पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर फिर हमला किया है। रविवार को पुरुलिया में एक चुनावी रैली में ममता ने कहा कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो राज्य में लोगों की खान-पान की आज़ादी और संस्कृति पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बंगाल की पहचान उसके खाने-पीने और खासकर मछली खाने से जुड़ी है, और किसी तरह का प्रतिबंध लोगों की भावनाओं के खिलाफ होगा।
ममता ने आरोप लगाया कि भाजपा उनकी पार्टी और कार्यकर्ताओं को परेशान कर रही है और राज्य की प्रमुख योजनाओं को बंद करने की कोशिश कर सकती है। उन्होंने ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे लाखों महिलाओं और गरीब परिवारों को मदद मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि चुनाव से पहले SIR के माध्यम से लगभग 1.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने लोगों से एकजुट होने और बंगाल की पहचान और अधिकारों की रक्षा करने की अपील की।
रैली से पहले ममता बनर्जी ने पुरुलिया के जैन मंदिर में पूजा-अर्चना की और राज्य में शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने जैन समुदाय के लिए कई कदम उठाए हैं और राज्य की सांस्कृतिक विविधता को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ममता के ये बयान आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर दिए गए हैं, जिसमें वह भाजपा पर हमला कर अपनी सरकार की उपलब्धियों को भी जनता के सामने दिखा रही हैं।
