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हरियाली अमावस्या पर लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानें भारत पर असर

इस साल हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को मनाई जाएगी। खास बात यह है कि इसी दिन साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भी लगने जा रहा है। हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। हरियाली अमावस्या को श्रावणी अमावस्या भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितरों का तर्पण, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करना विशेष महत्व रखता है।

कब शुरू होगी हरियाली अमावस्या?

पंचांग के अनुसार, हरियाली अमावस्या की तिथि 12 अगस्त को रात 1 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा। वहीं, साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और 13 अगस्त की रात 1 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भारत में इसका सूतक काल नहीं माना जाएगा।

हरियाली अमावस्या पर क्या करें?

हरियाली अमावस्या के दिन पितरों से जुड़े कार्य और धार्मिक उपाय करने का विशेष महत्व माना जाता है।

पितृदोष और गृहदोष से जुड़े उपाय कर सकते हैं।
दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।
भगवान शिव की पूजा करके घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करने की धार्मिक मान्यता है।
गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है।
जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े और अन्य सामान का दान किया जा सकता है।
ज्योतिष के अनुसार क्या होगा असर?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में पड़ने जा रहा है। कर्क राशि का संबंध जल तत्व से माना जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार इसके कारण जल से जुड़ी प्राकृतिक घटनाओं का प्रभाव बढ़ सकता है।

कुछ ज्योतिषीय आकलनों में प्राकृतिक आपदाओं और भूकंप जैसी घटनाओं की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, ऐसी भविष्यवाणियां ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं, वैज्ञानिक पूर्वानुमान नहीं। राजनीति और सत्ता के क्षेत्र में भी बदलाव की स्थिति बनने की बात कही जा रही है। उच्च पदों पर बैठे लोगों के लिए चुनौतियां बढ़ने और राजनीतिक मतभेद तेज होने की संभावना का ज्योतिषीय दावा किया गया है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, ओडिशा और बंगाल जैसे तटीय राज्यों को लेकर भी ज्योतिषीय आकलन में प्राकृतिक और राजनीतिक हलचल की बातें कही गई हैं।

इन देशों में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह ग्रहण ब्रिटेन, स्पेन, आइसलैंड और ग्रीनलैंड समेत दुनिया के कुछ अन्य हिस्सों में देखा जा सकेगा।

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