संपत सिंह ने कांग्रेस से दिया इस्तीफासंपत सिंह ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा

संपत सिंह ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा

 

हरियाणा के सीनियर नेता और पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने रविवार को कांग्रेस से इस्तीफा देकर राज्य की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। 48 साल पहले ताऊ देवीलाल के साथ राजनीति की शुरुआत करने वाले संपत सिंह ने एक बार फिर उसी परिवार की ओर रुख करने के संकेत दिए हैं।

15 साल तक कांग्रेस में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने अचानक पार्टी छोड़ दी। ऐसा माना जा रहा है कि, अब वे इनेलो में दोबारा शामिल हो सकते हैं

संपत सिंह ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा है, जिसकी प्रति राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, बीके हरिप्रसाद और हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र को भी भेजी गई है।

खास बात ये है कि, उन्होंने अपने इस्तीफे में भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नाम एक बार भी नहीं लिया, जबकि वे लंबे समय तक हुड्डा खेमे के करीबी माने जाते थे।

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दरअसल संपत सिंह ने अपने इस्तीफे में लिखा कि, अब उन्हें कांग्रेस की उस क्षमता पर भरोसा नहीं रहा जो हरियाणा की जनता के हितों का सही प्रतिनिधित्व कर सके।

उन्होंने कहा कि, “मैं एक गर्वित हरियाणवी हूं, अपने प्रदेश की जनता को निराश नहीं कर सकता। कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व में मेरा विश्वास खत्म हो गया है, इसलिए मैं पार्टी छोड़ने के लिए विवश हूं

उन्होंने सांसद कुमारी सैलजा की भी जमकर तारीफ की और उन्हें पार्टी के भीतर “प्रताड़ित” बताया। जिसके जरिए उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से हुड्डा खेमे पर निशाना साधा। सूत्रों के मुताबिक लंबे समय से पार्टी में उनकी अनदेखी की जा रही थी और टिकट बंटवारे को लेकर वे नाराज चल रहे थे।

आपको बता दें कि, 1977 में जाट कॉलेज हिसार में प्रोफेसर रहते हुए ताऊ देवीलाल की नजर संपत सिंह पर पड़ी थी। देवीलाल ने उन्हें राजनीति में आने का प्रस्ताव दिया और वहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा शुरू हुई।

देवीलाल ने उन्हें फतेहाबाद की भट्टू सीट से चुनाव लड़वाया था, जिसे वे जीतने में सफल रहे। बाद में भट्टू सीट टूटने के बाद उन्होंने नलवा विधानसभा से चुनाव लड़ा और पूर्व मुख्यमंत्री चौ. भजनलाल की पत्नी जसमा देवी को हराया।

संपत सिंह अब तक 6 बार विधायक रह चुके हैं और दो बार हरियाणा के वित्त मंत्री भी रहे हैं। वे 32 साल तक चौटाला परिवार के साथ इनेलो में रहे, लेकिन 2009 में हिसार से लोकसभा चुनाव हारने के बाद पार्टी से उनका मोहभंग हो गया था।

कांग्रेस में रहते हुए भी संपत सिंह हाल के दिनों में लगातार इनेलो नेताओं के संपर्क में थे। वे 25 सितंबर को रोहतक में आयोजित ताऊ देवीलाल जयंती रैली में शामिल हुए थे,

जहां उन्होंने इनेलो अध्यक्ष अभय चौटाला की खुलकर प्रशंसा की थी। साथ ही ओमप्रकाश चौटाला के निधन के बाद अस्थि कलश यात्रा में हिसार से उन्होंने यात्रा का नेतृत्व किया था।

सूत्रों के मुताबिक, दो दिन पहले उन्होंने अपने हिसार स्थित आवास पर समर्थकों की एक गुप्त बैठक बुलाई थी, जिसमें कांग्रेस छोड़ने का फैसला लगभग तय कर लिया गया था। अब चर्चा है कि, वे जल्द ही इनेलो में औपचारिक रूप से शामिल हो सकते हैं।

संपत सिंह का कांग्रेस छोड़ना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर हिसार और फतेहाबाद क्षेत्रों में, जहां उनकी पकड़ मजबूत रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका इनेलो में जाना अभय चौटाला को सियासी मजबूती देगा और कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

हरियाणा में विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी अब खुलकर सामने आ रही है। ऐसे में संपत सिंह का ये कदम आने वाले महीनों में प्रदेश की राजनीति की दिशा बदल सकता है।

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