सीकर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनावों के बीच पुलिस विभाग में चुनाव ड्यूटी से छूट लेने के मामलों को लेकर जांच शुरू हो गई है। सीकर जिले से करीब 690 पुलिस अधिकारियों और जवानों की ड्यूटी नवसृजित फलौदी जिले में लगाई गई है।
यह तैनाती अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (कानून व्यवस्था), राजस्थान जयपुर के निर्देश पर की गई है। सीकर पुलिस अधीक्षक संजीव नैन के निर्देशन में चुनावी ड्यूटी के लिए पुलिसकर्मियों की सूची तैयार की गई।
लेकिन ड्यूटी आवंटन के बाद कई पुलिसकर्मियों ने अलग-अलग कारण बताते हुए चुनाव ड्यूटी से छूट प्राप्त कर ली। अब इन मामलों में दिए गए कारणों और संबंधित पुलिसकर्मियों के पिछले रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
मां-पत्नी की बीमारी और बच्चों की देखभाल का दिया हवाला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 50 पुलिस अधिकारियों और जवानों ने चुनावी ड्यूटी से छूट लेने के लिए विभिन्न पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला दिया।
इनमें माता या पत्नी की बीमारी, स्वयं की तबीयत खराब होने और घर में छोटे बच्चों की देखभाल जैसी वजहें शामिल हैं।
हालांकि, किसी कर्मचारी का बीमार होना या पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण छूट मांगना अपने आप में गलत नहीं है। जांच का मुख्य विषय यह है कि संबंधित पुलिसकर्मियों द्वारा दिए गए कारण वास्तविक थे या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस प्रशासन ऐसे मामलों की भी जानकारी जुटा रहा है, जिनमें कर्मचारी पहले भी अलग-अलग अवसरों पर चुनावी या अन्य विशेष ड्यूटी से छूट ले चुके हैं।
पुराना रिकॉर्ड खंगाल रहा पुलिस विभाग
सीकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय की कानून व्यवस्था सेल द्वारा चुनावी ड्यूटी से छूट लेने वाले पुलिसकर्मियों का पुराना रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि किन कर्मचारियों ने पहले भी ड्यूटी से छूट प्राप्त की थी और उस समय उन्होंने क्या कारण बताए थे।
सूत्रों के मुताबिक, जिन पुलिसकर्मियों के मामले संदिग्ध पाए जाएंगे, उनके संबंध में आगे की विभागीय प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
इसके अलावा फलौदी पुलिस अधीक्षक को ड्यूटी की सूची भेजे जाने के बाद भी कुछ कर्मचारियों की ड्यूटी हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे मामलों की भी जांच की जा रही है।
पहली सूची में 650, संशोधित सूची में 38 जवानों के नाम
पंचायत चुनाव की सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय की कानून व्यवस्था सेल ने दो अलग-अलग सूचियां जारी की थीं।
पहली सूची में 650 पुलिस अधिकारियों और जवानों के नाम शामिल थे। इसके बाद जारी संशोधित सूची में 38 जवानों के नाम शामिल किए गए।
चुनावी ड्यूटी के लिए एक पुलिस उपाधीक्षक (DYSP), चार पुलिस निरीक्षकों के अलावा उपनिरीक्षक (SI), सहायक उपनिरीक्षक (ASI), हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल स्तर के कर्मचारियों को शामिल किया गया है।
इस तैनाती का उद्देश्य फलौदी जिले में पंचायत चुनाव के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
ड्यूटी सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
मामले में केवल ड्यूटी से छूट लेने वाले कर्मचारियों की ही नहीं, बल्कि ड्यूटी आवंटन की प्रक्रिया पर भी सवाल सामने आए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सीकर जिले के सभी पुलिस थानों, पुलिस लाइन और पुलिस उपाधीक्षक कार्यालयों से चुनाव ड्यूटी के लिए जवानों की सूची मांगी गई थी।
सूत्रों का दावा है कि कुछ कार्यालयों से जिन कांस्टेबलों के नाम भेजे गए थे, उनकी ड्यूटी हटा दी गई। वहीं, कुछ ऐसे कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई, जिनके नाम संबंधित कार्यालयों की ओर से प्रस्तावित नहीं किए गए थे।
इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और ड्यूटी आवंटन में बदलाव के कारणों की स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
कानून व्यवस्था सेल की कार्यप्रणाली भी चर्चा में
चुनावी ड्यूटी की सूची तैयार करने में पुलिस अधीक्षक कार्यालय की कानून व्यवस्था सेल की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस सेल में कार्यरत एक कांस्टेबल की मूल तैनाती रामगढ़ शेखावाटी थाने में है, लेकिन वह कानून व्यवस्था सेल में कार्य कर रहा है।
रिपोर्ट में चुनाव ड्यूटी की व्यवस्था में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होने की बात भी कही गई है।
हालांकि, इस संबंध में किसी प्रकार की अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ पुलिसकर्मियों को मिल सकती है चार्जशीट
चुनाव ड्यूटी से छूट लेने वाले कर्मचारियों के रिकॉर्ड की जांच के बाद विभागीय कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, जिन पुलिसकर्मियों द्वारा बार-बार गलत कारण बताकर ड्यूटी से बचने की पुष्टि होगी, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
कुछ जवानों को विभागीय चार्जशीट जारी किए जाने की संभावना भी है।
हालांकि, अभी किसी विशिष्ट पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई पूरी होने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। संबंधित कर्मचारियों का पक्ष और उपलब्ध रिकॉर्ड जांच में महत्वपूर्ण होंगे।
पंचायत चुनाव में सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण
राजस्थान में पंचायत चुनावों के दौरान मतदान केंद्रों, मतगणना स्थलों और संवेदनशील क्षेत्रों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाती है।
एक जिले से दूसरे जिले में अतिरिक्त पुलिस बल भेजना भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है।
ऐसे में ड्यूटी आवंटन के बाद बड़ी संख्या में कर्मचारियों के छूट लेने से सुरक्षा बल की उपलब्धता और तैनाती की योजना प्रभावित हो सकती है।
इसी कारण पुलिस प्रशासन चुनाव ड्यूटी से छूट के मामलों में दिए गए कारणों और रिकॉर्ड की जांच कर रहा है।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
सीकर जिले में सामने आए इस मामले में फिलहाल पुलिसकर्मियों का पिछला रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।
जांच में यह स्पष्ट होगा कि किन कर्मचारियों ने वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर ड्यूटी से छूट ली और किन मामलों में गलत जानकारी देने की आशंका है।
यदि किसी कर्मचारी द्वारा जानबूझकर गलत जानकारी देने की पुष्टि होती है, तो विभागीय नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल इस मामले में जांच के निष्कर्ष और पुलिस विभाग की आगामी कार्रवाई का इंतजार है।
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