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बेनीवाल के बयान पर बवाल, नागौर में गरजे स्वाभिमान के स्वर

बेनीवाल के बयान पर बवाल, नागौर में गरजे स्वाभिमान के स्वर

राजस्थान की राजनीति में इन दिनों टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल के एक विवादित बयान के बाद क्षत्रिय करणी सेना ने 8 जून को नागौर में एक महारैली आयोजित करने का ऐलान किया है। लेकिन अब इस रैली को लेकर खुद राजपूत समाज दो भागों में बंटता नज़र आ रहा है। एक ओर जहां करणी सेना इसे स्वाभिमान की लड़ाई बता रही है, वहीं नागौर राजपूत समाज के कुछ वर्गों ने इस रैली का विरोध करते हुए प्रशासन से इसे रोकने की मांग की है।

विवाद की शुरुआत हुई नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के उस बयान से, जिसमें उन्होंने इतिहास से जुड़ी कुछ बातों को लेकर टिप्पणी की थी। यह बयान क्षत्रिय करणी सेना को नागवार गुज़रा और संगठन ने इसका विरोध करने के लिए नागौर में 8 जून को महासम्मेलन करने की घोषणा कर दी। करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष राज शेखावत पिछले एक सप्ताह से नागौर जिले के विभिन्न गांवों का दौरा कर रहे हैं और समाज के लोगों से रैली में भाग लेने की अपील कर रहे हैं।

लेकिन इसी बीच नागौर के कई प्रमुख राजपूत नेताओं और संगठनों ने इस महारैली को लेकर ऐतराज़ जताया है। उनका कहना है कि यह रैली जिले की सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचा सकती है। नागौर राजपूत समाज की ओर से जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर साफ कहा गया है कि वे इस आयोजन का समर्थन नहीं करते। साथ ही यह आशंका भी जताई गई है कि यदि रैली आयोजित होती है तो जिले में जातीय तनाव फैल सकता है और सरकारी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।

करणी सेना की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि वे किसी भी हालत में पीछे नहीं हटेंगे। संगठन ने कहा है कि कुछ लोग बेनीवाल के साथ मिलकर रैली को रोकने की साज़िश रच रहे हैं, लेकिन उनका आंदोलन पूरी ताकत के साथ होगा। उनका दावा है कि यह केवल हनुमान बेनीवाल के बयान का विरोध नहीं, बल्कि पूरे समाज के स्वाभिमान की लड़ाई है।

स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए नागौर प्रशासन ने ऐहतियाती कदम उठाए हैं। जिला कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने नागौर जिले में धारा 163 लागू कर दी है। इस धारा के तहत किसी भी प्रकार की सभा, प्रदर्शन या सामूहिक आयोजन पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रशासन को आशंका है कि करणी सेना और तेजवीर सेना द्वारा एक ही दिन में अलग-अलग स्थानों पर बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा करने की कोशिश की जा रही है, जिससे हालात बिगड़ सकते हैं।

विवाद का असर अब सोशल मीडिया पर भी दिखाई देने लगा है। विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ तीखी टिप्पणियां की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर इस विषय से जुड़ी पोस्ट्स में भाषा की मर्यादा पार होती दिख रही है, जिससे समाज में और अधिक तनाव फैलने की आशंका बढ़ गई है। प्रशासन सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के ज़रिए स्थिति पर नजर रखे हुए है।

अब जब 8 जून को रैली होने वाली है और नागौर का माहौल पहले से ही संवेदनशील बन चुका है, ऐसे में प्रशासन के लिए चुनौती है कि वह शांति बनाए रखे। हनुमान बेनीवाल के बयान से उठी यह चिंगारी कहीं जिले में आग का रूप न ले ले। फिलहाल सभी की निगाहें 8 जून पर टिकी हैं।

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