जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले में 26 निर्दोष भारतीय नागरिकों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हमले की जिम्मेदारी शुरुआत में आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, लेकिन अब घटनाक्रम में बड़ा मोड़ आया है। भारत सरकार की सख्त कार्रवाई के बाद TRF ने अपना बयान पलटते हुए दावा किया है कि उसका डिजिटल प्लेटफॉर्म हैक कर लिया गया था और उसने हमला नहीं किया।
यह यू-टर्न उस वक्त आया है जब भारत सरकार हमले के बाद बेहद सख्त रुख अपना चुकी है। कश्मीर घाटी में बीते 24 घंटों में भारतीय सेना ने आतंकियों के 7 ठिकानों और घरों को ध्वस्त कर दिया है। इसके अलावा घाटी में सक्रिय अन्य आतंकियों पर भी कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। ऐसे में आतंकियों और उनके संरक्षकों—खासकर पाकिस्तान—के भीतर गहरी घबराहट देखी जा रही है।
TRF ने नई पोस्ट में दावा किया कि “हमारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैक कर लिया गया था और किसी ने झूठा संदेश डालकर हमले की जिम्मेदारी ली। हम पहलगाम हमले से किसी भी तरह से जुड़े नहीं हैं।” TRF ने साथ ही यह भी कहा कि वह हमले की जांच की मांग करता है और भारतीय एजेंसियों पर साजिश का आरोप लगाया।
यह पहला मौका नहीं है जब TRF जैसे संगठन हमले के बाद बयान बदलते दिखे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की कूटनीतिक और सैन्य सख्ती का सीधा असर अब आतंकियों की रणनीति पर पड़ने लगा है। भारत ने इस बार न सिर्फ आतंकी ठिकानों को टारगेट किया, बल्कि पाकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है।
पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी कमांडर सैफुल्लाह कसूरी का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उसने भी हमले से किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया। यह दोनों इनकार इस ओर इशारा करते हैं कि भारत की प्रतिक्रिया से आतंकवादी संगठनों में दहशत फैल चुकी है और वे किसी भी तरह की जवाबी कार्रवाई से बचना चाह रहे हैं।
TRF का यह नया बयान भारत के लिए एक संकेत भी है—कि आतंक के खिलाफ कड़ा रुख अब असर दिखाने लगा है। केंद्र सरकार पहलगाम हमले को सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा पर सीधी चोट मान रही है। यही कारण है कि सिर्फ कश्मीर में नहीं, बल्कि भारत के तमाम हिस्सों में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
सवाल अब यह है कि TRF और पाकिस्तान के इन बयानों को दुनिया कितनी गंभीरता से लेगी? और क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत की तरह आतंक के खिलाफ इतने सख्त कदम उठाएगा? फिलहाल इतना साफ है कि भारत अब सिर्फ बयान नहीं, ठोस जवाब देने की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
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