रांची में छात्रों का आंदोलन तेज, सोनम वांगचुक के कहने पर देवेंद्र महतो ने पिया पानी

झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी, जेएसएससी, सीजीएल और दूसरी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे इस प्रदर्शन का आज 12वां दिन है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जेएलकेएम के केंद्रीय उपाध्यक्ष देवेंद्र नाथ महतो कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

देवेंद्र महतो ने पहले कहा था कि वे अपना अनशन तभी खत्म करेंगे, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक खुद रांची आकर उनसे मुलाकात करेंगे। इसी बीच सोनम वांगचुक ने फोन पर उनसे बात की और उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई। उन्होंने महतो से कहा कि आंदोलन को लंबा चलाने के लिए शरीर का स्वस्थ रहना भी जरूरी है। उन्होंने शहद और पानी लेने की सलाह दी, जिसके बाद देवेंद्र महतो पानी पीने के लिए तैयार हो गए।

फोन पर हुई बातचीत में देवेंद्र महतो ने सोनम वांगचुक के प्रति सम्मान जताते हुए उनसे रांची आने का अनुरोध किया। इस पर वांगचुक ने भरोसा दिलाया कि वे जल्द ही आंदोलन का समर्थन करने रांची पहुंचेंगे। उन्होंने यह भी समझाया कि अनशन का उद्देश्य खुद को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सरकार तक अपनी बात मजबूती से पहुंचाना है। उन्होंने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी अनशन के दौरान पानी और नींबू जैसी चीजों का सेवन करते थे ताकि शरीर को ऊर्जा मिलती रहे।

यह आंदोलन सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और युवाओं को न्याय दिलाने की मांग को लेकर किया जा रहा है। बड़ी संख्या में छात्र लगातार प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हैं और अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?

देवेंद्र नाथ महतो रांची जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई बुंडू से की और बाद में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे संस्कृत, कुरमाली और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में परास्नातक हैं तथा बीएड की पढ़ाई भी पूरी कर चुके हैं। वर्ष 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने तमाड़ सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।

महतो लंबे समय से छात्र हितों से जुड़े आंदोलनों में सक्रिय हैं। वर्ष 2015 से वे भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं। बताया जाता है कि छठी जेपीएससी परीक्षा को लेकर हुए आंदोलन के दौरान उनकी मां का निधन भी हो गया था। इस बीच कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने भी छात्रों के इस आंदोलन को अपना समर्थन देने की घोषणा की है।

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By admin