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UK के टूटने का खतरा! स्कॉटलैंड से नॉर्दर्न आयरलैंड तक क्यों उठी आजादी की मांग?

लंदन 

यूनाइटेड किंगडम फिर टूटने की कगार पर पहुंच गया है. स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड आजादी के लिए आवाज उठा रहे हैं. इसके लिए जनमत संग्रह कराने की तैयारी चल रही है. खासतौर से ये चर्चा इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि तीनों ही देशों के नेता वेल्स की राजधानी कार्डिफ में मिलने वाले है. इससे पहले हुए सर्वेक्षणों में स्कॉटलैंड में आजादी के पक्ष में 45 प्रतिशत, नॉर्दन आयरलैंड में तकरीबन 36 प्रतिशत लोग आजादी के समर्थन में रहे हैं। 

दुनिया के नक्शे पर यूनाइटेड किंगडम यानी यूके एक मजबूत और सबसे पुराना राजनीतिक यूनियन है. इसमें इंग्लैंड, स्कॉटलैंड वेल्स और उत्तरी आयरलैंड हैं. मगर अब इसके टूटने का खतरा मंडरा रहा है. इंग्लैंड के साथी तीनों देश आजादी मांग रहे हैं. मगर सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों है? सैंकड़ों साल का ये साथ अब छूटने की कगार पर क्यों पहुंच गया है। 

कैसे बना यूके?
1707 में एक्ट ऑफ यूनियन के बाद इंग्लैंड और स्कॉटलैंड एक राजनीतिक यूनियन में आए थे. स्कॉटलैंड यूके का हिस्सा तो बना था, मगर उसने अपनी अलग कानूनी और शैक्षणिक व्यवस्था की पहचान को बरकरार रखा. वेल्स इससे पहले ही यूके का हिस्सा बन चुका था. आयरलैंड की कहानी इससे अलग है. ब्रिटिश शासन के खिलाफ आयरिश राष्ट्रवाद लंबे समय तक मजबूत होता रहा. 20 वीं सदी में आयरलैंड दो हिस्सों में बंटा. नॉर्दर्न आयरलैंड यूके में बना रहा, जबकि शेष आयरलैंड आजादी के रास्ते पर आगे बढ़ा। 

स्कॉटलैंड यूके से अलग क्यों होना चाहता है?
स्कॉटलैंड की आजादी की मांग कोई नई बात नहीं है. यहां लंबे समय से स्कॉटिश नेशनल पार्टी इस मुद्दे को उठाती रही है. इसके पीछे कई कारण हैं. दरअसल स्कॉटलैंड की अपनी ऐतिहासिक पहचान है. उसकी अलग कानूनी व्यवस्था, शिक्षा प्रणाली हैं. स्वतंत्रता समर्थकों का तर्क है कि जब स्कॉटलैंड की अपनी अलग पहचान है तो उसे अपना भविष्य तय करने का अधिकार होना चाहिए। 

एक बड़ा मुद्दा यह भी है कि स्कॉटलैंड के मतदाता कई बार जिस राजनीतिक दिशा में वोट करते हैं, लंदन की UK सरकार उससे अलग फैसला लेती है. इसका सबसे बड़ा उदारहण ब्रेक्सिट को बताया जाता है. 2016 के ब्रेक्सिट जनमत संग्रह में स्कॉटलैंड के अधिकांश लोगों ने यूरोपीय संघ में बने रहने के पक्ष में मतदान किया था, लेकिन ब्रिटेन इससे बाहर चला गया। 

2014 में क्या हुआ था?
स्कॉटलैंड में UK से अलग होने को लेकर पहले ही जनमत संग्रह हो चुका है. 18 सितंबर 2014 को लोगों से पूछा गया था कि क्या स्कॉटलैंड एक स्वतंत्र देश होना चाहिए? इसमें आजादी के खिलाफ 55.3 प्रतिशत लोगों ने वोट किया था, जबकि आजादी के पक्ष में महज 44.7 प्रतिशत लोग थे. हालांकि स्कॉटलैंड की आजादी के समर्थक ऐसा मानते हैं कि अब हालात बदल चुके हैं. खासतौर से ब्रेक्सिट के बाद जनता से राय लेने का मौका मिलना चाहिए। 

दूसरा जनमत संग्रह क्यों नहीं हो रहा?
स्कॉटलैंड की सरकार और आजादी के समर्थक दोबारा जनमत संग्रह की मांग करते रहे हैं, लेकिन यूके सरकार इसकी अनुमति नहीं देती. मामला ब्रिटेन की सर्वोच्च अदालत तक भी पहुंच चुका है. यूके सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि आजादी एक संवैधानिक मुद्दा है, जिस पर यूके की संसद ही फैसला ले सकती है. इसलिए स्कॉटिश संसद के लिए वेस्टमिंस्टर की मंजूरी के बिना जनमत संग्रह कराना आसान नहीं है. यानी लोग क्या चाहते हैं इसके बारे में तभी पता किया जा सकता है जब सरकार इसके बारे में चाहे। 

नॉर्दन आयरलैंड की कहानी क्या है?
स्कॉटलैंड के पास चॉइस है कि वह यूके में रहना चाहता है या आजाद होना चाहता है, जबकि नॉर्दन आयरलैंड के सामने सवाल ये है कि उसे यूके में रहना है या आयरलैंड रिपब्लिक में जुड़ना है. उत्तरी आयरलैंड में इसे लेकर दो विचारधारा हैं. कुछ लोगों का मानना है कि इसे यूके का ही हिस्सा रहना चाहिए, जबकि एक बड़े वर्ग का मानना है कि इसे आयरलैंड गणराज्य का ही हिस्सा होना चाहिए. इसे लेकर दशकों से विवाद रहा है, जिसकी शुरुआत 1960 में शुरू हुई थी जो 1990 तक चली. इसे द ट्रबल्स भी कहा जाता है. इस दौरान दोनों पक्षों में हिंसा हुई. 1998 में एक गुड फ्राइडे एग्रीमेंट हुआ जो आयरलैंड का भविष्य तय करता है। 

क्या था गुड फ्राइडे एग्रीमेंट?
10 अप्रैल 1998 को हुए इस ऐतिहासिक समझौते में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत तय किया गया. इसमें ये तय किया गया कि नॉर्दन आयरलैंड यूके का हिस्सा तब तक रहेगा जब तक वहां की आबादी ऐसा चाहती है. अगर जनमत संग्रह में लोग आयरलैंड रिपब्लिक के साथ जाना चाहेंगे तो नॉर्दर्न आयरलैंड यूके से बाहर आ सकता है. हाल ही में इसे लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है. हालांकि ये नहीं कहा जा सकता है कि सच में नॉर्दन आयरलैंड के लोग आयरलैंड रिपब्लिक से जुड़ना चाहते हैं या नहीं। 

 

News Desk

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