यूपी में ‘ओवैसी’ दिखाएंगे ‘दम’ !

उत्तर प्रदेश की सियासत में जब भी चुनावों की सुगबुगाहट शुरू होती है, तो समीकरणों का जोड़-घटाव नए सिरे से होने लगता है… इस बार सूबे के चुनावी रण में असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने ताल ठोककर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। पार्टी ने यूपी को लेकर अपनी कमर कस ली है और जमीन पर तैयारियां भी दिखने लगी हैं। इस पूरे सियासी अभियान का आगाज खुद IMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी बहराइच से करने जा रहे हैं, जहां वे एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे।

यह रैली सिर्फ एक चुनावी सभा नहीं, बल्कि यूपी में ओवैसी की पार्टी के शक्ति प्रदर्शन और अभियान की औपचारिक शुरुआत होगी। फिलहाल जो रणनीति सामने आ रही है, उसके मुताबिक IMIM यूपी की करीब 200 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का मन बना रही है… हालांकि, राजनीति में ‘संभावनाओं के दरवाजे’ कभी बंद नहीं होते, इसलिए पार्टी ने गठबंधन का विकल्प भी खुला रखा है।

IMIM के रणनीतिकारों का कहना है कि अगर चुनाव से पहले किसी मजबूत दल के साथ गठबंधन की बात बनती है, तो सीटों की संख्या को उस हिसाब से तय किया जा सकता है। पार्टी का मुख्य ध्यान इस बार पश्चिमी यूपी के साथ-साथ अवध के कुछ खास इलाकों पर है। इनमें बहराइच, बलरामपुर और बस्ती जैसे जिले शामिल हैं, जहां मुस्लिम मतदाताओं की आबादी अच्छी-खासी है।

बहराइच की रैली को लेकर एक और बड़ी चर्चा बाजार में गर्म है। माना जा रहा है कि IMIM के यूपी प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली बहराइच की ‘मटेरा विधानसभा सीट’ से चुनाव लड़ सकते हैं। सियासी गलियारों में ये कयास लगाए जा रहे हैं कि खुद असदुद्दीन ओवैसी रविवार को होने वाली अपनी रैली में शौकत अली के नाम का आधिकारिक ऐलान कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो मटेरा सीट पर मुकाबला काफी रोचक होने वाला है। इस बार IMIM की रणनीति काफी बदली हुई और आक्रामक नजर आ रही है।

पार्टी खुद को समाजवादी पार्टी के मुकाबले मुस्लिम समुदाय के सामने एक ज्यादा मजबूत और बेहतर विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश में है। इसके साथ ही, पार्टी केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं रहना चाहती। ओवैसी की नजर इस बार ‘दलित-मुस्लिम’ गठजोड़ पर है। पार्टी के भीतर ये माना जा रहा है कि अगर मायावती की बहुजन समाज पार्टी के साथ उनका गठबंधन हो जाता है, तो ये सोशल इंजीनियरिंग बीजेपी और सपा दोनों का खेल बिगाड़ सकती है। अंदरखाने ये बातें भी चल रही हैं कि IMIM नेतृत्व सही समय पर बसपा से बातचीत की पहल भी कर सकता है।

चुनावी प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए पार्टी ने पूरे उत्तर प्रदेश को चार जोन में बांट दिया है और विधानसभावार प्रभारियों की नियुक्तियां भी कर दी हैं। गौर करने वाली बात ये है कि पिछले यानी 2022 के चुनाव में भी पार्टी ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 19 सीटों पर गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया गया था। IMIM की इस सक्रियता और 200 सीटों पर चुनाव लड़ने के दावों ने समाजवादी पार्टी को बेचैन कर दिया है। सपा ने ओवैसी की पार्टी पर सीधा और तीखा हमला बोला है। सपा प्रवक्ता डॉक्टर आशुतोष वर्मा का कहना है कि IMIM के नेता सिर्फ विधानसभा या लोकसभा चुनाव के वक्त ही उत्तर प्रदेश में नजर आते हैं और वोटिंग खत्म होते ही गायब हो जाते हैं।

सपा का आरोप है कि चुनाव के बाद जनता के मुद्दों से इनका कोई सरोकार नहीं रहता। सपा प्रवक्ता ने एक बड़ा राजनीतिक आरोप लगाते हुए कहा कि, IMIM के चुनावी मैदान में उतरने से सीधे तौर पर बीजेपी को फायदा पहुंचता है क्योंकि इससे धर्मनिरपेक्ष वोटों का बिखराव होता है। मटेरा सीट का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि जब से ये सीट बनी है, तब से यहां सपा लगातार जीतती आ रही है। लेकिन अब IMIM के आने से यहां के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि, उन्होंने ये भी जोड़ा कि यूपी का मुस्लिम समुदाय अब पूरी तरह जागरूक है और वो अच्छी तरह समझता है कि कौन सी पार्टी किसके इशारे पर काम कर रही है। उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से बेहद अनप्रेडिक्टेबल रही है। एक तरफ जहां IMIM खुद को मुसलमानों और हाशिए पर खड़े समाज की असली आवाज बताकर स्थापित करने में जुटी है, वहीं सपा इसे केवल वोट काटने वाली राजनीति करार दे रही है। अब देखना ये होगा कि ओवैसी की ये ‘बहराइच से शुरू हुई हुंकार’ उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों पर क्या असर डालती है और जनता उनके दावों पर कितना भरोसा जताती है।

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