राजस्थान

राजस्थान बॉर्डर पर पाकिस्तानी ड्रोन से गिराया गया RDX! पंजाब चुनाव में गड़बड़ी या बड़े धमाके की साजिश? जांच में चौंकाने वाले सुराग

श्रीगंगानगर: राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास हथियारों और संदिग्ध RDX की बड़ी खेप बरामद होने से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। पाकिस्तान की ओर से आए संदिग्ध ड्रोन के जरिए विस्फोटक और हथियार गिराए जाने के मामले में पंजाब के दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में सीमा पार से हथियारों की तस्करी और संभावित बड़ी साजिश के संकेत मिले हैं। हालांकि, इस खेप का वास्तविक इस्तेमाल कहां और किस उद्देश्य से किया जाना था, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन विस्फोटकों का इस्तेमाल राजस्थान में किसी बड़ी वारदात के लिए होना था या फिर पंजाब में आगामी चुनावों के दौरान अशांति फैलाने की योजना थी? सुरक्षा एजेंसियां दोनों संभावनाओं सहित अन्य पहलुओं की जांच कर रही हैं।

रावला मंडी के खेत में ड्रोन से गिराए गए तीन पैकेट
यह मामला श्रीगंगानगर जिले के रावला मंडी क्षेत्र की 12 केएनडी ग्राम पंचायत से जुड़ा है। यहां अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक एक खेत में ड्रोन के जरिए तीन संदिग्ध पैकेट गिराए जाने की सूचना मिली थी।

सूचना के बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF), राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। शुरुआत में एजेंसियों को आशंका थी कि पैकेटों में नशीले पदार्थ हो सकते हैं, लेकिन तलाशी के दौरान हथियार और विस्फोटक सामग्री मिलने से मामले की गंभीरता बढ़ गई।

7 किलो से ज्यादा विस्फोटक और विदेशी पिस्टल बरामद
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बरामद खेप में करीब 7 से 7.7 किलोग्राम संदिग्ध प्लास्टिक विस्फोटक, दो पिस्टल, चार मैगजीन, सैकड़ों कारतूस, बैटरियां और रिमोट कंट्रोल जैसे उपकरण शामिल हैं।

कुछ रिपोर्टों में पिस्टल पर तुर्किये में निर्मित होने की मार्किंग मिलने का भी उल्लेख है। विस्फोटक के RDX होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, बरामद कारतूसों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है और विस्फोटक की अंतिम फॉरेंसिक पहचान की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

मजदूरी के बहाने पहुंचे आरोपी, इलाके में रेकी का शक
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लखविंदर सिंह और सुखविंदर सिंह के रूप में हुई है। दोनों पंजाब से जुड़े बताए जा रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी मजदूरी करने के बहाने सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंचे थे। संदेह है कि उन्होंने कई दिनों तक इलाके की रेकी की और ड्रोन से गिराए जाने वाले पैकेट हासिल करने की तैयारी की।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों को सीमा तक किसने पहुंचाया, उन्हें खेप की जानकारी कैसे मिली और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।

फिरोजपुर के कथित हैंडलर और पाकिस्तान कनेक्शन की जांच
मामले में सीमा पार संचालित नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों को पंजाब के फिरोजपुर जिले के एक कथित हैंडलर के निर्देश पर विस्फोटक सामग्री लेने भेजे जाने का संदेह है।

रिपोर्ट में पाकिस्तान में मौजूद ‘उमर चाचा’ नाम के एक संदिग्ध व्यक्ति का भी उल्लेख किया गया है। आशंका है कि इस नेटवर्क के जरिए हथियारों की खेप राजस्थान की सीमा से भारत में पहुंचाई जा रही थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सामग्री को रावला से अनूपगढ़ ले जाने की योजना थी।

हालांकि, इन कथित संपर्कों और पूरे नेटवर्क की भूमिका की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

जलालाबाद ग्रेनेड हमले से भी जुड़ रहे तार?
इस मामले में गिरफ्तार सुखविंदर सिंह को लेकर एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर में पंजाब के जलालाबाद पुलिस थाने पर हुए ग्रेनेड हमले की जांच में भी उसका नाम सामने आया था।

बताया जा रहा है कि उस मामले में पकड़े गए एक अन्य संदिग्ध ने पूछताछ के दौरान सुखविंदर का नाम लिया था। हालांकि, वर्तमान मामले और जलालाबाद हमले के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पंजाब चुनाव या राजस्थान में बड़ी वारदात, क्या था असली मकसद?
इस बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और हथियार आखिर किसके लिए भेजे गए थे।

क्या इस खेप का संबंध पंजाब में आगामी चुनावों के दौरान हिंसा फैलाने की किसी योजना से था? क्या राजस्थान में किसी महत्वपूर्ण स्थान को निशाना बनाने की तैयारी थी? या फिर हथियारों को किसी अन्य आपराधिक नेटवर्क तक पहुंचाया जाना था?

फिलहाल ये सभी जांच से जुड़े सवाल हैं। किसी विशेष चुनाव, राजनीतिक दल, व्यक्ति या स्थान को निशाना बनाने की योजना की पुष्टि नहीं हुई है।

NIA, ATS और अन्य सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटीं
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), एटीएस और सीआईडी सहित अन्य एजेंसियों की भूमिका की खबरें सामने आई हैं। राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स, बीएसएफ और स्थानीय पुलिस भी मामले की जांच कर रही हैं।

एएनटीएफ के महानिरीक्षक विकास कुमार के अनुसार, एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि विस्फोटक सामग्री किसने भेजी और उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था।

बरामदगी के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई गई है। संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखने के साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है।

ड्रोन के जरिए तस्करी बनी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती
भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थों, हथियारों और अन्य प्रतिबंधित सामग्री की तस्करी पहले भी सामने आती रही है। लेकिन श्रीगंगानगर में विस्फोटक सामग्री और हथियारों की एक साथ बरामदगी ने सीमा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा की हैं।

यह मामला सिर्फ हथियारों की बरामदगी तक सीमित नहीं है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि सीमा पार से सामग्री भेजने वाले लोग कौन थे, भारत में उनके संपर्क कहां तक फैले थे और बरामद खेप का अंतिम ठिकाना क्या था।

फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों की जांच जारी है। आने वाले दिनों में आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर इस पूरे मामले की नई जानकारियां सामने आ सकती हैं।

Deepak Arora

दीपक अरोड़ा एक मीडिया उद्यमी, डिजिटल रणनीतिकार और लेखक हैं। "दीपक की कलम से" के माध्यम से वे राजनीति, समाज, शिक्षा, मीडिया और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार और विश्लेषण पाठकों तक पहुँचाते हैं। उनकी लेखनी का उद्देश्य जागरूकता, संवाद और सकारात्मक सामाजिक चिंतन को बढ़ावा देना है।

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