राजस्थान

Pushkar Fair 2026: पुष्कर मेले में इस बार बकरियां दिखाएंगी जलवा! सजेगी ‘बकरी सुंदरी’ की महफिल, विजेता को मिलेगा खास ताज

अजमेर: राजस्थान का विश्वप्रसिद्ध पुष्कर मेला इस बार कुछ अलग और बेहद दिलचस्प होने जा रहा है। अब तक ऊंटों की सजावट, घोड़ों की शानदार चाल और पशुओं के करतबों के लिए मशहूर इस मेले में इस साल बकरियां भी अपनी खूबसूरती का जलवा बिखेरेंगी। पुष्कर मेले में पहली बार खास अंदाज में ‘बकरी सुंदरी’ प्रतियोगिता आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। इसमें राजस्थान की प्रसिद्ध सिरोही और सोजत नस्ल की बकरियां हिस्सा लेंगी। सबसे आकर्षक और बेहतरीन शारीरिक बनावट वाली बकरी को ‘पुष्कर सुंदरी’ का खिताब दिया जाएगा।

पशुपालन विभाग की इस पहल का उद्देश्य केवल पर्यटकों का मनोरंजन करना नहीं, बल्कि राजस्थान की उन्नत बकरी नस्लों को पहचान दिलाना और पशुपालकों को प्रोत्साहित करना भी है।

सिरोही और सोजत नस्ल की बकरियों के बीच होगा मुकाबला
पुष्कर मेले में आयोजित होने वाली इस अनोखी सौंदर्य प्रतियोगिता में सिरोही और सोजत नस्ल की बकरियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। राजस्थान की इन दोनों नस्लों की पशुपालन क्षेत्र में विशेष पहचान है।

प्रतियोगिता में बकरियों की शारीरिक बनावट, कद-काठी, ऊंचाई, त्वचा की चमक और सींगों की सुंदरता को परखा जाएगा। विशेषज्ञों की निर्णायक समिति विभिन्न मानकों के आधार पर बकरियों को अंक देगी।

जिस बकरी का प्रदर्शन सबसे बेहतर होगा, उसे ‘पुष्कर सुंदरी’ का खिताब देकर सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही विजेताओं के लिए नकद पुरस्कार और स्मृति चिह्न भी रखे गए हैं।

बकरियों के साथ पशुपालकों को भी मिलेगा सम्मान
इस प्रतियोगिता की एक खास बात यह भी है कि केवल विजेता बकरियों को ही नहीं, बल्कि उनकी देखभाल करने वाले पशुपालकों को भी सम्मानित किया जाएगा।

बेहतर पशुपालन, नस्ल सुधार और पशुओं की अच्छी देखभाल करने वाले पशुपालकों को प्रशस्ति पत्र दिए जाएंगे। इससे पशुपालकों को अपनी मेहनत और उन्नत नस्लों के प्रदर्शन के लिए बड़ा मंच मिलेगा।

पशुपालन विभाग का मानना है कि इस तरह की प्रतियोगिताओं से स्थानीय नस्लों के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही दूसरे क्षेत्रों के पशुपालक भी इन नस्लों की विशेषताओं के बारे में जान सकेंगे।

पशुपालन विभाग ने शुरू की तैयारियां
बकरी सौंदर्य प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए पशुपालन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में प्रतियोगिता से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।

मेला अधिकारी डॉ. नवीन परिहार ने आयोजन की प्रमुख जिम्मेदारियां डॉ. विश्वास कुमार, डॉ. निखिल माथुर और डॉ. शिवकरण मातवा को सौंपी हैं।

बैठक में प्रतियोगिता स्थल के चयन, बकरियों के पंजीकरण, स्वास्थ्य परीक्षण, पशु चिकित्सा सुविधाओं और निर्णायक मंडल के गठन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आयोजन से जुड़ी सभी तैयारियां समय पर पूरी की जाएं, ताकि पशुपालकों और दर्शकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

17 नवंबर से शुरू होगा पुष्कर मेला
17 से 24 नवंबर 2026: मुख्य पुष्कर मेला
10 से 26 नवंबर 2026: पशु मेला एवं अन्य गतिविधियां

राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार, पुष्कर मेला 17 से 24 नवंबर तक आयोजित होगा। इस दौरान धार्मिक आयोजनों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पशु प्रतियोगिताओं के जरिए राजस्थान की समृद्ध परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।

देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए बनेगा नया आकर्षण
पुष्कर मेला अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के कारण देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां राजस्थान की लोक संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा, ऊंटों की सजावट और पशु प्रतियोगिताओं को देखने पहुंचते हैं।

इस बार बकरी सौंदर्य प्रतियोगिता पर्यटकों के लिए एक नया अनुभव हो सकती है। खासतौर पर उन लोगों को राजस्थान की पशुधन परंपरा को करीब से समझने का अवसर मिलेगा, जो अब तक पुष्कर मेले को मुख्य रूप से ऊंटों और घोड़ों से जोड़कर देखते आए हैं।

पशुपालन और पर्यटन दोनों को मिल सकता है बढ़ावा
पुष्कर मेले में ‘बकरी सुंदरी’ प्रतियोगिता शुरू करने की पहल पशुपालन और पर्यटन दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इससे जहां सिरोही और सोजत जैसी नस्लों को अधिक पहचान मिलने की उम्मीद है, वहीं पशुपालकों को अपने पशुओं की गुणवत्ता और देखभाल का प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा।

अब देखना दिलचस्प होगा कि पुष्कर मेले में कौन-सी बकरी अपनी खूबसूरती और शानदार कद-काठी के दम पर ‘पुष्कर सुंदरी’ का ताज जीतती है।

Deepak Arora

दीपक अरोड़ा एक मीडिया उद्यमी, डिजिटल रणनीतिकार और लेखक हैं। "दीपक की कलम से" के माध्यम से वे राजनीति, समाज, शिक्षा, मीडिया और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार और विश्लेषण पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनकी लेखनी का उद्देश्य जागरूकता, संवाद और सकारात्मक सामाजिक चिंतन को बढ़ावा देना है।

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