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US-India trade tensions: अमेरिका-भारत व्यापार तनाव के बीच पुतिन का भारत दौरा, ट्रंप को नहीं भाई रूस और भारत की दोस्ती, एक और टैरिफ लगाने की दी धमकी

US-India trade tensions: अमेरिका-भारत व्यापार तनाव के बीच पुतिन का भारत दौरा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन का हालिया भारत दौरा वैश्विक स्तर पर चर्चा का केंद्र रहा। नई दिल्ली में उनका भव्य स्वागत यह दर्शाता है कि भारत और रूस के रिश्ते कितने गहरे, स्थायी और बहुआयामी हैं। यह कोई नया संबंध नहीं, बल्कि दशकों से तैयार हुआ भरोसे का ढांचा है, जिसने समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय दबावों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद अपनी मजबूती कायम रखी है। पुतिन पहले भी कई बार भारत आ चुके हैं, लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय माहौल, खासकर अमेरिका द्वारा उठाए गए नए व्यापारिक कदमों ने इस दौरे को और भी खास बना दिया।

अमेरिका ने हाल ही में भारत के रूसी तेल आयात पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है, जबकि पहले से ही 25 फीसदी शुल्क लागू था। इसका अर्थ है कि कुल मिलाकर भारत पर अब 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ लगाया जा चुका है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा माना जा रहा है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए रूस से तेल आयात का बड़ा हिस्सा सुरक्षित कर रहा है। अमेरिका के इस कदम ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव को नए मुकाम पर पहुंचा दिया है।

इसी माहौल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के खिलाफ एक और सख्त बयान दिया, जिसने आर्थिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि भारत अमेरिकी बाजार में चावल को सस्ते दामों पर बेच रहा है, जिसे उन्होंने “डंपिंग” का नाम दिया और कहा कि वह इस मुद्दे को शुल्क (टैरिफ) लगाकर हल करेंगे। व्हाइट हाउस में कृषि क्षेत्र और प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक गोलमेज बैठक के दौरान ट्रंप ने किसानों के हितों की रक्षा का वादा करते हुए 12 अरब डॉलर की सहायता योजना की घोषणा की, वहीं भारत समेत कई देशों पर अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया

बैठक के दौरान लुइसियाना की मेरिल केनेडी, जो अपने परिवार के चावल कारोबार ‘केनेडी राइस मिल’ का संचालन करती हैं, ने ट्रंप से कहा कि अमेरिकी चावल उत्पादक इन दिनों कठिन दौर से गुजर रहे हैं क्योंकि भारत, थाईलैंड और यहां तक कि चीन भी अमेरिकी बाजारों में बेहद सस्ते दाम पर चावल बेच रहे हैं। उनका कहना था कि प्यूर्टो रिको कभी अमेरिकी चावल का बड़ा बाजार था, लेकिन अब वहां भी भारतीय और थाई चावल की भरमार हो गई है।

जब ट्रंप ने पूछा कि आखिर भारत को ऐसा करने की अनुमति कैसे मिल रही है, तो अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बताया कि भारत के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है और यह मुद्दा उसके अंतर्गत आता है। इसी दौरान केनेडी ने यह भी बताया कि भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में एक मामला पहले से ही चल रहा है। यह सुनते ही ट्रंप ने दो टूक कहा कि इस समस्या को लंबी प्रक्रिया से नहीं, बल्कि शुल्क बढ़ाकर एक ही दिन में हल किया जा सकता है।

ट्रंप का यह बयान केवल कृषि के मुद्दे तक सीमित नहीं रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि जो भी देश अमेरिकी बाजार में अवैध रूप से सस्ते उत्पाद भेज रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह संदेश सीधे तौर पर भारत की ओर संकेत करता है, जो दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक देश है। इंडियन राइस एक्सपोर्ट्स फेडरेशन के अनुसार, भारत ग्लोबल मार्केट में लगभग 28 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है और वर्ष 2024-25 में उसका वैश्विक चावल निर्यात हिस्सा 30.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

अमेरिकी बाजार में भारत की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय सोना मसूरी जैसी किस्में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में काफी पसंद की जाती हैं। भारत का चावल अमेरिकी बाजार में कीमत, गुणवत्ता और विविधता की वजह से मजबूत पकड़ बना चुका है। यही कारण है कि अमेरिकी किसान समूह और उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि लगातार व्हाइट हाउस पर दबाव बना रहे हैं कि भारत पर टैरिफ बढ़ाए जाएं, ताकि अमेरिकी चावल को प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े

अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाए गए कुल 50 प्रतिशत शुल्क में रूस से आयातित तेल पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है, जिसके चलते भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। ट्रंप की हालिया टिप्पणियों ने इस तनाव को और बढ़ाया है और यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में अमेरिका और भारत के व्यापारिक रिश्तों में और चुनौतियाँ देखने को मिल सकती हैं।

पुतिन का भारत दौरा ऐसे वक्त में हुआ है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा दोनों ही बड़े मुद्दे बने हुए हैं। रूस से ऊर्जा आयात के मुद्दे पर भारत की स्वायत्तता पहले भी स्पष्ट रही है, और अब कृषि व्यापार पर अमेरिकी दबाव एक नई चुनौती के रूप में उभर रहा है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक शक्ति समीकरणों के बीच भारत अपने हितों की रक्षा कैसे करता है, यह आने वाले हफ्तों और महीनों में तय होगा।

Ritika Bhardwaj

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