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Owaisi targeted Ajit Doval: ओवैसी ने अजीत डोभाल पर साधा निशाना, बोले ओवैसी: “NSA इतिहास में है ‘कमजोर’”, इतिहास का बदला लेने को ठहराया गलत

Owaisi targeted Ajit Doval: ओवैसी ने अजीत डोभाल पर साधा निशाना

 

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के हालिया बयान पर तीखा हमला बोला है। ओवैसी ने डोभाल को इतिहास के प्रति “कमजोर” बताते हुए कहा कि भारत के अतीत को लेकर इस तरह की टिप्पणियां न सिर्फ अधूरी हैं, बल्कि समाज में नए सवाल भी खड़े करती हैं।

यह बयान उन्होंने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में नगर निगम चुनाव के प्रचार के आखिरी दिन आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए दिया। छत्रपति संभाजीनगर उन 29 शहरों और बड़े कस्बों में शामिल है, जहां 15 जनवरी को नगर निगम चुनाव के लिए मतदान होना है।

ओवैसी का यह बयान उस संदर्भ में आया है, जब पिछले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में NSA अजीत डोभाल ने भारत के युवाओं से ‘इतिहास का बदला’ लेने की बात कही थी। डोभाल ने अपने संबोधन में कहा था कि भारत को सिर्फ अपनी सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक हर स्तर पर खुद को मजबूत करना होगा, ताकि गुलामी और हमलों से जुड़े दर्दनाक इतिहास का बदला लिया जा सके।

उन्होंने यह भी कहा था कि भारत एक समय प्रगतिशील समाज था, जिसने कभी दूसरी सभ्यताओं या उनके मंदिरों पर हमला नहीं किया, लेकिन सुरक्षा के प्रति पर्याप्त सजगता न होने के कारण देश को इतिहास से सबक सीखना पड़ा।

डोभाल के इसी दावे को लेकर ओवैसी ने सवाल खड़े किए। AIMIM प्रमुख ने कहा कि अगर यह कहा जा रहा है कि भारत ने कभी दूसरे देशों पर हमला नहीं किया, तो यह ऐतिहासिक तथ्यों के साथ न्याय नहीं करता। ओवैसी ने चोल वंश का उदाहरण देते हुए कहा कि दक्षिण भारत के चोल राजाओं ने अपने समय में श्रीलंका, मालदीव, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड जैसे क्षेत्रों पर शासन किया था।

उनके मुताबिक, इस तरह के ऐतिहासिक प्रसंग यह दर्शाते हैं कि भारत का इतिहास केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि विस्तार और प्रभाव का भी रहा है। ओवैसी ने कहा कि NSA का यह बयान इतिहास की गहराई को नजरअंदाज करता है।

‘इतिहास का बदला’ लेने वाले बयान पर भी ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आज अतीत की घटनाओं के आधार पर बदले की बात की जा रही है, तो फिर इसकी सीमा कहां तक जाएगी। ओवैसी ने कहा कि अगर इतिहास को इसी तरह खंगाला जाएगा, तो सवाल यह भी उठेगा कि महात्मा गांधी के हत्यारे का धर्म क्या था।

उन्होंने तर्क दिया कि अगर किसी समुदाय या व्यक्ति को अतीत की घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा, तो यह सिलसिला बहुत पीछे तक जाएगा। ओवैसी ने महाभारत का संदर्भ देते हुए कहा कि फिर कौरवों के अत्याचारों का बदला कौन लेगा। उनके अनुसार, इस तरह की बयानबाजी समाज को जोड़ने के बजाय और ज्यादा बांटने का काम करती है।

जनसभा में ओवैसी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आरएसएस का योगदान संदिग्ध रहा है। ओवैसी ने दावा किया कि संघ के संस्थापक केबी हेडगेवार को जेल अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन करने के कारण नहीं, बल्कि खिलाफत आंदोलन का समर्थन करने की वजह से भेजा गया था। उन्होंने कहा कि इतिहास के कुछ हिस्सों को चुनकर पेश करना और बाकी तथ्यों को नजरअंदाज करना सही नहीं है।

महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए ओवैसी ने छत्रपति संभाजीनगर क्षेत्र में बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि अगर इस इलाके में कोई बांग्लादेशी प्रवासी पाया जाता है, तो यह सीधे तौर पर केंद्र सरकार की नाकामी को दर्शाएगा। ओवैसी के मुताबिक, जब देश में पुलिस, खुफिया एजेंसियां और सीमा सुरक्षा बल मौजूद हैं, तो अवैध घुसपैठ का मुद्दा सरकार की जिम्मेदारी बनता है, न कि स्थानीय आबादी की।

ओवैसी ने बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अब तक बांग्लादेश सीमा पर 10 किलोमीटर लंबी बाड़ भी पूरी नहीं कर सकी है, जबकि घुसपैठ को लेकर सख्त बयान दिए जाते हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब सीमा सुरक्षा की बुनियादी व्यवस्थाएं पूरी नहीं हो पाई हैं, तो अवैध प्रवासियों का आरोप आम लोगों पर कैसे लगाया जा सकता है।

नगर निगम चुनाव के प्रचार के आखिरी दिन ओवैसी का यह भाषण राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। उनके बयान न केवल स्थानीय चुनावी मुद्दों पर केंद्रित थे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति, इतिहास की व्याख्या और सुरक्षा से जुड़े बड़े सवालों को भी छूते नजर आए। अजीत डोभाल के बयान पर उनकी प्रतिक्रिया ने एक बार फिर इतिहास, राष्ट्रवाद और राजनीतिक विमर्श को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

Kirti Bhardwaj

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