UKSSSC पेपर लीक मामले में सड़कों पर प्रदेश का युवा
UKSSSC पेपर लीक मामले को लेकर प्रदेश के युवा सड़कों पर उतर आएं हैं। देहरादून के परेड ग्राउंड में युवा लंबे समय से धरने पर डटे हुए हैं, और धामी सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। युवाओं की यह नाराजगी सिर्फ पेपर लीक (UKSSSC)तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे राज्य में व्याप्त भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जोड़ा जा रहा है।
इस बीच, उत्तराखंड बेरोजगार संघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की और अपनी मांगों (UKSSSC) को उनके समक्ष रखा। युवाओं की मांग है कि पेपर लीक (UKSSSC) में लिप्त सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। बैठक के बाद मुख्यमंत्री धामी ने बेरोजगार संघ को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
लेकिन इस मुलाकात के बाद जो बयान मुख्यमंत्री धामी की ओर से सामने आया, उसने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। धामी ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य में युवाओं को भड़काने के लिए एक ‘नकल जिहाद’ (UKSSSC) शुरू किया गया है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “मैं उन सभी नकल माफियाओं (UKSSSC) और जिहादियों को बता देना चाहता हूं कि जब तक इन्हें मिट्टी में नहीं मिला दिया जाता, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे।”
मुख्यमंत्री धामी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने राज्य में नकल विरोधी (UKSSSC) सख्त कानून लागू किया है, जिसकी बदौलत अब तक 25,000 पदों पर पारदर्शी तरीके से भर्तियां संपन्न की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने नकल माफियाओं पर नकेल कसने का काम किया है, लेकिन कुछ लोगों को ये पारदर्शिता पसंद नहीं आ रही।”
धामी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि सरकार भ्रष्टाचार पर भी कड़ा प्रहार कर रही है। उन्होंने बताया कि आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के खिलाफ भी जांच और कार्रवाई की जा रही है।
धामी का यह बयान बीजेपी की राज्य स्तरीय संगठनात्मक कार्यशाला के दौरान आया। देहरादून में आयोजित इस कार्यशाला में उन्होंने नकल, जिहाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने रुख को बेहद कड़े शब्दों में जाहिर किया। उन्होंने कहा, “देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरती पर कोई भी व्यक्ति जिहादी सोच के साथ रंग-बिरंगी चादर ओढ़कर जमीन हड़पने का सपना देखता है, तो यह सपना अब कभी पूरा नहीं होगा।”
मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान किया कि राज्य सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया है। धामी ने कहा कि इस फैसले का प्रभाव अगले वर्ष से स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। उन्होंने इसे राज्य में समान नागरिक शिक्षा व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम बताया।
धामी के बयान के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। एक ओर जहां वे युवाओं की नाराजगी (UKSSSC) को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अपने राजनीतिक आधार को मज़बूत करने की दिशा में भी यह बयानबाज़ी देखी जा रही है।
बीजेपी की इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य था मिशन 2027 की तैयारियों को गति देना और बूथ स्तर पर पार्टी संगठन को सशक्त बनाना। इस कार्यशाला में बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष, राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रदेश सह-प्रभारी रेखा वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट और प्रदेश महामंत्री (संगठन) अजय जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए।
कार्यशाला में संगठनात्मक मजबूती, आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव की रणनीतियों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही राज्य सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने और विपक्ष के आरोपों (UKSSSC)का जवाब देने की रणनीति भी बनाई गई।
पेपर लीक (UKSSSC) और भर्ती घोटालों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप लगाया है। वहीं, मुख्यमंत्री धामी और बीजेपी नेतृत्व इसे एक साजिश करार देते हुए कह रहे हैं कि यह पूरी योजना युवाओं को भड़काकर सरकार को अस्थिर करने की है।

