motivation

मुण्डकोपनिषद् का यह मंत्र एक आत्मज्ञान की दीपशिखा है, जो साधक के भीतर के समस्त बन्धनों को जला देता है

श्रीसद्गुरु आशीषवचनम् -- "प्रभुश्री की लेखनी से" -- 12 जुलाई, 2025 (शनिवार) भिद्यते हृदयग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसंशयाः। क्षीयन्ते चास्य कर्माणि तस्मिन् दृष्टे…

10 months ago

यह मंत्र आत्मा के उस प्रकाश की अनुभूति है, जो न भीतर है, न बाहर — वह सर्वत्र है

श्रीसद्गुरु आशीषवचनम् -- "प्रभुश्री की लेखनी से" -- 11 जुलाई, 2025 (शुक्रवार) “यः सर्वज्ञः सर्वविद् यस्यैष महिमा भुवि। दिव्ये ब्रह्मपुरे…

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मुण्डकोपनिषद् का यह मंत्र एक उत्कृष्ट रूपक के माध्यम से उस आध्यात्मिक साधना की व्याख्या करता है

श्रीसद्गुरु आशीषवचनम् -- "प्रभुश्री की लेखनी से" -- 07 जुलाई, 2025 (सोमवार) धनुर्गृहीत्वौपनिषदं महास्त्रं शरं ह्युपासा निशितं सन्धयीत । आयम्य…

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भगवद्पादचार्य आद्य शंकराचार्य के अनुसार, ब्रह्म शब्दातीत, अव्यवहित और निर्गुण है

"दक्षिणामूर्ति स्तोत्रम्; ध्यानम्" मौनव्याख्या प्रकटित परब्रह्मतत्त्वं युवानं वर्षिष्ठान्ते वसदृषिगणैः आवृतं ब्रह्मनिष्ठैः। आचार्येन्द्रं करकलितचिन्मुद्रमानन्दरूपं स्वात्मारामं मुदितवदनं दक्षिणामूर्तिमीडे ॥१॥ भगवद्पादचार्य आद्य शंकराचार्य…

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