कलकत्ता
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम हुआ है। नंदीग्राम से कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। कल ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दिए जाने के बाद गिरफ्तारी की गई थी। अब इस मामले में अदालत ने कांग्रेस प्रत्याशी को 3 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। बता दें, पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए 6 अक्तूबर को वोटिंग होगी।
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा उप चुनाव के लिए ममता गुट की तरफ से पहले संचिता प्रधान डे ने नामांकन दाखिल किया था। लेकिन शुक्रवार को सीएम शुभेंदु अधिकारी के साथ मुलाकात करने के बाद संचिता ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने खुलकर कांग्रेस प्रत्याशी को अपना समर्थन देने का ऐलान किया। हालांकि, कुछ देर बाद ही कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को एक 2007 के मर्डर के केस में गिरफ्तार कर लिया गया। ममता बनर्जी और कांग्रेस ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाया और इसे भाजपा की बदले की राजनीति करार दिया।
प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर पीटीआई से बात करते हुए एक पुलिस अधिकारी ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया, "प्रधान को 2007 में दर्ज चार मामलों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था… ये मामले दंगा, हत्या और आपराधिक धमकी से जुड़े हैं। इनमें तीन नंदीग्राम और एक खेजुरी थाने में दर्ज मामले शामिल हैं। ये मामले भारतीय दंड संहिता (IPC) और शस्त्र अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज किए गए थे। उन्हें आज हल्दिया के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।''
फरार थे मिलन प्रधान- पश्चिम बंगाल पुलिस
पश्चिम बंगाल पुलिस ने शनिवार को कहा कि प्रधान ''फरार'' थे और उन्हें काफी समय से लंबित चार गैर-जमानती वारंट के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। राज्य पुलिस ने एक बयान में कहा, ''गिरफ्तार व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मामलों में हत्या, हत्या की कोशिश, हत्या के इरादे से अपहरण, सबूत मिटाना, घर में जबरन घुसना और घातक हथियारों का इस्तेमाल कर दंगा करने जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। कुछ मामलों में शस्त्र अधिनियम के प्रावधान भी लगाए गए हैं।''
पुलिस ने कहा, ''प्रधान 2007 से फरार थे और इन मामलों में उन्हें फरार घोषित करते हुए आरोप-पत्र दायर किया गया था। वारंट तामील करने के संबंध में पूर्व में बार-बार किए गए प्रयास विफल रहने और समय-समय पर अदालतों में वारंट तामील नहीं होने की रिपोर्ट दी जाती रही है।'' पुलिस ने बताया कि यह गिरफ्तारी काफी समय से लंबित गैर-जमानती वारंट को तामील कराने के लिए चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान की गई।
नंदीग्राम उप चुनाव के दौरान ही क्यों किया गया गिरफ्तार?
पुलिस के अनुसार, ''चुनाव और उपचुनाव के दौरान भारत निर्वाचन आयोग की ओर से इस तरह की कार्रवाई के लिए स्थायी निर्देश जारी होते हैं। एक विशेष अभियान के तहत इन निर्देशों का पालन करते हुए प्रधान की गिरफ्तारी होना एक कानूनी कार्रवाई है।''
प्रधान को उस समय गिरफ्तार किया गया, जब पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छह अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस को अपनी पार्टी का समर्थन देने की घोषणा की थी, क्योंकि उनके उम्मीदवार ने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया था। प्रधान की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष शुभांकर सरकार ने कहा कि पार्टी को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया और उन्हें कहां रखा गया है। सरकार ने शुक्रवार शाम कहा, ''हमें पता चला कि उन्हें हत्या के एक मामले में हिरासत में लिया गया है, लेकिन हमें इसके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। मिलन (प्रधान) उन नेताओं में शामिल थे, जो नंदीग्राम आंदोलन में सबसे आगे थे और उनपर कई मामले दर्ज किए गए थे। लेकिन, आज उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?''
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