इंदौर-नाशिक मार्ग पर अवैध बसों का संचालन, यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल

इंदौर
इंदौर/महाराष्ट्र राज्य को भारी राजस्व की हानि; यात्रियों की सुरक्षा और अधिकारों पर उठ रहे गंभीर सवाल मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के यात्रियों को सुलभ और सुरक्षित परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना” के अंतर्गत प्रदेश सहित अंतरप्रांतीय मार्गों पर परमिट प्रक्रिया में कड़े कदम उठाए गए हैं। विगत वर्ष नवंबर 2025 के बाद से प्राइवेट बस ऑपरेटरों को नए परमिट देना लगभग बंद कर दिया गया है।बावजूद

​NH-52 मार्ग पर चल रहा ‘कमीशन’ का खेल
​राष्ट्रीय राजमार्ग 52 (NH-52) यानी इन्दौर से धूलिया, मालेगाँव, नाशिक और पुणे मार्ग पर यह अवैध परिवहन बेखौफ चल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक ऐसा प्रतीक होता है कि महाराष्ट्र ST महामंडल (MSRTS) तथा RTO अधिकारियों एवं कर्मचारियों अभी तक इन अवैध बसों पर कार्यवाही नहीं करना, लगता है कि बस ऑपरेटर और अधिकारियों के बीच मिलजुल कर बसें चलाई जा रही है और महाराष्ट्र राज्य के राजस्व को निजी आर्थिक लाभ के चलते नुकसान पहुंचा या जा रहा है अगर ऐसा नहीं है तो अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

कमीशन ऐसा
  जन चर्चा का विषय यदि किसी अवैध बस में STस्टैंड से ₹6,000 की सवारियाँ बैठती हैं,तो उसमें से 20% यानी ₹1,200 की राशि ‘कमीशन’ के रूप में वसूल कर अवैध बसों को उनके राज्य की बसों के आगे रवाना कर दिया जाता है।

​यात्रियों की जान और जेब दोनों जोखिम में
अगर बस चलने के दौरान हुई दुर्घटना तो क्या होगा ​इस अवैध नेटवर्क के कारण यात्रियों को गंभीर असुविधा और जोखिम का सामना करना पड़ रहा है: ना तो
​सुरक्षा एवं बीमा का अभाव: इन वाहनों के पास वैध परमिट, टाइम टेबल (C.S.फीस महाराष्ट्र राज्य की) और आवश्यक अन्य दस्तावेज नहीं होते।

अगर दुर्घटना हुई तो क्या होगा ?
बस संचालक के पश्चात दुर्घटना घटित होती है, तो यात्रियों या उनके परिजनों को किसी प्रकार का आर्थिक दुर्घटना बीमा दावा नहीं मिल पाता। होता क्या है ​रास्ते में ही उतारने की मनमानी: यह अवैध बस संचालक यात्रियों को तभी तक ले जाते हैं जब तक उन्हें आगे सवारियाँ मिलने की उम्मीद होती है। जहाँ सवारियाँ कम हुईं, वहीं यात्रियों को बीच रास्ते में ही बेसहारा छोड़ दिया जाता है।
​शिकायतों के बावजूद अधिकारी मौन ​इस गंभीर मामले को लेकर पूर्व में भी नाशिक सहित विभिन्न वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायतें की जा चुकी हैं।

​कार्यवाही होगी या मामला ठंडे बस्ते में होगा
दोषियों पर कार्रवाई: अवैध बसों को संरक्षण देने वाले कर्मचारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए क्या ऐसा होगा होगा तो कब होगा?

Rupesh Jha

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