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RBI का अनुमान: वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई रहेगी 5%, खाद्य और ईंधन की कीमतों में तेजी के संकेत

मुंबई
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (RBI MPC) ने बुधवार को अपनी समीक्षा बैठक के नतीजे घोषित कर दिए हैं. केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर 5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. हालांकि, नीति निर्माताओं ने आगाह किया है कि निकट भविष्य में खाद्य और ईंधन की कीमतों के कारण महंगाई में और तेजी देखी जा सकती है। 

पॉलिसी निर्णयों की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मुख्य रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा है. समिति ने सर्वसम्मति से अपने नीतिगत रुख को भी ‘तटस्थ’ (Neutral) बनाए रखने का फैसला किया है। 

तिमाही आधार पर अस्थिर रहेगा महंगाई का ग्राफ

आरबीआई के नए अनुमानों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की विभिन्न तिमाहियों में मुख्य मुद्रास्फीति का रुख उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है:

    दूसरी तिमाही (Q2): खुदरा महंगाई दर 4.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। 

    तीसरी तिमाही (Q3): आपूर्ति बाधाओं के कारण यह 5.9 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच सकती है। 

    चौथी तिमाही (Q4): इसके दोबारा घटकर 5.5 प्रतिशत पर आने का अनुमान है। 
    वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही (Q1): महंगाई दर 5.3 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। 

कोर इन्फ्लेशन स्थिर, मांग का दबाव कम
गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि लगातार 16 महीनों तक 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे रहने के बाद, जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.4 प्रतिशत पर पहुंच गई. राहत की बात यह है कि खाद्य और ईंधन को छोड़कर अन्य वस्तुओं की कीमतें यानी ‘कोर इन्फ्लेशन’ (Core Inflation) मई और जून में 3.9 प्रतिशत पर स्थिर रही. कीमती धातुओं को अलग करने पर यह दर 2.3 से 2.5 प्रतिशत के दायरे में रही, जो स्पष्ट करती है कि अर्थव्यवस्था में मांग आधारित चौतरफा दबाव नहीं है। 

आर्थिक विकास मजबूत, लेकिन बाहरी जोखिम बरकरार
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है. घरेलू मांग, विनिर्माण क्षेत्र में सुधार और मजबूत निर्यात के दम पर भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है. इसके साथ ही, केंद्रीय बैंक ने वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। 

हालांकि, मानसून पर अल नीनो का असर, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल चुनौतियां महंगाई के लिए बड़े जोखिम बने हुए हैं. इन्हीं जोखिमों को देखते हुए आरबीआई ने दरों में कोई कटौती नहीं की है और कहा है कि नीतिगत कदम उठाने से पहले महंगाई के रुख पर अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है। 

Rupesh Jha

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