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Waqf Bill: ‘वक्फ बिल जबरन पारित कराया गया’, सोनिया गांधी ने विधेयक को लेकर की गई जल्दबाजी के लिए सरकार को घेरा

कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी ने कहा है कि वक्फ संशोधन विधेयक को लोकसभा में जबरन पारित कराया गया है। सीपीपी की बैठक में बोलते हुए सोनिया ने कहा कि पार्टी प्रस्तावित ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ विधेयक का भी विरोध करेगी। उन्होंने इसे संविधान को नुकसान पहुंचाने का एक और प्रयास करार दिया।

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने विधेयक और उसे पारित कराने के लिए सरकार की ओर से दिखाई गई जल्दबाजी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह विधेयक जबरन पास कराया गया है, इसे थोपा गया है।

विधेयक की पारित करने की प्रक्रिया पर सवाल

लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को एक लंबे 12 घंटे की बहस के बाद आधी रात के बाद पारित किया गया। इसके बाद, इसे राज्यसभा में पेश किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। विपक्षी दलों ने इस विधेयक में किए गए कई संशोधनों को खारिज किए जाने और उन्हें ध्वनि मत से नकारे जाने का विरोध किया। विधेयक के पारित होने के बाद सोनिया गांधी ने इसे “जबरन” और “थोपा गया” निर्णय बताया। उनका कहना था कि सरकार की ओर से दिखाई गई यह जल्दबाजी यह दिखाती है कि भाजपा इस विधेयक को संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ एक कदम मानती है।

सोनिया गांधी ने कहा कि यह विधेयक सिर्फ एक सरकारी नीति नहीं है, बल्कि यह एक गहरी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसे भाजपा अपनी स्थायी राजनीतिक उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए लागू कर रही है। उनका मानना है कि वक्फ संशोधन विधेयक समाज को और भी अधिक ध्रुवीकृत करेगा और भाजपा की राजनीतिक स्थिति को मजबूत करेगा।

वक्फ (संशोधन) विधेयक के पारित होने के कुछ ही घंटे बाद सोनिया गांधी ने कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में पार्टी सांसदों को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि मोदी सरकार देश के संविधान को सिर्फ कागजों तक सीमित कर देना चाहती है और उसका वास्तविक उद्देश्य इसे खत्म करना है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक भारतीय संविधान के खिलाफ एक हमला है, और इससे देश का संघीय ढांचा कमजोर होगा। उनका कहना था कि सरकार शिक्षा, नागरिक अधिकारों, लोगों की स्वतंत्रता, और चुनाव संचालन जैसी सभी संस्थाओं पर हमला कर रही है और इसके परिणामस्वरूप देश का लोकतांत्रिक ढांचा खतरे में पड़ सकता है।

सरकार की रणनीति और कांग्रेस का विरोध

सोनिया गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार, सत्ता में रहते हुए, लगातार अपनी विफलताओं और विवादों को छिपाने के लिए झूठी प्रचारबाजी और सत्तावादी रुख अपना रही है। उनका कहना था कि भाजपा सरकार अपने राजनीतिक हितों के लिए हर उस संस्था और प्रक्रिया को निशाना बना रही है, जो लोकतांत्रिक रूप से काम कर रही है। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि सरकार विपक्षी आवाजों को दबाने के लिए संसद में व्यवधान उत्पन्न कर रही है, जिससे विपक्षी दलों को अपनी बात रखने का कोई अवसर नहीं मिल पाता है।

इसके अलावा, सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने 2004-2014 के दौरान कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए कई महत्वपूर्ण कार्यों और पहलों को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि यह एक तरह से कांग्रेस के योगदान को नकारने की कोशिश है। कांग्रेस पार्टी ने अब यह निर्णय लिया है कि इन तथ्यों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया जाएगा और सरकार की विफलताओं को जनता के सामने लाया जाएगा।

विधानसभा में विपक्षी नेताओं का विरोध

सोनिया गांधी ने अपने बयान में यह भी कहा कि संसद के दोनों सदनों में विपक्षी नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। उनके मुताबिक, सत्ता पक्ष विपक्षी सांसदों को मुद्दे उठाने से रोकने के लिए लगातार व्यवधान पैदा कर रहा है। कांग्रेस पार्टी ने यह आरोप भी लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में असल मुद्दों को दबाने के लिए झूठी और आक्रामक तरीके से कांग्रेस शासित राज्यों पर निशाना साधा जा रहा है।

सोनिया गांधी ने पार्टी सांसदों से अपील की कि वे भी भाजपा शासित राज्यों में घोटालों, विफलताओं और कुशासन को सार्वजनिक रूप से उजागर करें। उनका कहना था कि यदि विपक्ष को संसद में बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है, तो वे जनता के बीच जाकर भाजपा की वास्तविक स्थिति को सामने लाने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।

वक्फ विधेयक: सरकार की जल्दबाजी पर सवाल

वक्फ विधेयक को लेकर संसद में चर्चा और बहस के दौरान कई विपक्षी सांसदों ने इसे लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि सरकार ने इस विधेयक को बिना पर्याप्त समय दिए बिना पास करने की कोशिश की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार के पास इस पर कोई ठोस दृष्टिकोण नहीं है। इसके अलावा, विधेयक में किए गए संशोधनों के विरोध में विपक्ष ने कई सवाल उठाए। विधेयक में जो प्रस्ताव किए गए थे, उन्हें लेकर विपक्ष ने गंभीर चिंता जताई थी और इसे राजनीतिक एजेंडे के तहत लागू किए जाने का आरोप लगाया था।

लोकसभा में विधेयक के पारित होने के बाद विपक्षी दलों ने इसे देश के भविष्य के लिए खतरनाक कदम के रूप में देखा। उनका कहना था कि इस विधेयक के लागू होने से धार्मिक समुदायों के अधिकारों को नुकसान पहुंचेगा और यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ जाएगा।

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