दिल्ली

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन में स्टाफ शॉर्टेज से हड़कंप, इंडिगो फ्लाइट क्राइसिस की 4 दिन में 1200 उड़ानें रद्द

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन में स्टाफ शॉर्टेज से हड़कंप

 

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के सामने आई अभूतपूर्व फ्लाइट संकट के बाद केंद्र सरकार बैकफुट पर आ गई है। पिछले 4 दिनों में 1,200 से ज्यादा उड़ानें रद्द होने और हजारों यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ने के बाद आखिरकार DGCA को अपना नया नियम वापस लेना पड़ा है। ये वही नियम था, जिसकी वजह से इंडिगो में पायलटों और क्रू की भारी कमी पैदा हो गई थी।

शुक्रवार देर शाम DGCA ने एक नोटिस जारी करते हुए बताया कि, 1 नवंबर से लागू किए गए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन के दूसरे फेज को अभी के लिए स्थगित किया जा रहा है। DGCA के मुताबिक, नए नियमों के कारण एयरलाइंस के लिए क्रू शेड्यूलिंग मैनेज करना मुश्किल हो गया था और इससे लगातार फ्लाइट ऑपरेशन बाधित हो रहे थे। इसलिए, नियमों में ढील देना जरूरी हो गया।

दरअसल DGCA ने जुलाई में FDTL का पहला फेज लागू किया था, और दूसरा फेज 1 नवंबर से लागू हुआ था। दूसरे फेज के तहत एयरलाइंस को पायलटों और केबिन क्रू को हफ्ते में 48 घंटे आराम देना अनिवार्य था। साथ ही इस दौरान किसी भी तरह की छुट्टी को वीकली रेस्ट में शामिल करने पर रोक लगाई गई थी। इसका सीधा मतलब था कि, कंपनियों को हफ्ते में कम से कम दो दिन क्रू को पूरी तरह ऑफ देना पड़ेगा।

इसके अलावा, नए नियमों में लगातार नाइट शिफ्ट पर पाबंदी लगा दी गई। पायलटों के उड़ान भरने की सीमा घटाकर रोज 8 घंटे कर दी गई। नाइट लैंडिंग की सीमा 6 से घटाकर 2 कर दी गई। वहीं क्रू को हर 24 घंटे में कम से कम 10 घंटे रेस्ट देना अनिवार्य कर दिया गया।

ये बदलाव भले ही सुरक्षा और क्रू की वेल-बीइंग के लिए थे, लेकिन ऑपरेशन के लिहाज से कंपनियों के लिए ये भारी पड़ गया।

इंडिगो न सिर्फ देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन है, बल्कि भारत की कुल घरेलू उड़ानों में से लगभग 60% अकेले ऑपरेट करती है। वर्तमान में इंडिगो के पास 434 विमान, 2300 से ज्यादा दैनिक उड़ानें, 5456 पायलट, 10212 केबिन क्रू और कुल 41 हजार से अधिक कर्मचारी हैं।

इतने बड़े नेटवर्क में अगर केवल 10–20% उड़ानें भी रद्द या देरी से चलें तो इसका असर सीधे 2–4 लाख यात्रियों पर पड़ता है। यही कारण है कि, पिछले 4 दिनों से देशभर के एयरपोर्ट्स पर लंबी लाइनों, यात्रियों के विरोध और अचानक बढ़ते किरायों जैसी समस्याएं दिखाई दीं।

DGCA ने भी स्वीकार किया कि, इंडिगो में इस समय क्रू की भारी कमी है, और पिछले महीने से यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ रही थी।नवंबर महीने में ही 1232 उड़ानें रद्द हुईं और सिर्फ एक दिन, यानी मंगलवार को 1400 से अधिक उड़ानें देरी से चलीं।

इंडिगो का कहना है कि, नए नियमों ने उनके शेड्यूल को पूरी तरह बिगाड़ दिया। फ्लाइट टाइम घटने, नाइट लैंडिंग सीमित होने और अनिवार्य रेस्ट बढ़ जाने की वजह से पायलटों और क्रू मेंबर्स का एक बड़ा हिस्सा ऑपरेशन के लिए उपलब्ध ही नहीं रहा।

इतने बड़े नेटवर्क में स्टॉफ की ऐसी अचानक अनुपलब्धता सीधे फ्लाइट ऑपरेशन को प्रभावित करती है। स्थिति ये हो गई कि, कई रूट्स पर एक ही दिन में दर्जनों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिससे हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों पर गहरा असर पड़ा।

नियमों का मकसद सुरक्षा था, लेकिन उनका प्रभाव उल्टा साबित हुआ। जहां सुरक्षा बढ़नी चाहिए थी, वहां एयरलाइन का संचालन ही चरमरा गया। इंडिगो के बड़े नेटवर्क का असर बाकी एयरलाइंस पर भी पड़ने लगा। इसके बाद केंद्र सरकार और DGCA पर दबाव बढ़ गया कि, ऑपरेशन्स को सामान्य किया जाए। अंततः सरकार ने माना कि, अगर नियम तुरंत लागू रहे तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

DGCA ने स्पष्ट किया है कि, निर्णय वापस लेने का मतलब ये नहीं कि, नए नियम रद्द कर दिए गए हैं। उन्हें फिलहाल रोककर एयरलाइंस को ऑपरेशनल राहत दी गई है। अब DGCA, मंत्रालय और एयरलाइंस मिलकर नए नियमों पर चर्चा करेंगे ताकि सुरक्षा और ऑपरेशन—दोनों का संतुलन बना रहे।

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