झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक सड़क निर्माण कार्य आठ परिवारों के लिए जिंदगीभर का दर्द बन गया। जिस सड़क को बनाने के लिए ग्रामीणों ने अपनी मेहनत की कमाई से चंदा जुटाया था, उसी सड़क के निर्माण के दौरान आठ मजदूरों की करंट लगने से मौत हो गई। सोमवार, 2 नवंबर को उदयपुरवाटी क्षेत्र के छापोली गांव में सड़क निर्माण के दौरान सीमेंट मिक्सर मशीन ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गई। देखते ही देखते मशीन में करंट फैल गया और वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से झुलस गए।
घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। हादसे से नाराज ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पांच साल से सड़क के लिए संघर्ष कर रहे थे ग्रामीण
जानकारी के अनुसार, छापोली गांव से कदम कुंड की ओर जाने वाले करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे रास्ते को पक्का करने की मांग ग्रामीण लंबे समय से कर रहे थे। बताया जा रहा है कि पिछले पांच वर्षों से ग्रामीण सड़क निर्माण की मंजूरी के लिए प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे थे।
रास्ता वन क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण निर्माण की अनुमति नहीं मिल सकी थी। आखिरकार ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से चंदा इकट्ठा कर सड़क बनवाने का फैसला किया।
गांव के लोग चाहते थे कि सड़क बनने से आवागमन आसान हो और आसपास के लोगों को बेहतर सुविधा मिल सके। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि गांव के विकास के लिए शुरू किया गया यही काम इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगा।
मशीन का पाइप बिजली लाइन से टकराया, पलभर में चली गई आठ जानें
हादसा सोमवार सुबह करीब 10 बजे हुआ। सड़क निर्माण के लिए मजदूर सीमेंट और रोड़ी-बजरी मिलाने वाली मशीन का इस्तेमाल कर रहे थे। इसी दौरान मशीन को दूसरी जगह ले जाया जा रहा था।
बताया जा रहा है कि मशीन का हाइड्रोलिक हिस्सा या लोहे का पाइप ऊपर से गुजर रही 11 केवी बिजली लाइन के संपर्क में आ गया। इसके बाद मशीन में तेज करंट फैल गया और आसपास मौजूद मजदूर उसकी चपेट में आ गए।
करंट इतना घातक था कि आठ मजदूरों की जान चली गई। पांच अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को तत्काल उदयपुरवाटी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
हादसे की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए।
मृतकों में चार हालेड़ा मंडावरा और चार छापोली गांव के निवासी
इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले आठ लोगों की पहचान सामने आई है।
मृतक का नाम: उम्र – गांव
हरिराम गुर्जर: 30 वर्ष – हालेड़ा मंडावरा
मंगलचंद गुर्जर: 22 वर्ष – हालेड़ा मंडावरा
कालूराम गुर्जर: 29 वर्ष – हालेड़ा मंडावरा
पवन गुर्जर: 23 वर्ष – हालेड़ा मंडावरा
विष्णु सैनी: 38 वर्ष – छापोली
सुरेंद्र उर्फ सुरेश सैनी: 30 वर्ष – छापोली
मुकेश सैनी: 27 वर्ष – छापोली
फतेहचंद सैनी: 32 वर्ष – छापोली
मृतकों में सड़क निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार विष्णु सैनी भी शामिल थे। हादसे ने दोनों गांवों के कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है।
बिजली विभाग की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सड़क के ऊपर से गुजर रही बिजली लाइन की ऊंचाई पर्याप्त नहीं थी।
कुछ स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई करीब 13 फीट थी, जबकि निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार अधिक ऊंचाई होनी चाहिए थी। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि बिजली लाइन के संपर्क में मशीन आने के बाद भी बिजली आपूर्ति तुरंत बंद नहीं हुई।
बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने बिजली बंद कराने के लिए संबंधित कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन समय पर सहायता नहीं मिल सकी।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के लिए किन परिस्थितियों और किस स्तर की लापरवाही की जिम्मेदारी बनती है।
सात घंटे तक चला धरना, दो करोड़ रुपये मुआवजे की उठी मांग
आठ मजदूरों की मौत के बाद ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया। उन्होंने घटनास्थल पर धरना शुरू कर दिया और प्रत्येक मृतक के परिवार को दो करोड़ रुपये मुआवजा तथा सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग, पुलिस अधीक्षक और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा भी ग्रामीणों से बातचीत करने पहुंचे।
करीब सात घंटे तक चली बातचीत के बाद प्रशासन और ग्रामीणों के बीच आर्थिक सहायता को लेकर सहमति बनी।
मृतकों के परिजनों को 15-15 लाख रुपये और संविदा नौकरी का आश्वासन
प्रशासन के साथ हुई बातचीत में तय किया गया कि प्रत्येक मृतक के परिवार को विभिन्न सरकारी सहायता योजनाओं के तहत कुल 15 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।
इसके अलावा प्रत्येक मृतक परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने का आश्वासन दिया गया। घायलों को भी सहायता और उपचार उपलब्ध कराने की बात कही गई।
यह आर्थिक सहायता और रोजगार संबंधी सहमति है। वास्तविक भुगतान तथा नियुक्तियों की प्रक्रिया प्रशासनिक कार्रवाई के अनुसार पूरी होगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख, दो-दो लाख रुपये की सहायता की घोषणा
झुंझुनूं में हुए हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की।
वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी घटना पर शोक जताते हुए अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज और पीड़ित परिवारों की सहायता के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने घटना की जांच कराने और हादसे के कारणों का पता लगाने के निर्देश भी दिए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी हादसे पर दुख जताते हुए निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सड़क निर्माण की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था की भी होगी जांच
इस हादसे के बाद सड़क निर्माण की अनुमति और कार्यस्थल पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, सड़क का निर्माण ग्रामीणों के सहयोग से किया जा रहा था और वन क्षेत्र से संबंधित आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी।
अब जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि निर्माण कार्य के दौरान बिजली लाइन से सुरक्षित दूरी क्यों सुनिश्चित नहीं की गई और क्या संबंधित विभागों को निर्माण की जानकारी थी।
इसके अलावा हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई, बिजली आपूर्ति बंद करने की व्यवस्था और मशीन के संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन की भी जांच जरूरी है।
विकास की उम्मीद बनी आठ परिवारों के लिए त्रासदी
छापोली गांव के ग्रामीण जिस सड़क को अपनी सुविधा और विकास का रास्ता मानकर बनवा रहे थे, उसी के निर्माण के दौरान आठ लोगों की जान चली गई।
इस हादसे ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के साथ-साथ निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी के खतरों को भी उजागर किया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है और क्या जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई हो सकेगी?
आठ मजदूरों की मौत केवल एक दुर्घटना का आंकड़ा नहीं, बल्कि उन परिवारों की त्रासदी है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया। इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया है कि विकास कार्यों में लोगों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
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