टूटने की कगार पर TMC! पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाला है बड़ा भूचाल ?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने वाला है। जिस तृणमूल कांग्रेस ने कभी बंगाल की सत्ता पर अपना अजेय किला खड़ा किया था, अब उसी किले की दीवारों में दरारें पड़ती दिखाई दे रही हैं। खबर है कि दिल्ली में टीएमसी के संसदीय दल के भीतर ऐसी बगावत की पटकथा लिखी जा चुकी है, जो ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर के सबसे बड़े संकटों में से एक साबित हो सकती है। सवाल यह है कि क्या टीएमसी के भीतर अब ‘ऑपरेशन विभाजन’ शुरू हो चुका है?

दिल्ली के सियासी गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा है। क्या तृणमूल कांग्रेस का संसदीय कुनबा टूटने वाला है? सूत्रों के मुताबिक अगले हफ्ते जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी विपक्षी INDIA गठबंधन की बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचेंगे, उसी दौरान पार्टी के कम से कम 22 सांसद खुद को असली तृणमूल कांग्रेस घोषित कर सकते हैं।

बताया जा रहा है कि इस संभावित विद्रोह की कमान बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार के हाथों में है। बागी खेमे में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सांसद शामिल बताए जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इसी दौरान दिल्ली में पश्चिम बंगाल बीजेपी के बड़े नेता भी सक्रिय हैं। पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य राजधानी में डेरा डाले हुए हैं। समिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद लगातार बीजेपी नेताओं से संपर्क कर रहे हैं। उनका कहना है कि “हां, फोन कॉल्स आ रहे हैं।

तृणमूल के सांसद लगातार हमसे संपर्क कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस अब बीते कल की बात हो चुकी है।” बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव लॉकेट चटर्जी ने भी इस आग में घी डालने का काम किया। उनका दावा है कि चुनाव परिणाम आने के बाद से ही कई सांसद लगातार संपर्क में हैं और राजनीतिक भविष्य को लेकर नए विकल्प तलाश रहे हैं। लेकिन असली कहानी संसद के आंकड़ों में छिपी है। लोकसभा में फिलहाल टीएमसी के 28 सांसद हैं, जबकि राज्यसभा में पार्टी के 13 सदस्य मौजूद हैं।

संसद में किसी विभाजन को कानूनी मान्यता दिलाने और दल-बदल कानून से बचने के लिए दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी होगा। यानी लोकसभा में कम से कम 19 और राज्यसभा में 9 सांसदों का साथ चाहिए। सूत्रों का दावा है कि बागी गुट दोनों सदनों को मिलाकर 22 सांसदों का समर्थन जुटा चुका है। अगर ये आंकड़े सही साबित होते हैं, तो दिल्ली में ऐसा राजनीतिक विस्फोट देखने को मिल सकता है, जिसकी गूंज सीधे कोलकाता तक सुनाई देगी।

सूत्र बताते हैं कि बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से मिलकर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस घोषित करने की तैयारी में हैं। यानी जब ममता बनर्जी विपक्षी एकता की रणनीति बनाने दिल्ली आएंगी, उसी समय उनकी अपनी पार्टी में सबसे बड़ा विद्रोह सामने आ सकता है। इस बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय के बयान ने भी राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
उन्होंने संकेत दिया कि संसदीय दल का बिखराव अब लगभग तय माना जा रहा है। वहीं जब कई सांसदों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो अधिकांश के फोन बंद मिले। इस रहस्यमयी खामोशी ने अटकलों को और तेज कर दिया है। बागावत की मुख्य चेहरा मानी जा रहीं काकोली घोष दस्तीदार ने भी सोशल मीडिया पर ऐसा संदेश साझा किया, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी।

उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन के कथन और चार्ल्स मैके की कविता का हवाला देते हुए लिखा— “ततैया के छत्ते में हाथ मत डालो।” इस एक लाइन को राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। मानो यह संकेत हो कि अब पीछे हटने की कोई गुंजाइश नहीं बची। उधर कोलकाता में भी राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने तंज कसते हुए कहा कि जिन सांसदों से उन्होंने संपर्क करने की कोशिश की, उनके फोन एक साथ बंद मिले। उनका कहना था कि डर संक्रामक होता है, लेकिन साहस भी संक्रामक होता है।

फिलहाल सवाल कई हैं और जवाब बहुत कम। क्या यह महज राजनीतिक अफवाह है या फिर टीएमसी के इतिहास का सबसे बड़ा विभाजन सामने आने वाला है? क्या ममता बनर्जी इस संकट को टाल पाएंगी या फिर दिल्ली में शुरू होने वाला यह खेल बंगाल की राजनीति का नया अध्याय लिखेगा? अगले कुछ दिन न सिर्फ तृणमूल कांग्रेस, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

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