संभल मस्जिद में पेंटिंग की इजाजत नहींसंभल मस्जिद में पेंटिंग की इजाजत नहीं

उत्तर प्रदेश के संभल स्थित विवादित जामा मस्जिद की रंगाई पुताई के लिए मुस्लिमों की याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन्हें बड़ा झटका दे दिया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि फिलहाल, कथित जामा मस्जिद की केवल सफाई की जा सकती है, उसकी रंगाई और पुताई की किसी को भी अनुमति नहीं है। कोर्ट ने ये फैसला एएसआई की रिपोर्ट पर सुनाया है।

मुस्लिम पक्ष ने की थी  विवादित मस्जिद की रंगाई पुताई की मांग

दरअसल मुस्लिम पक्ष ने विवादित मस्जिद की रंगाई पुताई के लिए संभल जिला प्रशासन से अनुमति मांगी थी। इस पर जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने इससे इंकार करते हुए स्पष्ट किया था कि इस पर फैसला लेने का अधिकार केवल एएसआई को है। इस पर मुस्लिम पक्ष इलाहाबाद हाई कोर्ट चला गया और मांग की कि रमजान से पहले उसे रंगाई पुताई की इजाजत दी जाए। कोर्ट ने कथित मस्जिद के मुतवल्ली और एएसआई के तीन अफसरों की एक कमेटी बनाकर उन्हें तुरंत ढांचे का निरीक्षण करने का आदेश दिया। बाद में एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर अपना फैसला सुनाया। एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि फिलहाल वहां किसी भी तरह की रंगाई-पुताई की आवश्यकता नहीं है।

अगली सुनवाई मंगलवार यानी 4 मार्च को होगी

दरअसल, संभल मस्जिद समिति की तरफ से इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक सिविल रिवीजन याचिका दाखिल हुई थी। इसमें मस्जिद में रंगाई-पुताई कराने की अनुमति मांगी गई थी। इस पर कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। बहरहाल, जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने मस्जिद कमेटी को एएसआई रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करने के लिए मंगलवार तक का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार यानी 4 मार्च को होगी। गुरुवार को जब इस मामले में सुनवाई शुरू हुई।

हिंदू पक्ष ने किया रंगाई पुताई का विरोध

प्रतिवादी पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने इस याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि इस याचिका की आड़ में मस्जिद कमेटी हिंदू मंदिर के प्रतीक और चिह्नों को बिगाड़ देगी। वहीं दूसरी ओर, एएसआई को इस स्थल के रखरखाव की अनुमति है। वहीं हिंदू संगठनों ने मस्जिद की रंगाई-पुताई के लेकर अपना विरोध भी दर्ज करवाया था। हिंदू संगठन सनातन सेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर रंगाई-पुताई शुरू हुई तो आगे विवाद बढ़ेगा। यहां तक की हिंदू संगठनों का दावा है कि फिर हिंसा की कोशिश की जा रही है।

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