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Preparations for the conquest of Bengal: बंगाल फतह की तैयारी, पीएम मोदी का दौरा, शाह की रणनीति और बीजेपी की परिवर्तन यात्राओं से बढ़ी चुनावी सरगर्मी

Preparations for the conquest of Bengal: बंगाल फतह की तैयारी, पीएम मोदी का दौरा

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव भले ही 2026 में होने हों, लेकिन राजनीतिक हलकों में चुनावी सरगर्मी अभी से तेज होने लगी है। बंगाल की राजनीति में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी तैयारियों का बिगुल बजा दिया है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 20 दिसंबर को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले का दौरा करेंगे, जहां वे एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। यह दौरा न केवल जनसंपर्क बढ़ाने का प्रयास है, बल्कि बंगाल बीजेपी के भीतर चुनावी रणनीति को और धार देने का कदम भी माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान प्रदेश नेतृत्व और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक भी करेंगे। सूत्र बताते हैं कि इन बैठकों में आगामी विधानसभा चुनावों की रूपरेखा, संगठन की मजबूती, बूथ स्तर तक किए जा रहे कार्य, और चुनावी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। बीजेपी का लक्ष्य है कि 2021 के मुकाबले इस बार वह प्रदेश में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराए और टीएमसी को कड़ी चुनौती दे। इसी दिशा में भाजपा पश्चिम बंगाल में 4 से 6 परिवर्तन यात्राएं निकालने की तैयारी कर रही है

इन यात्राओं का उद्देश्य राज्य के हर कोने तक पार्टी की बात पहुंचाना और टीएमसी सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करना है। जानकारी के अनुसार, इन यात्राओं में से एक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संबोधित कर सकते हैं।

बीजेपी नेतृत्व इस बार बंगाल में चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रहा है। पार्टी के बड़े नेताओं का लगातार बंगाल दौरा इसका प्रमाण है। केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे गृहमंत्री अमित शाह जनवरी से बंगाल में लगातार दौरे करेंगे। शाह बूथ लेवल से लेकर प्रदेश इकाई तक की संरचना की समीक्षा करेंगे और संगठन के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करेंगे।

बताया जाता है कि अमित शाह चुनाव अभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभाएंगे। संगठनात्मक मामलों में लंबे समय का अनुभव रखने वाले शाह, बंगाल जैसे जटिल राजनीतिक माहौल वाले राज्य में बीजेपी को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

बीजेपी के चुनावी मुद्दों की बात करें तो पार्टी इस बार कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा और सीमा पार घुसपैठ को प्रमुख विषय बनाकर जनता के बीच जाएगी। पार्टी का दावा है कि ममता बनर्जी की सरकार इन समस्याओं को नियंत्रित करने में विफल रही है। खासकर उत्तरी बंगाल और दक्षिण 24 परगना जैसे इलाकों में अवैध घुसपैठ और कानून-व्यवस्था का मुद्दा बीजेपी के लिए बड़ा चुनावी हथियार बन सकता है। इसके अलावा भाजपा क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दे रही है, ताकि स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याओं का समाधान चुनावी विमर्श का हिस्सा बने।

वहीं दूसरी ओर, टीएमसी प्रमुख और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बीजेपी के इन प्रयासों पर सवाल उठा रही हैं। चुनाव नजदीक आते ही राज्य में कराए जा रहे SIR (Special Investigation Report) को लेकर ममता बनर्जी ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ममता का आरोप है कि यह सर्वेक्षण निष्पक्ष नहीं है और केंद्र सरकार इसमें हस्तक्षेप कर रही है।

उनका कहना है कि SIR के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नहीं, ममता ने एक कदम आगे बढ़कर चुनाव आयोग पर भी बीजेपी से मिले होने का आरोप तक लगा दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कई गतिविधियों में पारदर्शिता की कमी दिख रही है और यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

बंगाल का राजनीतिक परिदृश्य हमेशा से ही संघर्षपूर्ण रहा है। यहां टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर लगातार देखी जा रही है। 2021 विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 77 सीटें हासिल की थीं, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी गई, लेकिन टीएमसी ने भारी बहुमत के साथ सत्ता बरकरार रखी। बीजेपी अब इस जनाधार को और बढ़ाने की कोशिश कर रही है

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि लगातार संगठनात्मक मजबूती, बड़े नेताओं के दौरे, और मुद्दों पर आक्रामक रुख—इन सबके सहारे बंगाल में इस बार मुकाबला और कड़ा होगा।

2026 में होने वाले चुनाव 294 सीटों के लिए होंगे और वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में आने वाला वर्ष बंगाल की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। राजनीतिक गतिविधियों का यह बढ़ता हुआ क्रम साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले महीनों में बंगाल की राजनीति और भी ज्यादा गरमाएगी और दोनों दल राज्य की जनता को लुभाने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे।

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