बसपा प्रमुख मायावती ने क्यों कहा ? “सपा ब्राह्मण विरोधी, अखिलेश मांगे माफी”!

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी बढ़ता नजर आ रहा है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा ब्राह्मण समाज को लेकर की गई कथित अभद्र टिप्पणी ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।

इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है और तमाम दल इसे लेकर एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। इस विवाद में अब बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी खुलकर सामने आ गई हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि, सपा नेतृत्व को इस मामले पर तत्काल माफी मांगनी चाहिए।

मायावती ने आरोप लगाया कि पुलिस केस दर्ज होने के बावजूद सपा नेतृत्व की चुप्पी उनके जातिवादी चरित्र को उजागर करती है। दरअसल, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने हाल ही में ब्राह्मण समाज को लेकर विवादित बयान दिया था। बयान सामने आने के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में नाराजगी देखने को मिली… ब्राह्मण समाज से जुड़े संगठनों ने इस बयान की कड़ी आलोचना की और सपा से सार्वजनिक माफी की मांग उठाई। मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस में शिकायत दर्ज कर मुकदमा भी कायम किया गया, लेकिन इसके बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ।

इसी मुद्दे को लेकर मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लंबी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि समाजवादी पार्टी के एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा ब्राह्मण समाज को लेकर की गई अभद्र, अशोभनीय और आपत्तिजनक टिप्पणी की हर तरफ निंदा होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि, ये बयान केवल एक व्यक्ति की सोच नहीं बल्कि सपा की मानसिकता को दर्शाता है।

मायावती ने सपा नेतृत्व की खामोशी पर सवाल उठाते हुए कहा कि, अगर पार्टी नेतृत्व इस तरह की टिप्पणी पर तुरंत कार्रवाई नहीं करता तो इससे समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि, सपा हमेशा से संकीर्ण जातिवादी राजनीति करती रही है और इस घटना ने एक बार फिर उसे साबित कर दिया है। उनके अनुसार, दलितों, अति पिछड़ों और मुस्लिम समाज की तरह अब ब्राह्मण समाज भी सपा की राजनीति से आहत महसूस कर रहा है। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि राजकुमार भाटी के बयान से ब्राह्मण समाज के सम्मान और स्वाभिमान को ठेस पहुंची है। ऐसे में सपा प्रमुख अखिलेश यादव को तुरंत इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और ब्राह्मण समाज से सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना करनी चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि अगर ऐसा नहीं किया जाता तो ये विवाद और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।

मायावती ने अपनी पार्टी की कार्यशैली का जिक्र करते हुए कहा कि बहुजन समाज पार्टी हमेशा “सर्वसमाज” की राजनीति में विश्वास करती है। उन्होंने दावा किया कि बसपा सरकार में ब्राह्मण समाज को सम्मान, भागीदारी और उचित प्रतिनिधित्व दिया गया था। उन्होंने कहा कि, बसपा में “यूज एंड थ्रो” की राजनीति नहीं होती, बल्कि हर वर्ग के हितों की रक्षा की जाती है। इसके साथ ही मायावती ने वर्तमान सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज के भीतर भाजपा सरकार को लेकर भी नाराजगी बढ़ रही है और यह बात किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में आने वाले चुनावों में ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

फिलहाल ये विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। चुनाव से पहले जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश में जुटी पार्टियों के लिए इस तरह के बयान राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकते हैं। आने वाले दिनों में ये देखना दिलचस्प होगा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और विपक्ष इस विवाद को किस तरह चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करता है।

ये भी पढ़ें:

By admin