ये क्या बोल गए ओपी राजभर: “PDA आ रहा है”?

 

उत्तर प्रदेश की राजनीति अपनी अनूठी बयानबाजी, तीखे कटाक्षों और अनपेक्षित मोड़ों के लिए जानी जाती है। यहां कब कौन सा शब्द राजनीतिक ‘हथियार’ बन जाए, कहा नहीं जा सकता। ताजा मामला सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी यानी के (सुभासपा) के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर से जुड़ा है, जिनकी एक मामूली सी ‘जुबान की फिसलन’ ने विपक्षी खेमे में जश्न का माहौल पैदा कर दिया है।

गाजीपुर में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजभर की जुबान ऐसी फिसली कि उन्होंने अपनी मौजूदा गठबंधन ‘एनडीए’ की जगह धुर विरोधी अखिलेश यादव के अभियान ‘पीडीए’ के आने का दावा कर दिया। क्या था पूरा वाकया? चलिए विस्तार से जानते हैं।

गाजीपुर में मीडिया से मुखातिब ओम प्रकाश राजभर हमेशा की तरह अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में थे। वे उत्तर प्रदेश सरकार और एनडीए गठबंधन की उपलब्धियों का बखान कर रहे थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल गंभीर था और राजभर विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी पर हमलावर होने की तैयारी में थे।

इसी दौरान, सरकार के पक्ष में अपनी बात रखते हुए और भविष्य की जीत का दावा करते हुए जोश-जोश में राजभर के मुंह से निकल गया— “पीडीए आ रहा है…”। जैसे ही राजभर ने अखिलेश यादव का चर्चित नारा ‘पीडीए’ यानी के (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) बोला, वहां मौजूद पत्रकार और नेता सन्न रह गए। माहौल में अचानक सन्नाटा पसर गया। राजभर को शायद तुरंत अपनी गलती का अहसास नहीं हुआ, लेकिन उनके ठीक बगल में बैठे सुभासपा विधायक बेदी राम को स्थिति की गंभीरता समझने में देर नहीं लगी।

वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बेदी राम ने तुरंत अपनी कोहनी से राजभर को हल्का धक्का मारा और उन्हें टोकते हुए गलती का अहसास कराया। कोहनी का धक्का लगते ही राजभर संभले और बिना देर किए अपनी बात को सुधारा। उन्होंने तत्काल ‘एनडीए’ शब्द का उच्चारण किया। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। कैमरों में ये ‘सच’ रिकॉर्ड हो चुका था और कुछ ही मिनटों में यह वीडियो सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल गया।

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, जो पिछले काफी समय से राजभर के हमलों का जवाब देना भी जरूरी नहीं समझ रहे थे, इस वीडियो को देखकर ‘गदगद’ नजर आए। उन्होंने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया और तुरंत वीडियो को अपने ‘एक्स’ हैंडल पर साझा कर दिया।

अखिलेश यादव ने राजभर के बहाने पूरी सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए लिखा: कि, “सच अपने आप निकलता है और झूठ सोचकर बोला जाता है। आपने सच कहा, सही कहा ‘पीडीए’ आ रहा है। कोहनी मारकर मुंह से निकले सच को बदलने की कोशिश न की जाए।”
अखिलेश ने यहां तक कह दिया कि राजभर अंदरूनी तौर पर अब भी पीडीए के ही समर्थक हैं, लेकिन अपने ‘निजी लालच’ के चलते एनडीए के पाले में खड़े हैं। उनके इस तंज ने यूपी की सियासत में हलचल पैदा कर दी है।

इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति दो धड़ों में बंट गई है। समाजवादी पार्टी के समर्थकों और सोशल मीडिया यूजर्स का तर्क है कि राजभर लंबे समय तक अखिलेश यादव के साथ गठबंधन में रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने साथ मिलकर ‘पिछड़ों और दलितों’ की राजनीति की थी। इसलिए उनके मन में अब भी पीडीए का विचार बसा हुआ है, जो गलती से बाहर आ गया। वहीं दूसरी ओर, राजभर के समर्थकों और सुभासपा नेताओं का कहना है कि ये केवल एक ‘स्लिप ऑफ टंग’ है। किसी भी व्यक्ति से बोलते समय शब्दों की चूक हो सकती है। इसे राजनीतिक रंग देना और मुद्दा बनाना समाजवादी पार्टी की हताशा को दर्शाता है।

गौरतलब है कि ओम प्रकाश राजभर और अखिलेश यादव के बीच के रिश्ते पिछले दो सालों में बेहद तल्ख रहे हैं। राजभर लगातार अखिलेश को ‘एसी कमरे से बाहर निकलने’ की सलाह देते रहे हैं, जबकि सपा ने अब राजभर को गंभीरता से लेना छोड़ दिया है। अखिलेश ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि राजभर के बयानों का जवाब सपा की महिला सभा की अध्यक्ष सीमा राजभर देंगी, क्योंकि बड़े नेता उन पर समय बर्बाद नहीं करना चाहते। लेकिन गाजीपुर की इस घटना ने अखिलेश को एक ऐसा मौका दे दिया है, जिससे उन्होंने राजभर की ‘विश्वसनीयता’ पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। ऐसे में छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स और जुबानी जंग भी बड़े नैरेटिव सेट करने का काम करते हैं। कोहनी मारने वाले इस वीडियो ने ये साबित कर दिया है कि आज के डिजिटल युग में राजनेताओं के लिए एक शब्द की चूक भी भारी पड़ सकती है। अखिलेश यादव के लिए जहां ये ‘पीडीए’ की नैतिक जीत जैसा है, वहीं राजभर के लिए ये एक ‘पब्लिक रिलेशन’ चुनौती बन गया है। अब देखना ये है कि राजभर अपने चिर-परिचित अंदाज में इस पर पलटवार कैसे करते हैं, या फिर उन्हें भविष्य के भाषणों में अधिक सतर्क रहने पर मजबूर करेगा।

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By admin