जयपुर, 23 अक्टूबर 2026। राजस्थान में पंचायती राज चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। इसी बीच कांग्रेस में टिकट वितरण की प्रक्रिया को लेकर पार्टी के भीतर से ही सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस नेता सीताराम लांबा ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा है कि यदि जिला परिषद और पंचायत समिति के उम्मीदवारों का चयन केवल मौजूदा विधायकों और विधानसभा चुनाव हार चुके प्रत्याशियों की मर्जी से होना है, तो पार्टी संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका क्या रह जाती है?
लांबा की इस टिप्पणी को पंचायत चुनावों में टिकट वितरण के अधिकार और संगठनात्मक भागीदारी को लेकर उठे सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है।
सीताराम लांबा का तीखा सवाल, टिकटों पर किसका अधिकार?
कांग्रेस नेता सीताराम लांबा ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में टिकट वितरण की व्यवस्था पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि यदि जिला परिषद और पंचायत समिति के टिकटों पर केवल वर्तमान विधायकों और पिछले विधानसभा चुनाव में पराजित उम्मीदवारों का ही अधिकार है, तो संगठन और कार्यकर्ताओं के कार्यालयों पर ताले लगा देने चाहिए।
लांबा की टिप्पणी का मुख्य मुद्दा यह है कि पंचायत चुनावों में उम्मीदवार तय करते समय स्थानीय संगठन, ब्लॉक और जिला कांग्रेस कमेटियों तथा लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं की राय को कितना महत्व दिया जा रहा है।
हालांकि, लांबा ने अपनी टिप्पणी में किसी विशेष विधायक, जिले या पंचायत क्षेत्र का नाम लेकर टिकट वितरण में अनियमितता का आरोप लगाया हो, इसकी पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती।
विधायकों और पूर्व प्रत्याशियों के प्रभाव पर सवाल
पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर स्थानीय विधायकों और पूर्व विधानसभा प्रत्याशियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन सीताराम लांबा की टिप्पणी से यह सवाल सामने आया है कि क्या टिकट वितरण की प्रक्रिया में संगठन के अन्य पदाधिकारियों और जमीनी कार्यकर्ताओं की भागीदारी पर्याप्त है?
लांबा ने जिस तरह मौजूदा विधायकों और चुनाव हार चुके प्रत्याशियों का उल्लेख किया है, उससे स्पष्ट है कि उनकी आपत्ति उम्मीदवार चयन में सीमित नेताओं के प्रभाव को लेकर है।
हालांकि, कांग्रेस की ओर से टिकट वितरण के सभी निर्णय केवल विधायकों या पूर्व प्रत्याशियों द्वारा किए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कौन हैं सीताराम लांबा?
सीताराम लांबा राजस्थान कांग्रेस के युवा नेताओं में शामिल हैं। वे छात्र राजनीति और युवा कांग्रेस के जरिए सक्रिय राजनीति में आगे आए हैं। लांबा राजस्थान युवा बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य के रूप में भी संगठन से जुड़े हैं।
एनएसयूआई और युवा कांग्रेस से जुड़े उनके राजनीतिक अनुभव को देखते हुए टिकट वितरण पर उनकी टिप्पणी को पार्टी के भीतर संगठनात्मक प्रतिनिधित्व से जुड़ी बहस का हिस्सा माना जा रहा है।
पहले भी कांग्रेस में टिकट वितरण पर उठ चुके हैं सवाल
राजस्थान कांग्रेस में पंचायत चुनावों के टिकट वितरण को लेकर इससे पहले भी नाराजगी सामने आ चुकी है। करौली में कांग्रेस विधायक अनीता जाटव ने हाल ही में टिकट वितरण से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे।
अनीता जाटव ने आरोप लगाया था कि पंचायत चुनावों के लिए जारी किए गए सात पार्टी सिंबल में से दो कथित तौर पर बेच दिए गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अब सीताराम लांबा की टिप्पणी ने उम्मीदवार चयन की पारदर्शिता और स्थानीय संगठन की भूमिका पर चर्चा को फिर तेज कर दिया है।
कांग्रेस ने युवाओं को 50 प्रतिशत टिकट देने की कही थी बात
राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने जुलाई 2026 में घोषणा की थी कि पंचायत और निकाय चुनावों में 50 वर्ष से कम उम्र के नेताओं को 50 प्रतिशत टिकट दिए जाएंगे।
डोटासरा ने यह भी कहा था कि उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और संगठनात्मक पहलुओं को महत्व दिया जाएगा। ऐसे में सीताराम लांबा की ताजा टिप्पणी के बाद यह सवाल भी चर्चा में है कि उम्मीदवार चयन में संगठन की भागीदारी किस तरह सुनिश्चित की जा रही है।
नाराज कार्यकर्ताओं को लेकर नेतृत्व के सामने चुनौती
पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों के चयन के बाद असंतुष्ट दावेदारों को साथ रखना किसी भी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण होता है। यदि टिकट नहीं मिलने से नाराज कार्यकर्ता चुनाव प्रचार से दूरी बनाते हैं या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरते हैं, तो स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
सीताराम लांबा की पोस्ट ने कांग्रेस के भीतर इस विषय पर बहस को सामने ला दिया है। हालांकि, उनकी टिप्पणी के बाद प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की किसी विशिष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।
क्या संगठन की सुनेगी कांग्रेस?
राजस्थान में पंचायत चुनावों के बीच उठे इस विवाद ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जमीनी कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधित्व का मुद्दा सामने रखा है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस नेतृत्व लांबा की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाता है और टिकट वितरण में ब्लॉक तथा जिला संगठन की भूमिका को लेकर क्या स्पष्टीकरण देता है।
फिलहाल सीताराम लांबा के सोशल मीडिया पोस्ट ने राजस्थान कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है।
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