Swami Prasad Maurya: उत्तर प्रदेश की राजनीति में गरमाया सियासी माहौलSwami Prasad Maurya: उत्तर प्रदेश की राजनीति में गरमाया सियासी माहौल

Swami Prasad Maurya: उत्तर प्रदेश की राजनीति में गरमाया सियासी माहौल

गाजीपुर में अपनी पार्टी राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी ‘ के कार्यकर्ताओं से मुलाकात के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश की मौजूदा योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी नहीं बख्शा। मौर्य ने दोनों दलों को “एक ही थैली के चट्टे-बट्टे” करार देते हुए उन्हें गुंडाराज और जंगलराज का पोषक बताया।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मौजूदा शासन में सबसे बुरी स्थिति नौजवानों की रोजगार व्यवस्था की हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब से भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई है, सरकारी भर्तियों पर रोक सी लग गई है। उन्होंने कहा कि युवाओं की पूरी एक पीढ़ी नौकरी के लिए भटक रही है लेकिन सरकार को उनकी चिंता नहीं है।

उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि योगी सरकार की मंशा गांव के बच्चों को शिक्षा से वंचित करने की है। उन्होंने दावा किया कि गुजरात मॉडल की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी सरकारी शैक्षणिक संस्थानों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा कि, जो व्यक्ति कभी चाय बेचता था, आज वही देश को बेचने पर उतारू हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देश के बंदरगाह, एयरपोर्ट, एयर इंडिया, रेलवे स्टेशन, ट्रेनें और एलआईसी जैसी संस्थाएं कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों, अडानी और अंबानी के हाथों कौड़ियों के दामों पर बेची गई हैं।

मौर्य ने कहा कि, भाजपा सरकार अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करती है। उन्होंने दावा किया कि आज की भाजपा सरकार अराजकता की भेंट चढ़ चुकी है। उन्होंने गाजीपुर की एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि थाने में एक भाजपा कार्यकर्ता की मौत जंगलराज का प्रमाण है। जब सत्ता पक्ष के लोग ही लाठीचार्ज और अत्याचार के शिकार हो रहे हैं, तो आम जनता का क्या हाल होता होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने यह भी ऐलान किया कि उनकी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव को भाजपा सरकार की विदाई का चुनाव बनाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वह इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अभी से कमर कस लें।

मीडिया द्वारा पूछे गए एक सवाल पर मौर्य ने भाजपा नेता संगीत सोम और रामभद्राचार्य के उस बयान पर पलटवार किया जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पाकिस्तान बताया गया था। मौर्य ने कहा कि यदि ऐसा है, तो यह सीधे-सीधे मोदी और योगी की विफलता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब 1100 साल तक मुस्लिम शासक रहे तब हिंदू खतरे में नहीं था, लेकिन अब जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री खुद को हिंदू धर्म के ठेकेदार कहते हैं, तब हिंदू धर्म खतरे में है, यह एक बड़ी विफलता है।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने हिंदू के नाम पर राजनीति की, वे आज हिंदुओं का ही पलायन नहीं रोक पा रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज देश के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने का कार्य सरकार खुद कर रही है।

अखिलेश यादव के बयान “बीजेपी जाए तो न्याय मिले” पर कटाक्ष करते हुए मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों मौका परस्त राजनीति के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में भी गरीबों की जमीनों पर कब्जा, महिलाओं के साथ अपराध, लूटपाट और अत्याचार होते थे। वही स्थिति आज भाजपा सरकार में भी है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में हर दिन कई जिलों में एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगों की हत्याएं हो रही हैं, महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन सरकार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण देने में लगी हुई है।

उन्होंने कहा कि आज की स्थिति बेहद चिंताजनक है और यदि यही हालात बने रहे तो आने वाले समय में प्रदेश की स्थिति और भी खराब हो सकती है। उनकी पार्टी इस लड़ाई को 2027 में निर्णायक मोड़ तक ले जाने के लिए संकल्पबद्ध है।

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