SYMBOL OF DIGITAL THINKING: डिजिटल सोच के प्रतीक कैसे बने केंद्रीय मेंत्री ‘मनोहर लाल’?
बदलते युग में तकनीक को अपनाना अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। जो व्यक्ति नए संसाधनों और डिजिटल साधनों को अपने जीवन में शामिल कर लेता है, वही समय की दौड़ में आगे दिखाई देता है। केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल इस आधुनिक सोच के प्रतीक बन चुके हैं। उन्होंने उम्र के इस पड़ाव में भी समय की गति के साथ खुद को ढालकर साबित किया है कि नवाचार अपनाने के लिए जोश नहीं, सोच की तरलता जरूरी होती है।
नई दिल्ली में आयोजित हालिया फूड फेस्टिवल में जब मनोहर लाल ने अपने मोबाइल से ही डिजिटल भुगतान किया, तो ये एक सामान्य कार्य नहीं बल्कि संदेश था... “समय डिजीटल है, और हर व्यक्ति को इसके साथ चलना होगा।” ये उनके उसी दृष्टिकोण की झलक थी, जिसने हरियाणा को डिजिटल परिवर्तन की दिशा में अग्रणी बनाया।
अक्टूबर 2014 में जब मनोहर लाल हरियाणा के मुख्यमंत्री बने, तब कई राजनीतिक समीक्षक उनकी कार्यशैली को लेकर संशय में थे। लेकिन उन्होंने बिना सियासी लाभ-हानि की परवाह किए प्रशासनिक सुधार के साहसिक प्रयोग शुरू किए। नोटबंदी के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की बात कही, तब मनोहर लाल हरियाणा में इस मुहिम को जमीनी स्तर पर उतारने वाले पहले मुख्यमंत्री बने। चाहे यात्रा के दौरान चाय का भुगतान हो या टिकट का, उन्होंने हर लेन-देन खुद मोबाइल से किया। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने सहयोगियों और अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि व्यक्तिगत खर्च खुद करें, किसी अन्य से न करवाएं। ये पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता का एक नया मानक था।
प्रधानमंत्री मोदी के “डिजीटल इंडिया” संकल्प को हरियाणा में साकार करने का श्रेय भी मनोहर लाल को जाता है। उन्होंने न केवल सरकारी दफ्तरों में डिजीटल सिस्टम लागू किए, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी ऑनलाइन किया। परिणामस्वरूप भ्रष्टाचार पर रोक लगी, फाइलों की गति बढ़ी, और लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से राहत मिली।
मनोहर लाल ने सचिवालय से लेकर जिलास्तर तक डिजीटल ट्रैक सिस्टम लागू किया, जिससे हर आवेदन की निगरानी पारदर्शी बने रही। इसी के साथ उन्होंने सोशल मीडिया को शिकायत निवारण और जनसंपर्क का प्रभावी माध्यम बनाया। उनके ये डिजिटल प्लेटफार्म सीधे जनता की आवाज बने, जिससे त्वरित समाधान और जनविश्वास दोनों बढ़े।
संघ पृष्ठभूमि से आए मनोहर लाल हमेशा प्रयोगधर्मी रहे हैं। उनका मानना है कि प्रशासन तभी उपयोगी बनता है, जब प्रक्रियाएं सरल और पारदर्शी हों। सी.एल.यू. (Change of Land Use) को मुख्यमंत्री कार्यालय से दूर रखना, ट्रांसफर नीति में सुधार लाना, और हर योजना को ऑनलाइन ट्रैक सिस्टम से जोड़ना… ऐसे अनेक कदम थे जिन्होंने व्यवस्था में ठोस बदलाव लाए। इन प्रयोगों से दोहरा लाभ हुआ, एक ओर भ्रष्टाचार घटा, दूसरी ओर जनता का समय और धन दोनों की बचत हुई। सबसे अहम बात ये रही कि, “बिचौलिया प्रथा” लगभग समाप्त हो गई।
इतना ही नहीं, डिजिटलाइजेशन से जुड़े उनके प्रयासों ने अन्य राज्यों को भी प्रेरित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं कई बार मंचों से मनोहर लाल की प्रशंसा कर चुके हैं, ये कहते हुए कि, हरियाणा ने “डिजीटल इंडिया” की भावना को जमीन पर सफलतापूर्वक उतारा है।
मनोहर लाल ने हर कदम पर डिजिटल जीवनशैली को अपनाने का उदाहरण पेश किया है। चाहे मुख्यमंत्री रहते हुए बिलों का भुगतान स्वयं करना हो या केंद्रीय मंत्री बनने के बाद दिल्ली मेट्रो में डिजिटल टिकटिंग के जरिये यात्रा, वे हर मौके पर समय के साथ कदम मिलाते नजर आते हैं। उनका ये आचरण ये दर्शाता है कि आधुनिकता केवल युवा वर्ग की जरूरत नहीं, बल्कि हर उम्र के व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
आज जब पूरा देश डिजीटल क्रांति के बीच खड़ा है, तो मनोहर लाल जैसे नेता प्रेरणा बनकर सामने आते हैं। उन्होंने ये सिद्ध किया है कि तकनीक तब उपयोगी है, जब उसे व्यवहार में लाया जाए। उनकी सोच ने ये विश्वास जगाया है कि अगर नेतृत्व मजबूती से दिशा तय करे, तो बदलाव असंभव नहीं होता।
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