उत्तर प्रदेश

UP 90-minute secret discussion: यूपी 90 मिनट की गुपचुप चर्चा, योगी को दिलाएगी देश की सत्ता ?

UP 90-minute secret discussion: यूपी 90 मिनट की गुपचुप चर्चा

25 नवंबर 2025…..ये दिन अयोध्या में राम मंदिर पर धर्म ध्वजा फहराए जाने से इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया… लेकिन उससे पहले कुछ ऐसा हुआ… जिसने यूपी ही नहीं, पूरे देश के सियासी गलियारों में कई अनसुलझे सवालों को पैदा कर दिया… वो थी 90 मिनट की एक खास मुलाकात… वो भी, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संघ प्रमुख मोहन भागवत के बीच…. इस मुलाकात पर उठे सवालों ने 2027 के विधानसभा चुनाव से लेकर 2029 के लोकसभा चुनाव को अपनी जद में ले लिया….

 

वैसे तो, बात करें…. उत्तरप्रदेश ना केवल राजनीतिक लिहाज से, ना केवल धार्मिक लिहाज से और ना केवल संवैधानिक लिहाज से चर्चाओं में बना रहता है… वहीं अब उत्तरप्रदेश में फिर से उथल-पुथल देखने को मिल रही है। क्योंकि, बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अब हर वो पार्टी मैदान में कूद पड़ी है जो उत्तरप्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों में दमखम दिखाने की सोच रखती है। यूपी में मायवती ने फिर से अपनी ताकत जुटाना शुरू कर दिया है, तो वही महागठबंधन में सीटों की शेयरिंग को लेकर फिर से पेंच अटकता हुआ नजर आ सकता है।

वहीं, सत्ताधारी भाजपा की पूरी कोशिश है कि वो उत्तरप्रदेश को विकास की नई ऊंचाईयों तक पहुंचाने में कामयाब हो… और जहां तक बात करें यूपी में योगी मॉडल की तो, उसे हर उस व्यक्ति तक सरकार ने पहुंचने का प्रयास किया है… जो, समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा है… जहां पर आज से पहले किसी की नजर तक नहीं गई थी… क्योंकि, उन लोगों को सिर्फ वोट बैंक के लिए इस्तेमाल किया जाता था…

उत्तरप्रदेश केवल राजनीतिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं हैं बल्कि उत्तरप्रदेश एक और दृष्टि से महत्वपूर्ण है और वो है धार्मिक दृष्टिकोण.. अभी हमने देखा उत्तरप्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर का भव्य प्रांगण और उस पर लहराती धर्मध्वजा…जो हर उस भारतीय के लिए गर्व की बात है, जिसने राम मंदिर के निर्माण में अपने-अपने तरीके से सहयोग दिया…

लेकिन इसके अलावा भी राम मंदिर की पवित्र नगरी अयोध्या सुर्खियों में है, और इसकी वजह राममंदिर पर ध्वजारोहण नहीं, बल्कि उसी शाम हुई एक गुपचुप लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण मुलाकात है… राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के साकेत निलयम स्थित संघ कार्यालय में करीब डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में चर्चा की…

बैठक की आधिकारिक जानकारी तो नहीं दी गई है. लेकिन सूत्रों के हवाले से मिल रही खबरें इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले का बड़ा राजनीतिक संकेत बता रही हैं.

मोहन भागवत राम मंदिर में ध्वजारोहण समारोह से एक दिन पहले अयोध्या पहुंचे थे. जहां उन्होंने गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड साहिब में सिख गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस कार्यक्रम में शिरकत की.. जिसके बाद उन्होंने राम मंदिर में दर्शन-पूजन किया.. शाम करीब 6 बजे वो साकेत निलयम (आरएसएस का अयोध्या कार्यालय) पहुंचे. ठीक डेढ़ घंटे बाद, यानी शाम साढ़े सात बजे के करीब सीएम योगी आदित्यनाथ भी उसी परिसर में पहुंचे. दोनों नेताओं के बीच करीब 90 मिनट तक एकांत चर्चा हुई.

राजनीतिक गलियारों में ये सवाल जोरों पर है कि जब दोनों नेता रविवार को ही लखनऊ में एक ही मंच पर थे, तो फिर अलग से मुलाकात की क्या जरूरत पड़ी? और वो भी लखनऊ की बजाय अयोध्या में? ‘लखनऊ में तो प्रोटोकॉल होता है, कैमरे होते हैं, मीडिया होता है. अयोध्या में साकेत निलयम पूरी तरह संघ का अपना परिसर है. वहां कोई बाहरी व्यक्ति नहीं पहुंच सकता. यानी जो बातें होनी थीं, वे पूरी तरह गोपनीय रखनी थीं.’

उत्तर प्रदेश में अभी से 2027 के विधानसभा चुनाव की सरगर्मी शुरू हो चुकी है. पिछले कुछ महीनों से ये चर्चा भी गरम है कि संगठन और सरकार के बीच कुछ मुद्दों पर तालमेल की जरूरत है. जातीय समीकरण, राम मंदिर आंदोलन के बाद हिंदुत्व की नई परिभाषा और बीजेपी-संघ के बीच भावी रणनीति… इन सबको लेकर ये बैठक अहम मानी जा रही है.

सूत्रों का दावा है कि बातचीत में निम्न मुद्दे प्रमुख रहे.. 2027 के चुनाव में हिंदुत्व के साथ सामाजिक समरसता का संदेश कैसे ले जाना है. राम मंदिर आंदोलन के बाद कार्यकर्ताओं में आ रही शिथिलता को दूर करने की रणनीति प्रदेश में संगठन और सरकार के बीच कथित तनाव के समाधान के साथ-साथ आगामी कुंभ मेला और उसके राजनीतिक उपयोग पर चर्चा हुई. ऐसा माना जा रहा धर्मांतरण के नए तरीके पर चर्चा हुई है. यूपी में आपसी गुटबाजी जैसे मुद्दे हो सकते हैं.

लेकिन अब कयास लगाए जा रहे है कि अगर उत्तरप्रदेश के सीएम का कड़ा रूख, मजबूत कानूनी कार्यवाही, अपराध पर शिकंजा, विकास का नया मॉडल और भी कई कड़े फैसलों के साथ-साथ संघ की भूमिका भी यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में नजर आ सकती है…या आने वाले 2029 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री का चेहरा योगी आदित्यनाथ को बनाया जा सकता है…? अब ये देखने वाली बात रहेगी कि इस गुपचुप मीटिंग में किन किन प्रस्तावों पर मोहर लगी है?

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