116th anniversary of Savarkar poem: अंडमान में सावरकर की कविता की 116वीं सालगिरह
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह इन दिनों राष्ट्रीय और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत यहां एक विशेष अवसर पर मौजूद हैं। दोनों दिग्गज नेता आज शुक्रवार को एक ही मंच पर दिखाई देंगे, जहां वीर सावरकर की प्रसिद्ध कविता ‘सागर प्राण तळमळला’ की 116वीं सालगिरह पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके साथ ही वे सावरकर की एक प्रतिमा का अनावरण भी करेंगे।
इस हाई-प्रोफ़ाइल कार्यक्रम में शाह और भागवत के अलावा कई अन्य प्रमुख हस्तियां भी उपस्थित होंगी। इनमें केंद्रीय मंत्री आशीष शेलार, देश के जाने-माने संगीतकार हृदयनाथ मंगेशकर, अभिनेता रणदीप हुड्डा और लेखक-इतिहासकार विक्रम संपत शामिल हैं। कार्यक्रम के कारण पूरे केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और कुछ क्षेत्रों में यातायात पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
वीर सावरकर की यह कविता, जिसे उन्होंने 1909 में सेलुलर जेल में रहते हुए अपनी मातृभूमि की याद में लिखा था, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक भावनात्मक और प्रेरणादायक दस्तावेज मानी जाती है। समुद्र से अपनी मातृभूमि पर लौटाने की विनती करते हुए लिखी गई ये पंक्तियां आज भी भारतीय राष्ट्रीयता और बलिदान के प्रतीक के रूप में याद की जाती हैं।
कार्यक्रमों का आज का प्रमुख आयोजन दोपहर 2.30 बजे दक्षिण अंडमान के ब्योदनाबाद में निर्धारित है, जहां शाह और भागवत वीर सावरकर की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इसके बाद दोनों 3.15 बजे डॉ. बीआर आंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (DBRAIT) में पहुंचेंगे, जहां ‘सागर प्राण तळमळला’ गीत के 115 वर्ष पूरे होने पर एक विशेष सांस्कृतिक आयोजन रखा गया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत इस समय अंडमान-निकोबार के चार दिवसीय दौरे पर हैं। वह गुरुवार को ही द्वीप समूह पहुंच गए थे और अपने आगमन के तुरंत बाद श्री विजया पुरम के डॉलीगंज स्थित संघ कार्यालय में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरे के दौरान वह सावरकर की स्मृति से जुड़े कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। सरसंघचालक के रूप में यह उनका पहला अंडमान-निकोबार दौरा है, हालांकि लगभग दो दशक पहले वह संगठन के सरकार्यवाह के रूप में यहां आ चुके हैं।
भागवत का शुक्रवार का कार्यक्रम भी काफी व्यस्त है। सुबह करीब 10.30 बजे वह चिन्मय मिशन पहुंचकर वहां मौजूद धर्मगुरुओं से संवाद करेंगे। इसके बाद दोपहर में वह अमित शाह के साथ ब्योदनाबाद में प्रतिमा अनावरण और DBRAIT के कार्यक्रम में शामिल होंगे। शनिवार को भी उनका पूरा दिन विभिन्न आयोजनों में व्यतीत होगा, जिनमें श्री विजया पुरम के नेताजी स्टेडियम में आयोजित ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ में उनका संबोधन शामिल है। रविवार को वह सुबह 10 बजे DBRAIT में एक अन्य कार्यक्रम में शामिल होंगे, जिसके बाद दोपहर करीब 2 बजे अंडमान-निकोबार से प्रस्थान करेंगे।
अमित शाह का यह अंडमान दौरा दूसरा है। इससे पहले वह जनवरी 2023 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 126वीं जयंती के अवसर पर यहां आए थे। इस बार उनका दौरा सावरकर की स्मृति में रखे गए कार्यक्रमों से जुड़ा है, जिनसे न सिर्फ स्थानीय जनता बल्कि पूरे देश का ध्यान इस ऐतिहासिक स्थल की ओर आकर्षित हुआ है।
सावरकर की स्मृतियां आज भी अंडमान की धरती पर गहराई से अंकित हैं। पोर्ट ब्लेयर की कुख्यात सेलुलर जेल, जिसे काला पानी के नाम से भी जाना जाता है, में उन्हें 50 साल की सज़ा सुनाई गई थी। 1911 में मॉर्ले-मिंटो सुधारों के खिलाफ बगावत करने के आरोप में उन्हें यहां कैद किया गया था। कठोर यातनाओं और असहनीय परिस्थितियों में उन्होंने कई साहित्यिक रचनाएं कीं, जिनमें ‘सागर प्राण तळमळला’ विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
आज जब देशभर से राजनेता, कलाकार, विचारक और इतिहासकार इस अवसर पर अंडमान पहुंचे हैं, तो यह कार्यक्रम न केवल सावरकर की स्मृति को सम्मान देता है बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के उस अध्याय को भी फिर से जीवंत करता है, जो समुद्र के बीच एक छोटे से द्वीप पर लिखा गया था।
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