₹83 करोड़ खर्च के बाद भी नहीं बदली तस्वीर, इंदौर जिला अस्पताल पर अब भी ‘रेफरल अस्पताल’ का दाग

 इंदौर
 धार रोड स्थित नए जिला अस्पताल को करीब 83 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किया गया, ताकि गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके। लेकिन अस्पताल शुरू होने के कुछ ही दिन बाद सामने आए एक मामले ने इसकी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पिछले दिनों हाथी के हमले में गंभीर रूप से घायल ऑटो चालक के स्वजनों का आरोप है कि अस्पताल ने उपचार करने के बजाय उन्हें एमवाय अस्पताल ले जाने की सलाह दे दी। इस दौरान घायल करीब आधे घंटे तक अस्पताल परिसर में दर्द से तड़पता रहा। बाद में उसे निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

घटना 25 जुलाई की शाम करीब साढ़े चार बजे राजनगर पुलिस चौकी के सामने हुई थी। 49 वर्षीय विजय होलकर हाथी को गुड़ खिला रहा था। इसी दौरान हाथी ने अचानक उन पर हमला कर दिया। स्वजनों के अनुसार हाथी ने उन्हें पैरों से कुचल दिया, जिससे उनकी रीढ़ और कमर की कई हड्डियां टूट गईं। गंभीर हालत में स्वजन उन्हें आटो से सीधे नए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे।

घायल दर्द से कराहता रहा
मृतक के छोटे भाई संजय होलकर ने बताया कि अस्पताल कर्मियों को हाथी के हमले की जानकारी देने पर उन्हें कहा गया कि अस्पताल में इस तरह के गंभीर मरीज के उपचार की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है और उन्हें एमवाय अस्पताल ले जाना होगा। स्वजनों का आरोप है कि उन्होंने तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग की, लेकिन करीब आधे घंटे तक न एंबुलेंस पहुंची और न ही स्ट्रेचर उपलब्ध कराया गया। इस दौरान घायल अस्पताल परिसर में ही दर्द से कराहता रहा।

एंबुलेंस भी नहीं मिली
संजय के अनुसार एंबुलेंस और डायल-112 पर कई बार फोन करने के बावजूद कोई सहायता नहीं मिली। अंततः स्वजन घायल को अपने आटो से नजदीक स्थित वर्मा यूनियन अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां उपचार शुरू हुआ, लेकिन शाम करीब 7.15 बजे विजय होलकर ने दम तोड़ दिया।

स्वजनों का कहना है कि यदि जिला अस्पताल में समय पर प्राथमिक उपचार और तत्काल समुचित व्यवस्था मिल जाती, तो शायद विजय की जान बचाई जा सकती थी। उनका सवाल है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च कर बने अस्पताल में गंभीर मरीजों के उपचार की व्यवस्था नहीं है, तो आम लोगों को उससे क्या लाभ मिलेगा।

अब तक नहीं मिली कोई सहायता
संजय होलकर ने बताया कि हादसे के बाद अब तक न कोई जनप्रतिनिधि परिवार से मिलने पहुंचा और न ही प्रशासन की ओर से किसी आर्थिक सहायता की घोषणा की गई। विजय अपने पीछे पत्नी, 11 वर्षीय बेटे और बुजुर्ग मां को छोड़ गए हैं। परिवार की आजीविका सिलाई और आटो चलाने पर निर्भर है। स्वजन ने सरकार से आर्थिक सहायता और पूरे मामले की जांच की मांग की है।

बेहतर स्वास्थ्य सेवा का दावा
जिला अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित कर क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा किया गया था। अस्पताल के संचालन के बाद उम्मीद थी कि गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार मिलेगा और रेफरल की स्थिति कम होगी। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

Rupesh Jha

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