऐसे में सायोनी घोष का बयान राजनीतिक बहस को नया आयाम देता है, जिसमें उन्होंने विपक्ष से विरोध के साथ-साथ चर्चा और समाधान की राजनीति अपनाने की अपील की है।
