उत्तर प्रदेश

Yogi government gives another chance to electricity thieves: बिजली चोरों को योगी सरकार ने फिर दिया मौका, ओटीएस योजना में फिर होंगे बिजली चोर शामिल, विजिलेंस को सौंपी गई जिम्मेदारी, मिलेगी राहत

Yogi government gives another chance to electricity thieves: बिजली चोरों को योगी सरकार ने फिर दिया मौका

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार एक बार फिर बिजली बकाएदारों के लिए एकमुश्त समाधान योजना ला रही है. एक दिसंबर से ये योजना लागू हो जाएगी. उपभोक्ता इस योजना का लाभ उठा सकते हैं और बड़ा लाभ पा सकते हैं. साल 2023-24 में जब यह योजना लागू हुई थी तो पहली बार बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ताओं को भी इसमें शामिल किया गया था. ऊर्जा मंत्री ने कहा था कि पहली और आखिरी बार बिजली चोरी करने वालों को इस योजना में शामिल किया गया है. इसके बाद इन्हें शामिल नहीं किया जाएगा.

2024-25 में जब एक बार फिर समाधान योजना लागू हुई तो इसमें बिजली चोरों को जगह नहीं दी गई लेकिन अब 2025-26 के लिए एक बार फिर ओटीएस योजना में बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ताओं को शामिल किया गया है. वे भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. इस बार इसकी जिम्मेदारी विजिलेंस को सौंपी गई है. बिजली थानों पर तैनात पुलिस अधिकारी अपने-अपने जिलों में ऐसे बिजली चोर उपभोक्ताओं से संपर्क करेंगे और उन्हें ओटीएस योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए शामिल कराएंगे.

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में एकमुश्त समाधान योजना साल 2023 में 70 दिनों तक लागू रही थी. आठ नवंबर को लागू हुई एकमुश्त समाधान योजना 16 जनवरी को समाप्त हुई. ओटीएस के अंतर्गत उस साल 50.56 लाख उपभोक्ताओं ने छूट का लाभ लिया था. इससे विभाग को 5,436 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था.

उपभोक्ताओं को 1,795 करोड़ रुपये की छूट मिली थी. इस योजना की खास बात ये रही थी कि पहली बार उत्तर प्रदेश में बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ताओं को भी ओटीएस में शामिल किया गया था, लेकिन जब स्कीम खत्म हुई तो इसमें विद्युत चोरी के मामले में सिर्फ 1.03 लाख उपभोक्ताओं ने लाभ लिया.

बिजली विभाग ने जिस उम्मीद के साथ बिजली चोरों से बकाया वसूली के लिए उन्हें ओटीएस का लाभ देकर किरकिरी झेली थी उसमें विभाग को कामयाबी नहीं मिली थी. प्रदेश में अभी भी लाखों ऐसे बकाएदार हैं जो बिजली चोरी करने के बावजूद भुगतान नहीं कर रहे हैं. अब 2025 के दिसंबर माह से यह योजना एक बार फिर लागू होने जा रही है और फिर से बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ताओं को इस योजना का लाभ पाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने की अनुमति दे दी गई है.

साल 2023 में पहली बार जब यह योजना बिजली चोरों के लिए लागू की गई थी तब योजना के तहत बिजली चोरी के मामलों में भी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी गई थी. चोरी के प्रकरणों में उपभोक्ताओं को 30 नवंबर तक 10 प्रतिशत पंजीकरण राशि जमा कर एकमुश्त भुगतान करने की दशा में 65 प्रतिशत तक बिजली चोरी के राजस्व निर्धारण की राशि को जमा करने से छूट मिली थी. 31 दिसंबर तक किश्तों में बिल जमा करने पर भी 45 प्रतिशत की छूट की व्यवस्था थी.

पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल ने बताया कि यह योजना दो किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं और एक किलोवाट तक के वाणिज्यिक उपभोक्ताओं पर लागू होगी. सभी श्रेणी के बिजली चोरी से संबन्धित प्रकरणों में राजस्व निर्धारण धनराशि पर छूट दी जाएगी. इससे उन उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी जो बिजली चोरी के विवादों में फंसे हैं.

गरीब और मध्यवर्गीय उपभोक्ताओं को बकाए का भुगतान मासिक किश्तों में करने की सुविधा दी गई है. उपभोक्ता विभागीय वेबसाइट के साथ ही खण्ड और उपखण्ड कार्यालय, जन सेवा केन्द्र के साथ कैश काउन्टर पर पंजीकरण करा सकते हैं.

बिजली चोरी की बात की जाए तो लखनऊ में ही एक अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 के बीच 191.75 करोड़ की बिजली चोरी पकड़ी गई. इन बिजली चोर उपभोक्ताओं से ऊर्जा विभाग सिर्फ 5.82 करोड़ रुपये ही वसूले पाया. बिजली चोरों से 186.93 करोड़ वसूलने में बिजली विभाग नाकाम रहा था. वर्तमान में यूपी में लाखों की संख्या में बिजली चोर उपभोक्ता हैं जो बिजली विभाग को बड़ा नुकसान पहुंचा रहे हैं.

 

विजिलेंस के अपर पुलिस महानिदेशक जेएन सिंह का कहना है कि इस बार बिजली चोरी के मामलों को हल करने का पूरा प्रयास किया जाएगा. विजिलेंस के अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि बिजली चोरी के तहत दर्ज एफआईआर प्रकरणों की सूची बनाकर एक-एक उपभोक्ता से सम्पर्क करें. इतना ही नहीं एकमुश्त समाधान योजना में पंजीकरण भी कराएं.

उनका कहना है कि प्रदेश में लाखों की संख्या में बिजली चोरी और एफआईआर के प्रकरण हैं. उत्तर प्रदेश के हर जिले में बिजली थाने भी मौजूद हैं. सभी की सहायता ली जाए. उनका कहना है कि लखनऊ में करीब 31 हजार एफआईआर दर्ज हैं. इस योजना के तहत पंजीकरण कराकर छूट का लाभ लेकर ऐसे मामले समाप्त किये जा सकते हैं, इसलिए विजिलेंस की ये जिम्मेदारी सौंपी गई. एक-एक उपभोक्ता से सम्पर्क कर ओटीएस में पंजीकरण कराया जाएगा.

Kirti Bhardwaj

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