मेरठ में बीए छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर कलेक्ट्रेट पर हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडेय ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की और कुछ लोगों द्वारा जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश की गई।
एसएसपी के अनुसार, छात्रा की हत्या के विरोध में विभिन्न संगठनों और लोगों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर दिया था। प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम होने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग किया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया।
इस बीच एक और घटना सामने आई, जिसमें हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति ने पुलिस वाहन के अंदर आत्महत्या का प्रयास किया। जानकारी मिलने के बाद एसएसपी खुद मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। उन्होंने बताया कि समय रहते हस्तक्षेप करने से बड़ी घटना टल गई।
अविनाश पांडेय ने कहा कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि प्रदर्शन के पीछे केवल न्याय की मांग नहीं थी, बल्कि कुछ लोग माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ व्यक्तियों ने लोगों को भड़काकर आंदोलन को उग्र रूप देने का प्रयास किया।
पुलिस का दावा है कि पीड़ित परिवार से बातचीत के दौरान परिजन पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नजर आए थे। हालांकि बाद में कुछ लोगों के हस्तक्षेप के बाद प्रदर्शन ने बड़ा रूप ले लिया। पुलिस अब उन लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन पर भीड़ को उकसाने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने का आरोप है।
मामले में पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इसके अलावा 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस वीडियो फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर बाकी आरोपियों की पहचान करने में जुटी हुई है।
एसएसपी ने स्पष्ट किया कि जिले की शांति और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक या भड़काऊ कंटेंट पर भी नजर रखी जा रही है और साइबर टीम पूरे मामले की निगरानी कर रही है।
